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Champawat News: सैटेलाइट सिस्टम से जुड़ेगा सीमांत तल्लादेश और पूर्णागिरि
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sun, 08 Mar 2026 11:06 PM IST
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चंपावत। सीमांत जिले के दुर्गम और लंबे समय से संचार सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों को जल्द ही मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी मिलने जा रही है। सैटेलाइट आधारित डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिस्पांस नेटवर्क (डीडीआरएन) प्रणाली के माध्यम से तल्लादेश और पूर्णागिरि धाम समेत कई दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा। इससे हजारों ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस योजना के तहत लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में संचार नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस सिस्टम की स्थापना का जिम्मा केंद्र सरकार की एजेंसी सेंट्रल इलेक्टाॅनिक्स लिमिटेड (सीइएल) को दिया गया है।
परियोजना के अंतर्गत कुल 18 टावर लगाए जाएंगे। इनमें पांच बड़े और 13 छोटे टावर शामिल हैं। मानसून के दौरान आने वाली चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने इसे बरसात से पहले स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है ताकि आपदा की स्थिति में भी संपर्क व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
सैटेलाइट सिस्टम से जुड़ने के बाद स्कूलों, पंचायत घरों, बैंकों और उप-तहसील कार्यालयों में होने वाले ऑनलाइन कार्यों को गति मिलेगी। ग्रामीणों को मनरेगा हाजिरी, बैंकिंग लेन-देन और अन्य डिजिटल सेवाओं के लिए दूरदराज नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में सूचना का आदान-प्रदान भी तेजी से हो सकेगा।
इन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ
तल्लादेश क्षेत्र के मंच, दुबड़जैनल, तामली, बकोड़ा, सौराई, भनार, नीड़, लेटी, डांडा ककनई, बुडम, कठौल, खिरद्वारी और पूर्णागिरि जैसे इलाकों में लंबे समय से नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। डीडीआरएन सिस्टम स्थापित होने के बाद यहां इंटरनेट और मोबाइल संचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
कोट
मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस परियोजना को प्राथमिकता दी गई है। सीमांत क्षेत्रों के लोगों की मांग को देखते हुए इसकी स्वीकृति प्रदान की गई है। बरसात से पहले सिस्टम स्थापित करने की योजना है ताकि आपदा के समय भी संपर्क बना रहे। -मनीष कुमार, जिलाधिकारी, चंपावत
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इस योजना के तहत लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में संचार नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस सिस्टम की स्थापना का जिम्मा केंद्र सरकार की एजेंसी सेंट्रल इलेक्टाॅनिक्स लिमिटेड (सीइएल) को दिया गया है।
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परियोजना के अंतर्गत कुल 18 टावर लगाए जाएंगे। इनमें पांच बड़े और 13 छोटे टावर शामिल हैं। मानसून के दौरान आने वाली चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने इसे बरसात से पहले स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है ताकि आपदा की स्थिति में भी संपर्क व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
सैटेलाइट सिस्टम से जुड़ने के बाद स्कूलों, पंचायत घरों, बैंकों और उप-तहसील कार्यालयों में होने वाले ऑनलाइन कार्यों को गति मिलेगी। ग्रामीणों को मनरेगा हाजिरी, बैंकिंग लेन-देन और अन्य डिजिटल सेवाओं के लिए दूरदराज नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में सूचना का आदान-प्रदान भी तेजी से हो सकेगा।
इन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ
तल्लादेश क्षेत्र के मंच, दुबड़जैनल, तामली, बकोड़ा, सौराई, भनार, नीड़, लेटी, डांडा ककनई, बुडम, कठौल, खिरद्वारी और पूर्णागिरि जैसे इलाकों में लंबे समय से नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। डीडीआरएन सिस्टम स्थापित होने के बाद यहां इंटरनेट और मोबाइल संचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
कोट
मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस परियोजना को प्राथमिकता दी गई है। सीमांत क्षेत्रों के लोगों की मांग को देखते हुए इसकी स्वीकृति प्रदान की गई है। बरसात से पहले सिस्टम स्थापित करने की योजना है ताकि आपदा के समय भी संपर्क बना रहे। -मनीष कुमार, जिलाधिकारी, चंपावत