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Almora News: स्याल्दे में सड़क के गड्ढों में रेत भरने पर भड़के ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sun, 17 May 2026 10:42 PM IST
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स्याल्दे (अल्मोड़ा)। चचरोटी-स्याल्दे-भाकूड़ा मार्ग लंबे समय से गड्ढों और उखड़े डामर के कारण बदहाल बना हुआ है। सड़क की मरम्मत के बजाय विभाग की ओर से गड्ढों में विनोद नदी का रेत डालकर भरान किए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब पांच वर्ष पहले सड़क का डामरीकरण किया गया था लेकिन अब सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है और दोबारा डामरीकरण की आवश्यकता है। इस मार्ग से बाजार, तहसील, विकासखंड समेत 12 से अधिक विभागीय कार्यालय जुड़े होने के कारण यहां वाहनों का दबाव अधिक रहता है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क के गड्ढों में रेत डालने से दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटना होने का खतरा बढ़ गया है। उनका कहना है कि अस्थायी तौर पर गड्ढों को पत्थर और मिट्टी से भरा जाता है लेकिन नदी की रेत डालना लापरवाही को दर्शाता है।
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कई बार उठी सड़क सुधार की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क के सुधारीकरण को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन हर बार बजट का अभाव बताकर मामला टाल दिया गया। सड़क की स्थिति और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताने वालों में राजेंद्र सिंह रावत, अरुण पपनौई, गोविंद गिरी, राजेंद्र गिरी, मनोज तिवाड़ी, मंडल अध्यक्ष कुदन लाल, भीम सिंह, देव सिंह बिष्ट, गोविंद सिंह, भूपाल सिंह विष्ट और बालम सिंह मनराल समेत कई स्थानीय लोग और व्यापारी शामिल रहे।
कोट
ग्रामीण सड़कों के लिए बजट अभी नहीं आया है। पेंच भरान के लिए तक बजट नहीं है। फिलहाल ठेकेदार की ओर से गड्ढों को समतल करने का काम किया जा रहा था, जो अब बंद कर दिया है। अब जब बजट आएगा तभी कार्य होगा। - चेतन रावल, जेई, पीडब्लूडी, रानीखेत
ग्रामीणों का कहना है कि करीब पांच वर्ष पहले सड़क का डामरीकरण किया गया था लेकिन अब सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है और दोबारा डामरीकरण की आवश्यकता है। इस मार्ग से बाजार, तहसील, विकासखंड समेत 12 से अधिक विभागीय कार्यालय जुड़े होने के कारण यहां वाहनों का दबाव अधिक रहता है।
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स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क के गड्ढों में रेत डालने से दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और दुर्घटना होने का खतरा बढ़ गया है। उनका कहना है कि अस्थायी तौर पर गड्ढों को पत्थर और मिट्टी से भरा जाता है लेकिन नदी की रेत डालना लापरवाही को दर्शाता है।
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ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क के सुधारीकरण को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन हर बार बजट का अभाव बताकर मामला टाल दिया गया। सड़क की स्थिति और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताने वालों में राजेंद्र सिंह रावत, अरुण पपनौई, गोविंद गिरी, राजेंद्र गिरी, मनोज तिवाड़ी, मंडल अध्यक्ष कुदन लाल, भीम सिंह, देव सिंह बिष्ट, गोविंद सिंह, भूपाल सिंह विष्ट और बालम सिंह मनराल समेत कई स्थानीय लोग और व्यापारी शामिल रहे।
कोट
ग्रामीण सड़कों के लिए बजट अभी नहीं आया है। पेंच भरान के लिए तक बजट नहीं है। फिलहाल ठेकेदार की ओर से गड्ढों को समतल करने का काम किया जा रहा था, जो अब बंद कर दिया है। अब जब बजट आएगा तभी कार्य होगा। - चेतन रावल, जेई, पीडब्लूडी, रानीखेत