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पहल: फल-सब्जियों के बीज को न समझें बेकार, इनसे करें पौधे तैयार
Wed, 29 Jul 2026 05:33 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Wed, 29 Jul 2026 05:33 PM IST
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- बीज संजीवनी अभियान से पर्यावरण संरक्षण की शुरू हुई कवायद
- सीडीओ ने विभाग से 500-500 पौधे तैयार करने से की शुरुआत
बसंत कुमार
हरिद्वार। अब फल और सब्जियों के बीज कूड़ेदान नहीं, बल्कि हरियाली बढ़ाने का जरिया बनेंगे। सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल पर उद्यान विभाग ने डोंट थ्रो, बट ग्रो स्लोगन के साथ बीज संजीवनी अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत घरों में बेकार समझकर फेंके जाने वाले बीजों से पौधे तैयार किए जाएंगे। इसकी शुरुआत शासकीय विभागों को 500-500 पौधे तैयार करने का लक्ष्य देकर की गई है।
अभियान का उद्देश्य घरों से निकलने वाले फल और सब्जियों के बीजों का दोबारा उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। बेकार पड़ी पॉलीथीन, प्लास्टिक की बोतलों और मिट्टी की मदद से आसानी से पौधे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें घरों के आंगन, खाली जमीन और सार्वजनिक स्थलों पर लगाया जाएगा। अभियान में शासकीय विभागों, कार्यालयों, विद्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, नगर निकायों और सहायता प्राप्त संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्य उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह ने बताया कि अभियान के तहत तैयार पौधों का रोपण पर्यावरण दिवस, हरेला पर्व और अन्य अवसरों पर किया जाएगा।
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वन विभाग भी पौधारोपण में सहयोग
- मुख्य विकास अधिकारी डाॅ. मिश्र के बीज संजीवनी अभियान के सहयोग के लिए वन विभाग भी आगे आया है। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध का कहना है कि पौधे तैयार करने के बाद अगर उन्हें रोपने में किसी के जगह और कोई दिक्कत हो तो वह नजदीकी वन चौकी पर और टोल फ्री नंबर - 1926- पर कॉल कर सकते हैं। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ओर से तैयार पौधों को उठाकर नर्सरी में रख लिया जाएगा, जहां, उन्हें पौधारोपण के लिए जंगल और लोगों को आवंटित कर दिया जाएगा।
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लोग फलों का सेवन करने के बाद बीजों को अपशिष्ट मानकर फेंक देते हैं लेकिन यदि इन बीजों को सही तरीके से संरक्षित कर पौधे तैयार किए जाएं तो पर्यावरण और जैव विविधता को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसलिए, बीज संजीवनी अभियान शुरू किया गया है। बिना किसी खर्च के पौधे तैयार करने की यह मुहिम कामयाब हुई तो हर तरफ हरियाली होगी। प्रत्येक परिवार दस-दस पौधे बीज से तैयार करे तो लाखों की संख्या में पौधारोपण किया जा सकेगा।
डाॅ. ललित नारायण मिश्र, सीडीओ, हरिद्वार
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- सीडीओ ने विभाग से 500-500 पौधे तैयार करने से की शुरुआत
बसंत कुमार
हरिद्वार। अब फल और सब्जियों के बीज कूड़ेदान नहीं, बल्कि हरियाली बढ़ाने का जरिया बनेंगे। सीडीओ डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल पर उद्यान विभाग ने डोंट थ्रो, बट ग्रो स्लोगन के साथ बीज संजीवनी अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत घरों में बेकार समझकर फेंके जाने वाले बीजों से पौधे तैयार किए जाएंगे। इसकी शुरुआत शासकीय विभागों को 500-500 पौधे तैयार करने का लक्ष्य देकर की गई है।
अभियान का उद्देश्य घरों से निकलने वाले फल और सब्जियों के बीजों का दोबारा उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। बेकार पड़ी पॉलीथीन, प्लास्टिक की बोतलों और मिट्टी की मदद से आसानी से पौधे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें घरों के आंगन, खाली जमीन और सार्वजनिक स्थलों पर लगाया जाएगा। अभियान में शासकीय विभागों, कार्यालयों, विद्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों, नगर निकायों और सहायता प्राप्त संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। मुख्य उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह ने बताया कि अभियान के तहत तैयार पौधों का रोपण पर्यावरण दिवस, हरेला पर्व और अन्य अवसरों पर किया जाएगा।
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वन विभाग भी पौधारोपण में सहयोग
- मुख्य विकास अधिकारी डाॅ. मिश्र के बीज संजीवनी अभियान के सहयोग के लिए वन विभाग भी आगे आया है। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध का कहना है कि पौधे तैयार करने के बाद अगर उन्हें रोपने में किसी के जगह और कोई दिक्कत हो तो वह नजदीकी वन चौकी पर और टोल फ्री नंबर - 1926- पर कॉल कर सकते हैं। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ओर से तैयार पौधों को उठाकर नर्सरी में रख लिया जाएगा, जहां, उन्हें पौधारोपण के लिए जंगल और लोगों को आवंटित कर दिया जाएगा।
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लोग फलों का सेवन करने के बाद बीजों को अपशिष्ट मानकर फेंक देते हैं लेकिन यदि इन बीजों को सही तरीके से संरक्षित कर पौधे तैयार किए जाएं तो पर्यावरण और जैव विविधता को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसलिए, बीज संजीवनी अभियान शुरू किया गया है। बिना किसी खर्च के पौधे तैयार करने की यह मुहिम कामयाब हुई तो हर तरफ हरियाली होगी। प्रत्येक परिवार दस-दस पौधे बीज से तैयार करे तो लाखों की संख्या में पौधारोपण किया जा सकेगा।
डाॅ. ललित नारायण मिश्र, सीडीओ, हरिद्वार