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Kotdwar News: जमूण गांव के ग्रामीणों ने की पुश्तैनी मार्ग खोलने की मांग
Sun, 02 Aug 2026 06:21 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sun, 02 Aug 2026 06:21 PM IST
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मांग के संबंध में मुख्यमंत्री को भेजा भेजा
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। नैनीडांडा ब्लॉक के जमूण गांव के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पुश्तैनी मार्ग खोलने की मांग के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। उन्होंने दुर्गादेवी गेट से जमूण तिराहा तक के पारंपरिक बैलगाड़ी मार्ग को वर्षभर खोलने की मांग की।
ब्लॉक प्रमुख प्रकीर्ण नेगी, ग्राम प्रधान ज्योति देवी और अन्य जनप्रतिनिधियों ने बताया कि यह मार्ग कई पीढ़ियों से गांव के लोगों के आवागमन का साधन रहा है। खेतीबाड़ी और दैनिक जरूरतों के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। वन विभाग ने वर्षों से इस मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित की हुई है। इससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग बंद होने से खेती-किसानी और पशुपालन प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2016 और वर्ष 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी पौड़ी ने मार्ग पर आवागमन की अनुमति दी थी। मगर इसका पालन नहीं हुआ। उन्होंने अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम-2006, पुराने राजस्व अभिलेखों और 1989 के सर्वेक्षण मानचित्र का हवाला दिया। ग्रामीणों के अनुसार, यह राजस्व ग्राम का पारंपरिक कार्ट रोड है। जमूण गांव के अधिकांश परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। मार्ग बंद होने से पलायन का खतरा बढ़ रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। नैनीडांडा ब्लॉक के जमूण गांव के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पुश्तैनी मार्ग खोलने की मांग के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। उन्होंने दुर्गादेवी गेट से जमूण तिराहा तक के पारंपरिक बैलगाड़ी मार्ग को वर्षभर खोलने की मांग की।
ब्लॉक प्रमुख प्रकीर्ण नेगी, ग्राम प्रधान ज्योति देवी और अन्य जनप्रतिनिधियों ने बताया कि यह मार्ग कई पीढ़ियों से गांव के लोगों के आवागमन का साधन रहा है। खेतीबाड़ी और दैनिक जरूरतों के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। वन विभाग ने वर्षों से इस मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित की हुई है। इससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मार्ग बंद होने से खेती-किसानी और पशुपालन प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2016 और वर्ष 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी पौड़ी ने मार्ग पर आवागमन की अनुमति दी थी। मगर इसका पालन नहीं हुआ। उन्होंने अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम-2006, पुराने राजस्व अभिलेखों और 1989 के सर्वेक्षण मानचित्र का हवाला दिया। ग्रामीणों के अनुसार, यह राजस्व ग्राम का पारंपरिक कार्ट रोड है। जमूण गांव के अधिकांश परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। मार्ग बंद होने से पलायन का खतरा बढ़ रहा है।
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