{"_id":"695a037fb7bf3b63fd0f3014","slug":"former-soldier-digitally-arrested-after-being-threatened-with-being-framed-in-the-pulwama-case-2026-01-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uk: पुलवामा केस में फंसाने का डर दिखाकर पूर्व सैनिक को डिजिटल अरेस्ट, दो लाख की ठगी टली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uk: पुलवामा केस में फंसाने का डर दिखाकर पूर्व सैनिक को डिजिटल अरेस्ट, दो लाख की ठगी टली
संवाद न्यूज एजेंसी
Published by: गायत्री जोशी
Updated Sun, 04 Jan 2026 11:37 AM IST
विज्ञापन
सार
बागेश्वर जिले में साइबर ठगों ने पुलवामा हमले में फंसाने का डर दिखाकर एक पूर्व सैनिक को करीब पांच घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।
कपकोट में डिजिटल अरेस्ट हुए पूर्व सैनिक की काउंसलिंग करते थानाध्यक्ष।
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
बागेश्वर में पुलवामा हमले में फंसाने का डर दिखाकर एक पूर्व सैनिक को साइबर ठगों ने पांच घंटे तक डिजिटल अरेस्ट कर दिया। ठगों ने उनसे दो लाख रुपये की मांग की मगर समय रहते पड़ोसी युवक विवेक के विवेक से उनका खाता खाली होने से बच गया।
बताया कि ऐठाण के कल्याण राम को थानाध्यक्ष प्रताप सिंह नगरकोटी ने शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आई।फोन करने वाले ने स्वयं को जम्मू कश्मीर एटीएस का अधिकारी बताया। कहा, कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंचने वाली है। उसने रिटायर फौजी से एक कमरे में बंद होने के लिए कहा। इस पर उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया तो उसे पुलवामा हमले और उसमें मारे गए लोगों के बारे में बताया गया। कहा कि घटना के आरोप में गिरफ्तार आतंकी ने उनके खाते के धन से हथियार खरीदने का खुलासा किया है। पीड़ित को पूरी तरह से डराने के बाद ठग ने उनसे बैंक खाते की डिटेल, आधार कार्ड समेत कई दस्तावेज की जानकारी मांग ली।
शाम होने तक जब पीड़ित नहीं दिखे तो पड़ोस में रहने वाले टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष विवेक कोरंगा की सूझबूझ काम आई। विवेक ने बताया कि कल्याण राम भीतर से दरवाजा बंद करके वीडियो कॉल पर बिजी थे। कोई उन्हें फोन पर निर्देश दे रहा था और वह पालन करते जा रहे थे
मामला संदिग्ध लगने पर विवेक ने तत्काल पुलिस को खबर कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की दो टीमें मौके पर पहुंची। पहली टीम के कर्मचारियों ने किसी तरह से उन्हें मनाकर दरवाजा खुलवाया। बातचीत के दौरान उनके डिजिटल अरेस्ट होने की जानकारी मिली।
बाद में पुलिस की दूसरी टीम भी मौके पर पहुंची। इससे पहले कि ठग पूर्व फौजी का खाता साफ करते, पुलिस ने कल्याणा राम के खाते की राशि दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करवाकर उन्हें ठगी का शिकार होने से बचा लिया। इसके बाद पुलिस ने पूर्व फौजी की काउंसलिंग की और भविष्य में इस तरह से किसी के झांसे में नहीं आने के लिए कहा।
मकान की मरम्मत कराने आए थे गांव
विवेक ने बताया कि कल्याण राम अपने परिवार के साथ हल्द्वानी में रहते हैं। इन दिनों वह अपने मकान की मरम्मत कराने घर आए थे। घटना के दौरान वह अकेले ही थे जिसके कारण पांच घंटे तक उनके डिजिटल अरेस्ट होने का पता नहीं चल पाया। उन्होंने बताया कि दोपहर से शाम तक मानसिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद वह बदहवास हो गए थे। अब भी वह घटना से परेशान हैं।
पुलिस की अपील :
कोई भी सरकारी एजेंसी जैसे सीबीआई, पुलिस, एटीएस, ईडी वीडियो कॉल के जरिये किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है और ना ही फोन पर पैसों की मांग करती है। डरे नहीं, सतर्क रहें और कोई भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत अपने नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचित करें। अपनी बैंक डिटेल्स, आधार नंबर या ओटीपी किसी भी अनजान के साथ साझा न करें।
