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Haridwar News: जसपुर चमरिया में धूमधाम से मनाया फुलदेई का पूर्व
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Sun, 15 Mar 2026 07:30 PM IST
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- कुमाऊनी सामाजिक सांस्कृतिक मैत्री समिति ने किया आयोजन
लालढांग। जसपुर चमरिया में कुमाऊनी सामाजिक सांस्कृतिक मैत्री समिति ने रविवार को फुल संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया। फुलदेई का त्योहार बसंत ऋतु के चैत्र मास कि पहले गते (तिथि) को मनाया जाता है।
कुमाऊनी सामाजिक सांस्कृतिक मैत्री समिति के लालढांग संयोजक आरएस मनराल ने बताया कि गांव के बच्चे सुबह फुलों को एकत्र करते हैं उसके बाद सर्व प्रथम गांव के मंदिर प्राचीन सिद्ध बाबा मंदिर में फुल चढ़ाते हैं। इसके बाद बच्चे भुमिया मन्दिर में फुल चढ़ाते हैं। फिर टोलियों के रूप में गांव में प्रत्येक घरों में जाकर देहली पर फूल डालते हैं। महिलाएं बच्चों को दक्षिणा गुड़ चावल पकवान देकर विदा करतीं हैं। बच्चे गाना गाते हैं कि फुल देई छम्मा देई जितुका देला उतुका सही। बच्चों के फुल खेलने से बच्चों को अपनी कुमाऊनी सांस्कृतिक सभ्यता का ज्ञान होता है यह त्योहार प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह त्योहार बसंत ऋतु के शुभ आगमन का सन्देश लेकर आता है। वृक्षों का इस समय प्रकृति श्रृंगार करती है। पेड़ पौधे फुलों से भरें रहते हैं। वृक्ष प्राकृतिक रूप से पुराने पत्तों को गिरा कर नए पत्तों से वृक्ष हरा भरा हो जाता है। इस दौरान योगेश मनराल, दीपक, रोहन, रिशु, लाली, शौर्य, कार्तिक, आदि, गोपी, पारस, शिवा, सिमरन, मानवी, गौरी आदि मौजूद रहे।
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लालढांग। जसपुर चमरिया में कुमाऊनी सामाजिक सांस्कृतिक मैत्री समिति ने रविवार को फुल संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया। फुलदेई का त्योहार बसंत ऋतु के चैत्र मास कि पहले गते (तिथि) को मनाया जाता है।
कुमाऊनी सामाजिक सांस्कृतिक मैत्री समिति के लालढांग संयोजक आरएस मनराल ने बताया कि गांव के बच्चे सुबह फुलों को एकत्र करते हैं उसके बाद सर्व प्रथम गांव के मंदिर प्राचीन सिद्ध बाबा मंदिर में फुल चढ़ाते हैं। इसके बाद बच्चे भुमिया मन्दिर में फुल चढ़ाते हैं। फिर टोलियों के रूप में गांव में प्रत्येक घरों में जाकर देहली पर फूल डालते हैं। महिलाएं बच्चों को दक्षिणा गुड़ चावल पकवान देकर विदा करतीं हैं। बच्चे गाना गाते हैं कि फुल देई छम्मा देई जितुका देला उतुका सही। बच्चों के फुल खेलने से बच्चों को अपनी कुमाऊनी सांस्कृतिक सभ्यता का ज्ञान होता है यह त्योहार प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।
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उन्होंने कहा कि यह त्योहार बसंत ऋतु के शुभ आगमन का सन्देश लेकर आता है। वृक्षों का इस समय प्रकृति श्रृंगार करती है। पेड़ पौधे फुलों से भरें रहते हैं। वृक्ष प्राकृतिक रूप से पुराने पत्तों को गिरा कर नए पत्तों से वृक्ष हरा भरा हो जाता है। इस दौरान योगेश मनराल, दीपक, रोहन, रिशु, लाली, शौर्य, कार्तिक, आदि, गोपी, पारस, शिवा, सिमरन, मानवी, गौरी आदि मौजूद रहे।