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Bageshwar News: जननी सुरक्षा योजना की सुस्त रफ्तार, 163 महिलाओं को अब भी भुगतान का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sun, 15 Feb 2026 11:40 PM IST
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बागेश्वर। जिले में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने वाली जननी सुरक्षा योजना अपनी रफ्तार खोती नजर आ रही है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों ने विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जिले में इस अवधि के दौरान कुल 1657 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 1494 प्रसूताओं को ही अब तक प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा सका है। शेष 163 महिलाएं आज भी सिस्टम की सुस्ती और कागजी कार्रवाई के चलते अपनी हक की राशि के लिए इंतजार कर रही हैं।
सबसे गंभीर स्थिति जिला अस्पताल की है, जहां सबसे अधिक 1319 प्रसव हुए, लेकिन यहां 107 महिलाओं का भुगतान अधर में लटका हुआ है। विभाग की ओर से इस देरी का मुख्य कारण बैंक खातों का विवरण समय पर उपलब्ध न होना बताया जा रहा है। इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गरुड़ में 37, कपकोट में 16 और कांडा में तीन प्रसूताओं को अब तक भुगतान नहीं मिल पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति अधिक चिंताजनक है क्योंकि 1523 ग्रामीण प्रसवों के सापेक्ष मात्र 1364 महिलाओं को ही भुगतान मिला है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 134 में से 130 महिलाओं को राशि मिल चुकी है।
योजना की जमीनी हकीकत को संभालने वाली आशा कार्यकर्ताओं की स्थिति भी बहुत उत्साहजनक नहीं है। जिला अस्पताल में आशाओं की ओर से लाए गए 496 प्रसवों के सापेक्ष केवल 431 आशाओं को ही समय पर प्रोत्साहन राशि मिल पाई है। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक लाभार्थियों के भुगतान पर कुल 20.65 लाख रुपये खर्च किए हैं, लेकिन लंबित मामलों की बढ़ती संख्या बता रही है कि जमीनी स्तर पर तालमेल की भारी कमी है।
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सबसे गंभीर स्थिति जिला अस्पताल की है, जहां सबसे अधिक 1319 प्रसव हुए, लेकिन यहां 107 महिलाओं का भुगतान अधर में लटका हुआ है। विभाग की ओर से इस देरी का मुख्य कारण बैंक खातों का विवरण समय पर उपलब्ध न होना बताया जा रहा है। इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गरुड़ में 37, कपकोट में 16 और कांडा में तीन प्रसूताओं को अब तक भुगतान नहीं मिल पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति अधिक चिंताजनक है क्योंकि 1523 ग्रामीण प्रसवों के सापेक्ष मात्र 1364 महिलाओं को ही भुगतान मिला है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 134 में से 130 महिलाओं को राशि मिल चुकी है।
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योजना की जमीनी हकीकत को संभालने वाली आशा कार्यकर्ताओं की स्थिति भी बहुत उत्साहजनक नहीं है। जिला अस्पताल में आशाओं की ओर से लाए गए 496 प्रसवों के सापेक्ष केवल 431 आशाओं को ही समय पर प्रोत्साहन राशि मिल पाई है। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक लाभार्थियों के भुगतान पर कुल 20.65 लाख रुपये खर्च किए हैं, लेकिन लंबित मामलों की बढ़ती संख्या बता रही है कि जमीनी स्तर पर तालमेल की भारी कमी है।
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