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Kotdwar News: ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, वन विभाग ने लगाए तीन पिंजरे, दो शूटर तैनात,
Sun, 28 Jun 2026 11:34 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sun, 28 Jun 2026 11:34 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटद्वार। नैनीडांडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सतखोलू के बणासी तल्ली गांव में गुलदार के हमले में वृद्धा सुशीला देवी की मौत के बाद पूरे सल्ड महादेव क्षेत्र में दहशत बना है।
रविवार को ग्रामीणों ने सल्ड महादेव बाजार में सुशीना देवी के शव के साथ प्रदर्शन कर विधायक दिलीप रावत का घेराव किया। इस मौके पर विधायक और यूकेडी नेता कुलदीप रावत के बीच बहस भी हुई। लोगों का कहना है कि हर बार पिंजरा लगाकर या गुलदार मार देना कोई समाधान नहीं है। इसके लिए प्रशासन और विभाग को कोई स्थाई समाधान निकालना चाहिए।
गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महातिम यादव ने रविवार को गांव पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया। बताया कि दमदेवल के रेंजर सुभाष घिल्डियाल के नेतृत्व में गुलदार को पकड़ने के लिए गांव में चार पिंजरे लगाए जा रहे हैं। घटनास्थल के आसपास 10 कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। ड्रोन से गुलदार की निगरानी की जा रही है। दो शूटर जितेंद्र सिंह एवं बलदेव सिंह को तैनात किए हैं। 8 वन कर्मियों की टीम क्षेत्र में गश्त कर रही है। डीएफओ ने क्षेत्रवासियों से अनावश्यक रूप से अकेले जंगल में न जाने, समूह में ही आवागमन करने और कहीं भी गुलदार दिखाई देने पर जानकारी वन विभाग अथवा स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की।
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घटना के बाद से बणासी, भलासारी, सतखोलू, जड़ाऊं, दिउरा, रिंगल्टा और सल्ड महादेव क्षेत्र के लोग दहशत में हैं। शनिवार शाम भी किनाथ और जड़ाऊं गांव के बीच गुलदार की आवाजें सुनाई दी। सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद नेगी ने बताया कि रविवार को महिलाएं जंगल नहीं गई और अभिभावक बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने राजकीय प्राथमिक विद्यालय किनाथ स्थित पोलियो बूथ तक नहीं ले गए। सामान्य दिनों में लोग जहां देर शाम साढ़े सात बजे तक सल्ड बाजार में रहते थे, वहीं अब शाम पांच बजे से पहले ही घर लौट रहे हैं।
रविवार को गुलदार के खौफ में बच्चे पोलियो की खुराक पीने बूथ तक नहीं पहुंच पाए और महिलाएं घास काटने तक नहीं गई। ग्रामीण बताते हैं कि सल्ड महादेव क्षेत्र में वर्ष 1992 के बाद गुलदार के हमले में किसी व्यक्ति की मौत की यह पहली घटना है। वर्ष 1992 में जड़ाऊं और किनाथ क्षेत्र में सक्रिय गुलदार ने सात लोगों की जान ले ली थी।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
रविवार सुबह सल्ड महादेव स्थित श्मशान घाट पर सुशीला देवी के शव का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। मृतका के छोटे बेटे रमेश ने मुखाग्नि दी। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। मृतका की दोनों बेटियां सीमा और जीना सुबह मायके पहुंच गई थीं। सेना में सेवारत बड़ा बेटा दिनेश लद्दाख से घर के लिए रवाना हो गया है। अंतिम संस्कार के समय विधायक दिलीप रावत, यूकेडी नेता कुलदीप रावत, ब्लॉक प्रमुख प्रकीर्ण नेगी, एसडीएम श्रेष्ठ गुनसोला सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
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स्कूल खुलने से पहले अभिभावकों की बढ़ी चिंता
गर्मी की छुट्टियां समाप्त हो रही हैं। दो दिन बाद स्कूल खुलने हैं। गुलदार के आतंक ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। बणासी और सतखोलू के बच्चों को प्राथमिक से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई के लिए सल्ड महादेव जाना पड़ता है। दोनों गांवों तक सड़क सुविधा नहीं है। बच्चों को प्रतिदिन डेढ़ से तीन किलोमीटर तक जंगल के रास्ते पैदल चलना पड़ता है, वहीं भलासारी और जड़ाऊं के बच्चे किनाथ स्थित विद्यालय जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।