साइबर ठग अलग-अलग तरह के डर दिखाकर रुपये हड़पने की कोशिश करते हैं। किसी को भी फोन करके डरा-धमकाकर डिजिटल अरेस्ट किया जा सकता है। फोन पर रुपये की मांग करने या किसी तरह का भय दिखाने पर तत्काल पुलिस से संपर्क करना चाहिए। ऐठाण में समय पर सूचना मिलने के कारण ही पुलिस पीड़ित को ठगी से बचा सकी। - मनीष शर्मा, सीओ, कपकोट
Trending Videos
बताया कि ऐठाण के कल्याण राम को थानाध्यक्ष प्रताप सिंह नगरकोटी ने शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आई।फोन करने वाले ने स्वयं को जम्मू कश्मीर एटीएस का अधिकारी बताया। कहा, कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंचने वाली है। उसने रिटायर फौजी से एक कमरे में बंद होने के लिए कहा। इस पर उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया तो उसे पुलवामा हमले और उसमें मारे गए लोगों के बारे में बताया गया। कहा कि घटना के आरोप में गिरफ्तार आतंकी ने उनके खाते के धन से हथियार खरीदने का खुलासा किया है। पीड़ित को पूरी तरह से डराने के बाद ठग ने उनसे बैंक खाते की डिटेल, आधार कार्ड समेत कई दस्तावेज की जानकारी मांग ली।
विज्ञापन
विज्ञापन
शाम होने तक जब पीड़ित नहीं दिखे तो पड़ोस में रहने वाले टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष विवेक कोरंगा की सूझबूझ काम आई। विवेक ने बताया कि कल्याण राम भीतर से दरवाजा बंद करके वीडियो कॉल पर बिजी थे। कोई उन्हें फोन पर निर्देश दे रहा था और वह पालन करते जा रहे थे
मामला संदिग्ध लगने पर विवेक ने तत्काल पुलिस को खबर कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की दो टीमें मौके पर पहुंची। पहली टीम के कर्मचारियों ने किसी तरह से उन्हें मनाकर दरवाजा खुलवाया। बातचीत के दौरान उनके डिजिटल अरेस्ट होने की जानकारी मिली।
बाद में पुलिस की दूसरी टीम भी मौके पर पहुंची। इससे पहले कि ठग पूर्व फौजी का खाता साफ करते, पुलिस ने कल्याणा राम के खाते की राशि दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करवाकर उन्हें ठगी का शिकार होने से बचा लिया। इसके बाद पुलिस ने पूर्व फौजी की काउंसलिंग की और भविष्य में इस तरह से किसी के झांसे में नहीं आने के लिए कहा।
मकान की मरम्मत कराने आए थे गांव
विवेक ने बताया कि कल्याण राम अपने परिवार के साथ हल्द्वानी में रहते हैं। इन दिनों वह अपने मकान की मरम्मत कराने घर आए थे। घटना के दौरान वह अकेले ही थे जिसके कारण पांच घंटे तक उनके डिजिटल अरेस्ट होने का पता नहीं चल पाया। उन्होंने बताया कि दोपहर से शाम तक मानसिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद वह बदहवास हो गए थे। अब भी वह घटना से परेशान हैं।
पुलिस की अपील :
कोई भी सरकारी एजेंसी जैसे सीबीआई, पुलिस, एटीएस, ईडी वीडियो कॉल के जरिये किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है और ना ही फोन पर पैसों की मांग करती है। डरे नहीं, सतर्क रहें और कोई भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत अपने नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचित करें। अपनी बैंक डिटेल्स, आधार नंबर या ओटीपी किसी भी अनजान के साथ साझा न करें।
साइबर ठग अलग-अलग तरह के डर दिखाकर रुपये हड़पने की कोशिश करते हैं। किसी को भी फोन करके डरा-धमकाकर डिजिटल अरेस्ट किया जा सकता है। फोन पर रुपये की मांग करने या किसी तरह का भय दिखाने पर तत्काल पुलिस से संपर्क करना चाहिए। ऐठाण में समय पर सूचना मिलने के कारण ही पुलिस पीड़ित को ठगी से बचा सकी। - मनीष शर्मा, सीओ, कपकोट

कमेंट
कमेंट X