UK: मानसून काल में बंद ही होने हैं स्कूल तो ग्रीष्मकालीन अवकाश जून में क्यों? ये उठी मांग; अभिभावकों को चिंता
मौसम व सुरक्षा कारणों से लगातार पांच दिनों से स्कूल बंद होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है और वे पहाड़ों में स्थानीय भूगोल व मौसम के अनुसार ग्रीष्मकालीन अवकाश की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।
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पांच दिनों से विद्यालयों में अवकाश होने के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मौसम और सुरक्षा संबंधी कारणों से मिल रही छुट्टियों के चलते विद्यार्थियों की शैक्षणिक गतिविधियों का क्रम टूट गया है जिससे अभिभावकों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। लोग पहाड़ों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की व्यवस्था स्थानीय भूगोल और मौसम के अनुकूल करने की मांग उठाने लगे हैं।
अभिभावकों का तर्क है कि मैदानी और तराई क्षेत्रों में जून में भीषण गर्मी पड़ती है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों का तापमान वहां की अपेक्षा कम रहता है। इसके विपरीत जुलाई में पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश का दौर अधिक प्रभावी रहता है। पहाड़ों में जून के बजाय जुलाई में ग्रीष्मकालीन अवकाश करने से न केवल आपदा से बच्चों की सुरक्षा होगी, बल्कि उनकी पढ़ाई का नुकसान भी कम होगा।
लगातार हो रही छुट्टियों का बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। पहाड़ों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश जून की बजाय जुलाई में होने चाहिए।
रविराज नेगी, अभिभावक
जून में अवकाश और अब जुलाई में भी लगभग डेढ़ सप्ताह तक स्कूल बंद रहने से पठन-पाठन प्रभावित हो गया है। पाठ्यक्रम पिछड़ने से बच्चों पर पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। -जगदीश तिवारी, अभिभावक,
बच्चों की सुरक्षा भी सर्वोपरि है, लेकिन शिक्षा को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता है। पहाड़ में नेटवर्क दिक्कत के कारण ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प भी सीमित है। छुट्टियों के नियमों में बदलाव जरूरी है।
-हिमानी जोशी, अभिभावक
खराब मौसम और लगातार छुट्टियों के कारण विद्यार्थियों के पठन-पाठन को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए विभाग पूरी तरह गंभीर है। पाठ्यक्रम प्रभावित न हो इसके लिए विद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था की जा रही है। -विनय कुमार, सीईओ, बागेश्वर