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Haridwar News: कॉलम- कितना बदल गया मेरा गांव...
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Sun, 26 Apr 2026 06:06 PM IST
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फैक्ट्रियाें और मार्केट ने बदली धनपुरा की सूरत
- गांव ले चुका कस्बे का रूप, मिल रहा हर सामान
अजब सिंह
पथरी। क्षेत्र के धनपुरा में फैक्ट्रियों और मार्केट स्थापित होने से गांव की सूरत पूरी तरह बदल गई है और अब यह कस्बे का रूप ले चुका है। यहां ग्रामीणों को लगभग सभी जरूरी सामान उपलब्ध हो रहा है, वहीं सैकड़ों किराएदार फैक्ट्रियों में काम करने के लिए गांव में रह रहे हैं। गांव में हर बुधवार को बड़ा साप्ताहिक बाजार लगता है, जिसमें दूर-दराज के दुकानदार और आसपास के गांवों के लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। पिछले दस वर्षों में धनपुरा का मुख्य बाजार छोटे कस्बे जैसा विकसित हो गया है। जहां पहले दवा, कपड़े और निर्माण सामग्री के लिए ग्रामीणों को शहर जाना पड़ता था, वहीं अब गांव में मेडिकल स्टोर, निजी क्लीनिक, स्कूटी और मोटरसाइकिल एजेंसी, गैस एजेंसी और बैंक शाखा तक खुल चुकी है। परचून की दुकानों में भी बदलाव आया है—अब काउंटर, एलईडी लाइट और इलेक्ट्रॉनिक तराजू के साथ दुकानें शहर जैसी दिखती हैं और डिजिटल भुगतान ने व्यापार को नई दिशा दी है। निर्माण सामग्री के क्षेत्र में भी गांव आत्मनिर्भर बन रहा है, जहां सीमेंट, सरिया और टाइल्स की दुकानें खुल गई हैं। साधारण नाई की दुकानों की जगह आधुनिक सैलून ने ले ली है, जो युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। इसके साथ ही आसपास नई कॉलोनियों का तेजी से निर्माण, बेहतर सड़क, शिक्षा, इंटरनेट और बढ़ती आय ने गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर दिया है।
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गांव में दस साल पहले कच्चे रास्ते थे व रास्तों में जलभराव की समस्या रहती थी। बरसात के दिनों में लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती थी, लेकिन, गांव का विकास होने पक्की सड़के बनने से जलभराव की समस्या से छुटकारा मिल गया है।
बाबूराम
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पहले हर कार्य के लिए हरिद्वार और सुल्तानपुर जाना पड़ता है, लेकिन, अब सभी सामान और काम गांव में ही हो रहे हैं। ग्रामीणों को दूसरे कस्बों में नहीं जाना पड़ रहा है।
शकील अहमद अंसारी
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धनपुरा के आसपास जिस तरह से कालोनियां बन रही है और उनमें लोग बस रहें हैं। गांव में बैंक की शाखा व गैस एजेंसी स्थापित होने के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो गई है।
अमित वर्मा
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उत्तराखंड बनने के बाद गांव में बहुत परिवर्तन हुआ है। गांव के लोगों को विकास हुआ है। गांव में सरकारी योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों को मिल रहा है। गांव की आबादी बढ़ने से अब यह कस्बा बनता जा रहा है।
तंजीम अली, उप प्रधान, धनपुरा
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अजब सिंह
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- गांव ले चुका कस्बे का रूप, मिल रहा हर सामान
अजब सिंह
पथरी। क्षेत्र के धनपुरा में फैक्ट्रियों और मार्केट स्थापित होने से गांव की सूरत पूरी तरह बदल गई है और अब यह कस्बे का रूप ले चुका है। यहां ग्रामीणों को लगभग सभी जरूरी सामान उपलब्ध हो रहा है, वहीं सैकड़ों किराएदार फैक्ट्रियों में काम करने के लिए गांव में रह रहे हैं। गांव में हर बुधवार को बड़ा साप्ताहिक बाजार लगता है, जिसमें दूर-दराज के दुकानदार और आसपास के गांवों के लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। पिछले दस वर्षों में धनपुरा का मुख्य बाजार छोटे कस्बे जैसा विकसित हो गया है। जहां पहले दवा, कपड़े और निर्माण सामग्री के लिए ग्रामीणों को शहर जाना पड़ता था, वहीं अब गांव में मेडिकल स्टोर, निजी क्लीनिक, स्कूटी और मोटरसाइकिल एजेंसी, गैस एजेंसी और बैंक शाखा तक खुल चुकी है। परचून की दुकानों में भी बदलाव आया है—अब काउंटर, एलईडी लाइट और इलेक्ट्रॉनिक तराजू के साथ दुकानें शहर जैसी दिखती हैं और डिजिटल भुगतान ने व्यापार को नई दिशा दी है। निर्माण सामग्री के क्षेत्र में भी गांव आत्मनिर्भर बन रहा है, जहां सीमेंट, सरिया और टाइल्स की दुकानें खुल गई हैं। साधारण नाई की दुकानों की जगह आधुनिक सैलून ने ले ली है, जो युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। इसके साथ ही आसपास नई कॉलोनियों का तेजी से निर्माण, बेहतर सड़क, शिक्षा, इंटरनेट और बढ़ती आय ने गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर दिया है।
गांव में दस साल पहले कच्चे रास्ते थे व रास्तों में जलभराव की समस्या रहती थी। बरसात के दिनों में लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती थी, लेकिन, गांव का विकास होने पक्की सड़के बनने से जलभराव की समस्या से छुटकारा मिल गया है।
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बाबूराम
पहले हर कार्य के लिए हरिद्वार और सुल्तानपुर जाना पड़ता है, लेकिन, अब सभी सामान और काम गांव में ही हो रहे हैं। ग्रामीणों को दूसरे कस्बों में नहीं जाना पड़ रहा है।
शकील अहमद अंसारी
धनपुरा के आसपास जिस तरह से कालोनियां बन रही है और उनमें लोग बस रहें हैं। गांव में बैंक की शाखा व गैस एजेंसी स्थापित होने के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो गई है।
अमित वर्मा
उत्तराखंड बनने के बाद गांव में बहुत परिवर्तन हुआ है। गांव के लोगों को विकास हुआ है। गांव में सरकारी योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों को मिल रहा है। गांव की आबादी बढ़ने से अब यह कस्बा बनता जा रहा है।
तंजीम अली, उप प्रधान, धनपुरा
अजब सिंह

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