{"_id":"6969236a6eb0f765b10d6320","slug":"negligence-in-winter-is-harmful-for-pregnant-women-champawat-news-c-229-1-cpt1009-134246-2026-01-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Champawat News: सर्दियों में लापरवाही गर्भवतियों के लिए नुकसानदायक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Champawat News: सर्दियों में लापरवाही गर्भवतियों के लिए नुकसानदायक
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Thu, 15 Jan 2026 10:57 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
चंपावत। ठंड के मौसम में गर्भवतियों को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। सर्दियों में थोड़ी सी लापरवाही मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ठंड में कम पानी पीना यूरिन संक्रमण का कारण बन सकता है। सर्दियों में प्यास कम लगती है लेकिन इसके बावजूद प्रतिदिन ढाई से तीन लीटर पानी पीना जरूरी है।
जिला चिकित्सालय चंपावत के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक ने बताया कि गर्भावस्था में हाई प्रोटीन और हाई कैलोरी की आवश्यकता बढ़ जाती है। केवल घरेलू भोजन पर्याप्त नहीं होता है। ऐसे चिकित्सक की सलाह से सप्लीमेंट लिया जा सकता है। त्वचा में रूखापन और पेट पर स्ट्रेच मार्क्स की समस्या के लिए नारियल तेल या बॉडी नरिशिंग क्रीम का नियमित उपयोग लाभकारी होता है।
डॉ. मिनिका गिरी कहती है कि गर्भवतियों को प्रतिदिन नौ से 10 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। गर्भावस्था के 28 से 30 सप्ताह के बाद सीधे पीठ के बल न लेटें बल्कि बायीं करवट सोना अधिक सुरक्षित होता है। इससे शिशु तक रक्त प्रवाह बेहतर रहता है।
शिशु के 10 से 12 मूवमेंट सामान्य
चिकित्सकों ने बताया कि शिशु की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है। 24 घंटे में 10 से 12 बार शिशु की मूवमेंट सामान्य मानी जाती है। यदि इससे कम मूवमेंट महसूस हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। डॉ. मिनिका ने बताया कि किसी भी प्रकार का टीकाकरण लंबित न रखें। ठंडे या अत्यधिक गर्म पानी से स्नान न करें और तापमान संतुलित रखें। यदि शरीर का तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट से अधिक हो जाए तो चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने कहा कि यदि लगातार बुखार, खांसी, जोड़ों में दर्द या यूरिन संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी नजदीकी अस्पताल जाएं।
Trending Videos
जिला चिकित्सालय चंपावत के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक ने बताया कि गर्भावस्था में हाई प्रोटीन और हाई कैलोरी की आवश्यकता बढ़ जाती है। केवल घरेलू भोजन पर्याप्त नहीं होता है। ऐसे चिकित्सक की सलाह से सप्लीमेंट लिया जा सकता है। त्वचा में रूखापन और पेट पर स्ट्रेच मार्क्स की समस्या के लिए नारियल तेल या बॉडी नरिशिंग क्रीम का नियमित उपयोग लाभकारी होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. मिनिका गिरी कहती है कि गर्भवतियों को प्रतिदिन नौ से 10 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। गर्भावस्था के 28 से 30 सप्ताह के बाद सीधे पीठ के बल न लेटें बल्कि बायीं करवट सोना अधिक सुरक्षित होता है। इससे शिशु तक रक्त प्रवाह बेहतर रहता है।
शिशु के 10 से 12 मूवमेंट सामान्य
चिकित्सकों ने बताया कि शिशु की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है। 24 घंटे में 10 से 12 बार शिशु की मूवमेंट सामान्य मानी जाती है। यदि इससे कम मूवमेंट महसूस हो तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। डॉ. मिनिका ने बताया कि किसी भी प्रकार का टीकाकरण लंबित न रखें। ठंडे या अत्यधिक गर्म पानी से स्नान न करें और तापमान संतुलित रखें। यदि शरीर का तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट से अधिक हो जाए तो चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने कहा कि यदि लगातार बुखार, खांसी, जोड़ों में दर्द या यूरिन संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी नजदीकी अस्पताल जाएं।

कमेंट
कमेंट X