Bageshwar News: सजकर तैयार संग्रहालय पर लटका ताला, 90 दुर्लभ मूर्तियों के दीदार से वंचित पर्यटक
ऐतिहासिक बागनाथ मंदिर परिसर में 66.90 लाख रुपये की लागत से तैयार संग्रहालय पांच महीने से ताले में बंद है। आठवीं से दसवीं शताब्दी की करीब 90 दुर्लभ मूर्तियां सजाए जाने के बावजूद श्रद्धालु और पर्यटक इनके दीदार से वंचित हैं।
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बागेश्वर का ऐतिहासिक बागनाथ मंदिर परिसर में 66.90 लाख रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ संग्रहालय बीते पांच महीने से सफेद हाथी साबित हो रहा है। मार्च महीने में साज-सज्जा का काम पूरा होने और पॉलीकार्बोनेट बॉक्सों में पौराणिक मूर्तियों को करीने से सजाए जाने के बावजूद अब तक संग्रहालय का ताला नहीं खुल सका है। शासन-प्रशासन की इस लेटलतीफी के कारण मंदिर में दर्शन के लिए देश-विदेश से पहुंच रहे हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आठवीं से दसवीं शताब्दी की अनमोल धरोहरों के दीदार से वंचित रहना पड़ रहा है।
बागनाथ मंदिर समूह के एक बंद कमरे में वर्षों से आठवीं, नौवीं और दसवीं शताब्दी की करीब 90 अति-दुर्लभ मूर्तियां और शिलालेख उपेक्षित पड़े हुए थे। जिला प्रशासन की पहल पर कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग ने मंदिर परिसर में ही अत्याधुनिक संग्रहालय भवन का निर्माण कराया। संग्रहालय के भीतर फर्श पर लकड़ी की फ्लोरिंग, लेजर लेटर कटिंग, सुरक्षा के लिए सीसीटीवी, अग्निशमन उपकरण और मूर्तियों के संरक्षण के लिए पॉलीकार्बोनेट बॉक्स लगाए गए हैं। संग्रहालय में आठवीं शताब्दी की उमा-महेश, पार्वती, वैष्णवी, कौमारी मातृकाएं, नौवीं शताब्दी की महिषासुर मर्दिनी, हरिहर, गणेश, चामुंडा, वाराह, वीणाधारी शिव, त्रिभुजी शिव, ब्रह्माणी, दशावतार पट्ट, पंचदेव पट्ट, माहेश्वरी और दसवीं शताब्दी की शेषशायी विष्णु, सहस्र शिवलिंग, चतुर्मुखी शिव, भगवान विष्णु, कार्तिकेय की दुर्लभ मूर्तियां और मातृकापट्ट सुरक्षित सजाए जा चुके हैं। लेकिन इतने महीनों बाद भी इसे आम जनता के लिए न खोले जाना व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
बागनाथ मंदिर में प्रस्तावित संग्रहालय का निर्माण कार्य और आंतरिक सज्जा का काम पूरी तरह पूरा कर लिया गया है। निर्माण संपन्न होने के बाद संग्रहालय के आगे के संचालन और हस्तांतरण के लिए पुरातत्व विभाग को विधिवत प्रस्ताव भेजा जा चुका है।-आर चंद्रा, ईई, ग्रामीण निर्माण विभाग, बागेश्वर
संग्रहालय के नियमित संचालन और सुरक्षा के लिए शासन से आवश्यक स्टाफ और कर्मचारियों की मांग की गई है। जैसे ही तैनाती की प्रक्रिया पूरी होती है, जल्द ही संग्रहालय का लोकार्पण कर इसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।-डॉ. चंद्रसिंह चौहान, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, अल्मोड़ा/बागेश्वर