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Bageshwar News: बस स्टेशन पर रोडवेज और केमू के यात्रियों पर डग्गामारों का डाका
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 08 Jan 2026 11:37 PM IST
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बागेश्वर। जिला मुख्यालय स्थित मुख्य बस स्टेशन इन दिनों डग्गामार वाहनों के अवैध कब्जे की गिरफ्त में है। निर्धारित टैक्सी स्टैंड होने के बावजूद निजी वाहन चालक बस स्टेशन के आसपास वाहन खड़े कर सवारियां भर रहे हैं। इसका सीधा असर रोडवेज और केमू की सेवाओं पर पड़ रहा है। विभागीय ढिलाई के चलते डग्गामारों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे बस के इंतजार में खड़े यात्रियों को जबरन अपनी गाड़ियों में बैठा रहे हैं।
नगर के बस स्टेशन से कुमाऊं मंडल की लाइफलाइन मानी जाने वाली केमू और सरकारी रोडवेज बसों का संचालन होता है। अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही कोई बस स्टैंड पर लगती है, डग्गामार वाहनों के चालक यात्रियों को घेर लेते हैं। कम समय में गंतव्य तक पहुंचाने का लालच देकर यात्रियों को ले जाया जा रहा है। इससे बसों को पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पा रही हैं जिससे परिवहन विभाग और केमू को रोजाना हजारों रुपये की चपत लग रही है। बस स्टेशन के आसपास और बाजार क्षेत्र में इन अवैध वाहनों की कतार से दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। टैक्सी स्टैंड दूर होने के कारण चालक मुख्य सड़क पर ही वाहन पार्क कर देते हैं। इससे पैदल चलने वाले राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों ने शिकायत की है कि डग्गामार वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं, जो पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
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नगर के बस स्टेशन से कुमाऊं मंडल की लाइफलाइन मानी जाने वाली केमू और सरकारी रोडवेज बसों का संचालन होता है। अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही कोई बस स्टैंड पर लगती है, डग्गामार वाहनों के चालक यात्रियों को घेर लेते हैं। कम समय में गंतव्य तक पहुंचाने का लालच देकर यात्रियों को ले जाया जा रहा है। इससे बसों को पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पा रही हैं जिससे परिवहन विभाग और केमू को रोजाना हजारों रुपये की चपत लग रही है। बस स्टेशन के आसपास और बाजार क्षेत्र में इन अवैध वाहनों की कतार से दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। टैक्सी स्टैंड दूर होने के कारण चालक मुख्य सड़क पर ही वाहन पार्क कर देते हैं। इससे पैदल चलने वाले राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों ने शिकायत की है कि डग्गामार वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं, जो पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
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