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फोटो समाचार
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कोटद्वार। नैनीडांडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सतखोलू के बणासी तल्ली गांव में गुलदार के हमले में वृद्धा सुशीला देवी की मौत के बाद पूरे सल्ड महादेव क्षेत्र में दहशत बना है।
रविवार को ग्रामीणों ने सल्ड महादेव बाजार में सुशीना देवी के शव के साथ प्रदर्शन कर विधायक दिलीप रावत का घेराव किया। इस मौके पर विधायक और यूकेडी नेता कुलदीप रावत के बीच बहस भी हुई। लोगों का कहना है कि हर बार पिंजरा लगाकर या गुलदार मार देना कोई समाधान नहीं है। इसके लिए प्रशासन और विभाग को कोई स्थाई समाधान निकालना चाहिए।
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गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ महातिम यादव ने रविवार को गांव पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया। बताया कि दमदेवल के रेंजर सुभाष घिल्डियाल के नेतृत्व में गुलदार को पकड़ने के लिए गांव में चार पिंजरे लगाए जा रहे हैं। घटनास्थल के आसपास 10 कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। ड्रोन से गुलदार की निगरानी की जा रही है। दो शूटर जितेंद्र सिंह एवं बलदेव सिंह को तैनात किए हैं। 8 वन कर्मियों की टीम क्षेत्र में गश्त कर रही है। डीएफओ ने क्षेत्रवासियों से अनावश्यक रूप से अकेले जंगल में न जाने, समूह में ही आवागमन करने और कहीं भी गुलदार दिखाई देने पर जानकारी वन विभाग अथवा स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की।
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घटना के बाद से बणासी, भलासारी, सतखोलू, जड़ाऊं, दिउरा, रिंगल्टा और सल्ड महादेव क्षेत्र के लोग दहशत में हैं। शनिवार शाम भी किनाथ और जड़ाऊं गांव के बीच गुलदार की आवाजें सुनाई दी। सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद नेगी ने बताया कि रविवार को महिलाएं जंगल नहीं गई और अभिभावक बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने राजकीय प्राथमिक विद्यालय किनाथ स्थित पोलियो बूथ तक नहीं ले गए। सामान्य दिनों में लोग जहां देर शाम साढ़े सात बजे तक सल्ड बाजार में रहते थे, वहीं अब शाम पांच बजे से पहले ही घर लौट रहे हैं।
रविवार को गुलदार के खौफ में बच्चे पोलियो की खुराक पीने बूथ तक नहीं पहुंच पाए और महिलाएं घास काटने तक नहीं गई। ग्रामीण बताते हैं कि सल्ड महादेव क्षेत्र में वर्ष 1992 के बाद गुलदार के हमले में किसी व्यक्ति की मौत की यह पहली घटना है। वर्ष 1992 में जड़ाऊं और किनाथ क्षेत्र में सक्रिय गुलदार ने सात लोगों की जान ले ली थी।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
रविवार सुबह सल्ड महादेव स्थित श्मशान घाट पर सुशीला देवी के शव का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। मृतका के छोटे बेटे रमेश ने मुखाग्नि दी। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। मृतका की दोनों बेटियां सीमा और जीना सुबह मायके पहुंच गई थीं। सेना में सेवारत बड़ा बेटा दिनेश लद्दाख से घर के लिए रवाना हो गया है। अंतिम संस्कार के समय विधायक दिलीप रावत, यूकेडी नेता कुलदीप रावत, ब्लॉक प्रमुख प्रकीर्ण नेगी, एसडीएम श्रेष्ठ गुनसोला सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
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स्कूल खुलने से पहले अभिभावकों की बढ़ी चिंता
गर्मी की छुट्टियां समाप्त हो रही हैं। दो दिन बाद स्कूल खुलने हैं। गुलदार के आतंक ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। बणासी और सतखोलू के बच्चों को प्राथमिक से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई के लिए सल्ड महादेव जाना पड़ता है। दोनों गांवों तक सड़क सुविधा नहीं है। बच्चों को प्रतिदिन डेढ़ से तीन किलोमीटर तक जंगल के रास्ते पैदल चलना पड़ता है, वहीं भलासारी और जड़ाऊं के बच्चे किनाथ स्थित विद्यालय जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।
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