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मैंणाई पूजन : देवी स्वरूप बेटी की अनूठी परंपरा आज भी कायम
Tue, 30 Jun 2026 04:41 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 30 Jun 2026 04:41 PM IST
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दो ब्लॉकों की तीन पट्टियों की आस्था का प्रतीक है मैंणाई पूजन
नयार नदी में आज होगा पारंपरिक अनुष्ठान, पूजन के बाद अच्छी बारिश होने की है मान्यता
कोटद्वार। एकेश्वर और पाबौ ब्लॉक की मवालस्यूं, घुड़दौड़स्यूं और खातस्यूं पट्टियों के ग्रामीणों की सदियों पुरानी आस्था का प्रतीक मैंणाई पूजन बुधवार को नयार नदी में विधि-विधान से होगा। इस अनूठी परंपरा में तीनों पट्टियों के ग्रामीण एकत्र होकर देवी स्वरूप मानी जाने वाली बेटी का पूजन करते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि अनुष्ठान के बाद क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है जिससे फसलों की अच्छी पैदावार होती है।
जन श्रुतियों के अनुसार, 19वीं सदी में घुड़दौड़स्यूं पट्टी के पांग गांव की एक बेटी का विवाह खातस्यूं पट्टी के चुरकंडी गांव में हुआ था। मायके से ससुराल जाते समय नयार नदी पार करते हुए वह तेज बहाव में बह गई। बाद में उसने एक ग्रामीण के स्वप्न में आकर अपनी मृत्यु की जानकारी दी और आत्मा की शांति के लिए प्रतिवर्ष नयार नदी में पूजन करने का आग्रह किया। तभी से पांग (मायका), चुरकंडी (ससुराल) और मवालस्यूं पट्टी के मासौं-मसेटा (मामाकोट) गांवों के ग्रामीण संयुक्त रूप से इस परंपरा का निर्वहन करते हैं।
शिक्षाविद् रामचंद्र नौटियाल बताते हैं कि ढोल-दमाऊं की थाप के बीच देवी स्वरूप बेटी का विधिवत पूजन किया जाता है। इस दौरान मायके पक्ष की ओर से दूंण (अनाज) और कलेऊ की कंडी भेंट की जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि यह पूजा क्षेत्र में सुख-शांति-समृद्धि और अच्छी वर्षा का संदेश लेकर आती है।
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इतिहासकार एवं पुरातत्वविद पद्मश्री डॉ. यशवंत सिंह कठोच के अनुसार वर्ष 1916 में एक अंग्रेज अधिकारी इस परंपरा को देखने नयार नदी पहुंचे थे। पूजन के बाद बारिश होने की मान्यता पर उन्हें विश्वास नहीं था लेकिन अनुष्ठान के दौरान तेज धूप के बीच अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बताया जाता है कि उस वर्ष बारिश इतनी अधिक हुई कि पौड़ी-श्रीनगर मार्ग पर खंडाह क्षेत्र की पुलिया तक क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद अंग्रेज अधिकारी भी इस परंपरा से प्रभावित हुए।
परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी चुरकंडी गांव की ओर से पांग और मासौं-मसेटा ग्रामसभाओं को विधिवत निमंत्रण भेजा गया है। मंगलवार को मायके और मामाकोट पक्ष के ग्रामीण कलेऊ और दूंण लेकर नयार नदी पहुंचेंगे। पूजन में पांग, चुरकंडी, मासौं-मसेटा, मंजखोली, कंडेरी, गड़मोनू, बुडोली, ढुकंडी, सासौं, मरखोला, थापली, नौगांव, डुंक, कुंड, तिमली, भवाई, पुसोली, पबोली और चिमनाउ सहित अनेक गांवों के श्रद्धालु शामिल होंगे।
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नयार नदी में आज होगा पारंपरिक अनुष्ठान, पूजन के बाद अच्छी बारिश होने की है मान्यता
कोटद्वार। एकेश्वर और पाबौ ब्लॉक की मवालस्यूं, घुड़दौड़स्यूं और खातस्यूं पट्टियों के ग्रामीणों की सदियों पुरानी आस्था का प्रतीक मैंणाई पूजन बुधवार को नयार नदी में विधि-विधान से होगा। इस अनूठी परंपरा में तीनों पट्टियों के ग्रामीण एकत्र होकर देवी स्वरूप मानी जाने वाली बेटी का पूजन करते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि अनुष्ठान के बाद क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है जिससे फसलों की अच्छी पैदावार होती है।
जन श्रुतियों के अनुसार, 19वीं सदी में घुड़दौड़स्यूं पट्टी के पांग गांव की एक बेटी का विवाह खातस्यूं पट्टी के चुरकंडी गांव में हुआ था। मायके से ससुराल जाते समय नयार नदी पार करते हुए वह तेज बहाव में बह गई। बाद में उसने एक ग्रामीण के स्वप्न में आकर अपनी मृत्यु की जानकारी दी और आत्मा की शांति के लिए प्रतिवर्ष नयार नदी में पूजन करने का आग्रह किया। तभी से पांग (मायका), चुरकंडी (ससुराल) और मवालस्यूं पट्टी के मासौं-मसेटा (मामाकोट) गांवों के ग्रामीण संयुक्त रूप से इस परंपरा का निर्वहन करते हैं।
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शिक्षाविद् रामचंद्र नौटियाल बताते हैं कि ढोल-दमाऊं की थाप के बीच देवी स्वरूप बेटी का विधिवत पूजन किया जाता है। इस दौरान मायके पक्ष की ओर से दूंण (अनाज) और कलेऊ की कंडी भेंट की जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि यह पूजा क्षेत्र में सुख-शांति-समृद्धि और अच्छी वर्षा का संदेश लेकर आती है।
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इतिहासकार एवं पुरातत्वविद पद्मश्री डॉ. यशवंत सिंह कठोच के अनुसार वर्ष 1916 में एक अंग्रेज अधिकारी इस परंपरा को देखने नयार नदी पहुंचे थे। पूजन के बाद बारिश होने की मान्यता पर उन्हें विश्वास नहीं था लेकिन अनुष्ठान के दौरान तेज धूप के बीच अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बताया जाता है कि उस वर्ष बारिश इतनी अधिक हुई कि पौड़ी-श्रीनगर मार्ग पर खंडाह क्षेत्र की पुलिया तक क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद अंग्रेज अधिकारी भी इस परंपरा से प्रभावित हुए।
परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी चुरकंडी गांव की ओर से पांग और मासौं-मसेटा ग्रामसभाओं को विधिवत निमंत्रण भेजा गया है। मंगलवार को मायके और मामाकोट पक्ष के ग्रामीण कलेऊ और दूंण लेकर नयार नदी पहुंचेंगे। पूजन में पांग, चुरकंडी, मासौं-मसेटा, मंजखोली, कंडेरी, गड़मोनू, बुडोली, ढुकंडी, सासौं, मरखोला, थापली, नौगांव, डुंक, कुंड, तिमली, भवाई, पुसोली, पबोली और चिमनाउ सहित अनेक गांवों के श्रद्धालु शामिल होंगे।