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बागेश्वर अस्पताल की चूक: चार करोड़ का वार्ड तैयार, तीसरी मंजिल तक पहुंचने का नहीं बनाया रास्ता

Fri, 24 Jul 2026 12:05 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर Published by: Heera Updated Fri, 24 Jul 2026 12:05 PM IST
सार

बागेश्वर जिला अस्पताल में डेढ़ करोड़ के सिविल कार्य और ढाई करोड़ के उपकरणों से तैयार 32 बेड का नया वार्ड पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है, क्योंकि तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए कोई सीढ़ी या रास्ता नहीं बनाया गया। 

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No access road to the third floor of Bageshwar Hospital
बागेश्वर के जिला अस्पताल में खाली पड़ा करोड़ों की लागत से बना भवन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बागेश्वर जिला अस्पताल में बनाए गए 32 बेड के नए वार्ड काे शुरू करने में देरी की चाैंकाने वाली वजह सामने आई है। डेढ़ करोड़ रुपये के सिविल कार्य और ढाई करोड़ के उपकरणों के साथ यह तैयार हुआ लेकिन तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं बनाया गया। इस कारण अस्पताल में बेड की कमी के बावजूद यह पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है।

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कार्यदायी संस्था हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (एचएसडब्ल्यूसी) नई दिल्ली ने दो वर्ष पहले निर्माण कार्य पूरा कर दिया था। दो महीने पहले लोक निर्माण विभाग की थर्ड पार्टी जांच में भवन को सही पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसका हैंडओवर ले लिया। अस्पताल में पहले से ही बेड की कमी बनी हुई है। फिर भी निर्माण में चूक की वजह से यह वार्ड अब तक मरीजों के लिए शुरू नहीं हो सका है।

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छत से पानी टपकने लगा
मानसून शुरू होते ही निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ गए हैं। तीसरी मंजिल की छत से पानी टपकने लगा है जिसका असर ठीक नीचे संचालित पीडियाट्रिक (शिशु) वार्ड पर पड़ रहा है। वार्ड में कई जगह पानी भरने से भर्ती बच्चों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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न स्टाफ, न उपकरण, सब भगवान भरोसे
यहां लापरवाही केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नए वार्ड के संचालन के लिए आवश्यक चिकित्सकीय स्टाफ, नर्सिंग कर्मियों और उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी अब तक कोई स्पष्ट शासनादेश जारी नहीं हुआ है। सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि 2023 में सभी 13 जिलों में बच्चा वार्ड बनाए गए थे। इनकी निविदा शासन से ही हुई थी। फिलहाल सिर्फ भवन का हैंडओवर मिला है।

सत्यापन पर उठे सवाल
दो महीने पहले लोक निर्माण विभाग से थर्ड पार्टी सत्यापन कराने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्यदायी संस्था से भवन का हैंडओवर लिया। तब लोनिवि ने इसकी ओके रिपोर्ट दी थी। मानसून शुरू होते ही भवन की छत फिर से टपकने लगी है। सवाल उठ रहा है कि किस आधार पर लोनिवि ने इसे दुरुस्त बताया। सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य तिवारी ने कहा कि सत्यापन के समय कंपनी ने निर्माण संबंधी परेशनियों को दूर करने का लिखित आश्वासन दिया था।

संबंधित फर्म को पूर्व में भी इस बारे में पत्र भेजे गए थे। छत से पानी का रिसाव जारी है। मरीजों को ऊपर ले जाने का रास्ता नहीं बनाया है। अब शासन से कार्यदायी संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए संस्तुति की गई है। - डॉ. गिरिजा शंकर जोशी, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल

अस्पताल में नवनिर्मित वार्ड का संचालन अब तक न करने की पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों से जुटाई जाएगी। शासन स्तर पर वार्ता कर जल्द इसे शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। - पार्वती दास, विधायक, बागेश्वर

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