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Haridwar News: सदस्य सचिव ने किया सिडकुल सीईटीपी का निरीक्षण मानकों का पालन करने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Thu, 23 Apr 2026 05:36 PM IST
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- निर्धारित मानकों के उल्लंघन पर कार्रवाई की दी चेतावनी
- केमिकलयुक्त गंदे जल को उपचारित कर सिंचाई के लिए भेजा जाता है पानी
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने सिडकुल क्षेत्र में स्थापित सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) का निरीक्षण किया। इसका मुख्य कार्य औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का शुद्धिकरण करना है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संयंत्र संचालक को सभी निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सदस्य सचिव ने सीईटीपी की विभिन्न इकाइयों का गहनता से जायजा लिया। डॉक्टर पराग मधुकर धकाते ने स्पष्ट किया कि यदि सीईटीपी का संचालन प्रदूषण नियंत्रण मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो बोर्ड सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने संचालक को चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र सिंह कठैत ने बताया कि बोर्ड का लक्ष्य औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित कर पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह निरीक्षण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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सीईटीपी का महत्व
सीईटीपी यानी कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, औद्योगिक क्षेत्रों में कई इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को एक साथ उपचारित करने के लिए स्थापित किए जाते हैं। यह संयंत्र पर्यावरण को औद्योगिक प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से उपचारित जल को सुरक्षित रूप से सिंचाई आदि कार्यों के उपयोग में लाया जाता है। मानकों का पालन न होने पर जल स्रोतों और मिट्टी में प्रदूषण फैलने का खतरा रहता है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समय-समय पर करता है निगरानी
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड औद्योगिक इकाइयों में लगे संयंत्र की समय-समय पर निगरानी करता है। बोर्ड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी औद्योगिक इकाइयां पर्यावरण नियमों का पालन करें। सदस्य सचिव के इस निरीक्षण से यह संदेश गया है कि बोर्ड प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ कठोर कदम उठाने में संकोच नहीं करेगा।
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सीईटीपी का महत्व
सीईटीपी यानी कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, औद्योगिक क्षेत्रों में कई इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को एक साथ उपचारित करने के लिए स्थापित किए जाते हैं। यह संयंत्र पर्यावरण को औद्योगिक प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से उपचारित जल को सुरक्षित रूप से सिंचाई आदि कार्यों के उपयोग में लाया जाता है। मानकों का पालन न होने पर जल स्रोतों और मिट्टी में प्रदूषण फैलने का खतरा रहता है।
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उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड औद्योगिक इकाइयों में लगे संयंत्र की समय-समय पर निगरानी करता है। बोर्ड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी औद्योगिक इकाइयां पर्यावरण नियमों का पालन करें। सदस्य सचिव के इस निरीक्षण से यह संदेश गया है कि बोर्ड प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ कठोर कदम उठाने में संकोच नहीं करेगा।

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