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Bageshwar News: महिला समूह की मेहनत को चौखुटिया और चमोली तक मिल रहा सम्मान
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 06 Jan 2026 11:33 PM IST
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गरुड़ (बागेश्वर)। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं को अर्थव्यवस्था की धुरी कहा जाता है। महिलाएं चूल्हा-चौकी के साथ-साथ खेतीबाड़ी और पशुपालन के काम में अहम भूमिका निभाती हैं। वर्तमान समय में समूहों के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार कर परिवार का खर्च चलाने में भी योगदान दे रही हैं।
तहसील क्षेत्र के सिरानी, सुराग गांव के तुलेरा सब्जी उत्पादक समूह की महिलाओं ने अपनी मेहनत से जिले के बाहर भी नाम कमाया है। 2016 में छह महिलाओं ने समूह का गठन किया था। वर्तमान में इनकी उत्पादित सब्जी अल्मोड़ा और चमोली जिलों तक जाती हैं। हर साल समूह पांच क्विंटल से अधिक गडेरी चौखुटिया जिले में भेजता है। खरीदार खुल गांव आकर गडेरी खरीदकर ले जाते हैं। समूह की अध्यक्ष नीमा देवी ने बताया कि इस साल 45 रुपये प्रति किलो की दर से गडेरी की बिक्री की गई है। हर सीजन में महिलाओं को पांच लाख रुपये से अधिक की आय होती है। महिला समूह मटर, प्याज, लहसुन, आलू का भी उत्पादन करता है। महिलाएं गरुड़ और स्थानीय बाजार में सब्जी की बिक्री करती हैं। हर साल गांव में एक टन से अधिक गडेरी उत्पादित होती है। समूह की उगाई प्याज की पौध चमोली के सीमांत गांवों तक बेची जाती है। समूह की सदस्य कमला देवी, मधुली देवी, पारुली देवी, मालती देवी, गंगा देवी आदि ने बताया कि जंगली सुअर और बंदर नुकसान नहीं पहुंचाते तो आमदनी और अच्छी हो सकती थी।
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तहसील क्षेत्र के सिरानी, सुराग गांव के तुलेरा सब्जी उत्पादक समूह की महिलाओं ने अपनी मेहनत से जिले के बाहर भी नाम कमाया है। 2016 में छह महिलाओं ने समूह का गठन किया था। वर्तमान में इनकी उत्पादित सब्जी अल्मोड़ा और चमोली जिलों तक जाती हैं। हर साल समूह पांच क्विंटल से अधिक गडेरी चौखुटिया जिले में भेजता है। खरीदार खुल गांव आकर गडेरी खरीदकर ले जाते हैं। समूह की अध्यक्ष नीमा देवी ने बताया कि इस साल 45 रुपये प्रति किलो की दर से गडेरी की बिक्री की गई है। हर सीजन में महिलाओं को पांच लाख रुपये से अधिक की आय होती है। महिला समूह मटर, प्याज, लहसुन, आलू का भी उत्पादन करता है। महिलाएं गरुड़ और स्थानीय बाजार में सब्जी की बिक्री करती हैं। हर साल गांव में एक टन से अधिक गडेरी उत्पादित होती है। समूह की उगाई प्याज की पौध चमोली के सीमांत गांवों तक बेची जाती है। समूह की सदस्य कमला देवी, मधुली देवी, पारुली देवी, मालती देवी, गंगा देवी आदि ने बताया कि जंगली सुअर और बंदर नुकसान नहीं पहुंचाते तो आमदनी और अच्छी हो सकती थी।
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