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Bageshwar News: 1956 में स्वीकृत हुआ था कांडा विकासखंड, सड़क नहीं होने से बिगड़ी बात

संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Sat, 11 Apr 2026 11:15 PM IST
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Kanda development block was approved in 1956, but the lack of a road worsened the situation.
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कांडा (बागेश्वर)। कांडा को पृथक विकासखंड बनाने की लड़ाई सात दशक से जारी है। क्षेत्रवासियों की मानें तो बागेश्वर में खुला विकासखंड कार्यालय कांडा के नाम से स्वीकृत था। मोटर मार्ग नहीं बनने से तब बात बिगड़ गई थी जिसे आज तक नहीं सुलझाया गया है। अब क्षेत्रवासी आंदोलन कर अपना हक मांग रहे हैं।
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कांडा कमस्यार विकासखंड संघर्ष समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह भंडारी ने बताया कि 1956 में ग्राम सभाओं के विकास की मंशा के साथ विकासखंडों की स्थापना हुई थी। कांडा को भी उसी समय विकासखंड के रूप में स्वीकृति मिली थी लेकिन तब यहां तक मोटर मार्ग नहीं बना था। सड़क न होने से विकासखंड को बागेश्वर में स्थापित किया गया। हालांकि सड़क बनते ही विकासखंड को कांडा स्थानांतरित करने का तर्क दिया गया था जो शासन-प्रशासन की अनदेखी से पूरा नहीं हो सका है। अब क्षेत्रवासी वल्ला-पल्ला कमस्यार, दुग और नाकुरी पट्टी के गांवों को मिलाकर कांडा को पृथक विकासखंड बनाने की मांग कर रहे हैं।
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15 अगस्त 2022 से चल रहा संघर्ष
समिति ने 15 अगस्त 2022 को प्रत्येक ग्राम पंचायत में ध्वजारोहण के दौरान पृथक विकासखंड की मांग के लिए संघर्ष का संकल्प लिया था। राज्य स्थापना दिवस नौ नवंबर 2022 को जिला मुख्यालय में रैली निकाली गई। दिल्ली के जंतर-मंतर में धरना दिया गया। दो अक्तूबर 2025 को प्रत्येक ग्राम पंचायत में धरना दिया गया। नौ नवंबर 2025 को कालिका मंदिर कांडा में रैली हुई। विगत 23 मार्च से क्रमिक अनशन जारी है। शनिवार को क्रमिक अनशन में पूर्व सैनिक प्रयाग सिंह भंडारी और सुरेंद्र सिंह भंडारी बैठे।

कोट
विकासखंड कांडा के नाम पर स्वीकृत था लेकिन उसे कांडा स्थानांतरित नहीं किया गया। लोगों को 30 से 70 किमी दूर ब्लॉक कार्यालय जाना पड़ता है। कांडा कमस्यार विकासखंड की पुनर्स्थापना/स्थापना की मांग जब तक अधर में रहेगी तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

सुरेश सिंह रावत, सचिव संघर्ष समिति
बागेश्वर विकासखंड में 182 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें कांडा कमस्यार क्षेत्र के गांव सर्वाधिक पिछड़े हैं। क्षेत्र के समुचित विकास के लिए पृथक विकासखंड का निर्माण समय की मांग है। इसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए।
वंशीधर कांडपाल, पूर्व ग्राम प्रधान
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