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Bageshwar News: रेता-कंक्रीट महंगा मिलने से निर्माण कार्यों में आई कमी
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गरुड़ (बागेश्वर)। जिले में खनन गतिविधियों पर लगी रोक से निर्माण कार्यों पर पड़ रहे असर के कारण स्थानीय कारोबार प्रभावित हो रहा है। रेता और कंक्रीट बाहर से मंगाने पर पड़ रहा है। निर्माण कार्य कम होने से संबंधित कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
नगर क्षेत्र में किए जाने वाले निर्माण कार्यों के लिए लोग स्थानीय क्रशर से ही रेत और गिट्टी खरीदते थे। खनन गतिविधि बंद होने के बाद हल्द्वानी या अन्य जिलों से मंगानी पड़ती है। इससे रेत और गिट्टी 50 से 60 रुपये क्विंटल महंगी मिल रही है। महंगाई से बचने के लिए लोग अपने भवन और अन्य निर्माण कार्यों को स्थगित कर रहे हैं। निर्माण कम होने से खिड़की-दरवाजा, एंगल, पेंट कारोबारी, लकड़ी आदि के कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को भी आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
कोट
पिछले साल मकान का काम शुरु कराया था। हल्द्वानी से रेता, कंक्रीट मंगाने में अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। मकान के काम में लगातार देरी हो रही है।
अंकित जोशी, गरुड़
रेता, कंक्रीट महंगा होने के बाद से लोग मकान बनाने से बच रहे हैं। भवनों का निर्माण का काम पहले की तुलना में काम काफी कम हो गया है। कई दिनों तक काम नहीं मिलने से परेशानी हो रही है।
भोज पासवान, श्रमिक
एक गाड़ी रेता, कंक्रीट बाहर से मंगाने में पांच से छह हजार रुपये अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। निजी निर्माण कार्य बेहद कम हो गए हैं। काम की कमी से श्रमिक और ठेकेदार प्रभावित हो गए हैं।
कुंदन सिंह, ठेकेदार
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नगर क्षेत्र में किए जाने वाले निर्माण कार्यों के लिए लोग स्थानीय क्रशर से ही रेत और गिट्टी खरीदते थे। खनन गतिविधि बंद होने के बाद हल्द्वानी या अन्य जिलों से मंगानी पड़ती है। इससे रेत और गिट्टी 50 से 60 रुपये क्विंटल महंगी मिल रही है। महंगाई से बचने के लिए लोग अपने भवन और अन्य निर्माण कार्यों को स्थगित कर रहे हैं। निर्माण कम होने से खिड़की-दरवाजा, एंगल, पेंट कारोबारी, लकड़ी आदि के कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को भी आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है।
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पिछले साल मकान का काम शुरु कराया था। हल्द्वानी से रेता, कंक्रीट मंगाने में अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। मकान के काम में लगातार देरी हो रही है।
अंकित जोशी, गरुड़
रेता, कंक्रीट महंगा होने के बाद से लोग मकान बनाने से बच रहे हैं। भवनों का निर्माण का काम पहले की तुलना में काम काफी कम हो गया है। कई दिनों तक काम नहीं मिलने से परेशानी हो रही है।
भोज पासवान, श्रमिक
एक गाड़ी रेता, कंक्रीट बाहर से मंगाने में पांच से छह हजार रुपये अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। निजी निर्माण कार्य बेहद कम हो गए हैं। काम की कमी से श्रमिक और ठेकेदार प्रभावित हो गए हैं।
कुंदन सिंह, ठेकेदार

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