पिंडारी ग्लेशियर लापता मामला: 80 मीटर नीचे अभिषेक का कैमरा, 300 मीटर दूर मिली जैकेट; पिता ने उठाए ये सवाल
पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक पर लापता नोएडा के ट्रेकर अभिषेक चौहान के मामले में नया मोड़ आ गया है। परिजनों ने गाइड की कहानी पर सवाल उठाते हुए घटना के पीछे आपराधिक साजिश की आशंका जताई है जिसके बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक पर द्वाली के समीप लापता नोएडा के पर्यटक अभिषेक चौहान (26) के मामले में अब नया और बेहद सनसनीखेज मोड़ आ गया है। लापता ट्रेकर के पिता और सीमा सुरक्षा बल की 54 बटालियन में तैनात निरीक्षक रघुराज चौहान ने गाइड की कहानी को पूरी तरह मनगढ़ंत और साजिश बताते हुए कपकोट थाने में तहरीर दी है। परिजनों ने संदेह जताया है कि यह साधारण हादसा नहीं बल्कि इसके पीछे कोई शातिर आपराधिक षड्यंत्र हो सकता है। पुलिस ने परिजनों के संदेह के आधार पर मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है।
बीएसएफ अधिकारी रघुराज चौहान की ओर से कपकोट पुलिस को दी गई लिखित तहरीर के अनुसार उनका बेटा अभिषेक चौहान क्षेत्र के एक गाइड के साथ पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक पर गए थे। 29 मई को गाइड ने लौटकर सूचना दी कि अभिषेक द्वाली से नीचे आते समय रास्ते में कहीं लापता हो गया है। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, वन विभाग और पुलिस की टीमों ने द्वाली से लेकर बदियाकोट तक पिंडर नदी और दुर्गम पहाड़ियों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया।
इस खोजबीन के दौरान अनुमानित घटनास्थल से लगभग 80 मीटर नीचे एक खड़ी चट्टान पर अभिषेक का कैमरा और उससे 300 मीटर आगे नदी के पत्थरों के बीच फंसी उसकी जैकेट मिली। इसके आधार पर रेस्क्यू टीमें यह अनुमान लगा रही थीं कि वह पैर फिसलने से नदी में बह गया होगा। लापता पर्यटक के पिता और परिजनों ने खुद खाती गांव और मलीधार क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद पुलिस को दी गई तहरीर में कुल 17 ऐसे बिंदु रेखांकित किए हैं, जो इस पूरी घटना को गहरी साजिश की ओर मोड़ते हैं।
पिता ने इन बिंदुओं पर जताया शक
- गाइड का यह दावा कि अभिषेक ने उसे आगे जाकर मैगी बनाने को कहा था, पूरी तरह निराधार और खुद को बचाने का प्रयास प्रतीत होता है। एक पेशेवर गाइड का अपने पर्यटक को दो किलोमीटर पहले अकेले छोड़ना भयंकर लापरवाही और संदिग्ध है।
- जिस स्थान से पर्यटक के गिरने का दावा किया जा रहा है, वह करीब 85 डिग्री की खड़ी चट्टान है। परिजनों का कहना है कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद कैमरा बिल्कुल सही हालत में मिला है और उसकी स्क्रीन के कोने पर सिर्फ हल्का सा निशान है, जो नामुमकिन है।
- कैमरे का ढक्कन एक घोड़े वाले को कथित घटनास्थल से 500 मीटर दूर पथरीले ट्रैक पर मिला जबकि कैमरा 80 मीटर नीचे खाई में था। अगर हादसा वहीं हुआ तो ढक्कन इतनी दूर रास्ते पर कैसे पहुंचा।
- कैमरे में दर्ज आखिरी वीडियो दो बजकर 27 मिनट से दो बजकर 29 मिनट के बीच के हैं। इसमें गाइड आगे जाता दिख रहा है और अंतिम वीडियो दो सूखे पेड़ों की है जो प्राकृतिक सौंदर्य की जगह भी नहीं है। परिजनों को अंदेशा है कि प्रशासन को गुमराह करने के लिए ये वीडियो किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड की गई हैं।
-गाइड का कहना है कि उसने अपना भारी बैग मजबूत कद-काठी वाले अभिषेक को दिया था जो कि अभिषेक के पुराने ट्रैकिंग इतिहास को देखते हुए पूरी तरह असामान्य और झूठ प्रतीत होता है।
-बीते चार जून को जब कोई भी सरकारी रेस्क्यू टीम मलीधार की तरफ नहीं गई थी तब गाइड को अकेले उस सुनसान इलाके की तरफ जाते देखा गया जिससे उसका व्यवहार और हावभाव और अधिक संदिग्ध हो जाता है। इसके साथ ही परिजनों ने होमस्टे मालिक की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और पूर्व में क्षेत्र के एक कीड़ा-जड़ी व्यापारी पर हुए हमले से उनके तार जुड़े होने की बात कही है।
लापता पर्यटक अभिषेक चौहान के परिजनों ने संदेह के आधार पर कपकोट थाने में लिखित तहरीर दी है। परिजनों द्वारा जताए गए इस संदेह और आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस बेहद गहनता से मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। पिंडर नदी और ट्रैक रूट पर लापता ट्रैकर की खोज और बचाव का कार्य लगातार जारी है।-अजय लाल साह, सीओ बागेश्वर