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High Court: पांच वर्षों में न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ मिलीं 258 शिकायतें, चार में कार्यवाही शुरू

संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Thu, 19 Feb 2026 01:38 PM IST
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सार

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आरटीआई के तहत विभिन्न न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ 258 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से चार मामलों में अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई।

258 complaints received against judicial officers in five years, proceedings initiated in four cases
नैनीताल हाईकोर्ट।
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विस्तार

 उत्तराखंड कैडर के आईएफएस संजीव चतुर्वेदी के आरटीआई आवेदन के जवाब में, यह बताया गया है कि 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 तक, विभिन्न न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ 258 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से चार मामलों में अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई। यह खुलासा राज्य सूचना आयोग ने संजीव चतुर्वेदी की दूसरी अपील पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के राज्य लोक सूचना अधिकारी की ओर से निजता अधिकारों के अतिक्रमण के दावों को खारिज करने के बाद हुआ है। मामले में 1 जनवरी को पारित आदेश में, राज्य सूचना आयोग ने उच्च न्यायालय के राज्य लोक सूचना अधिकारी को एक महीने के भीतर चतुर्वेदी को जानकारी प्रदान करने और अनुपालन रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया था।

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इस प्रकार जहां हाल में छत्तीसगढ़, दिल्ली और चेन्नई जैसे कई दूसरे हाई कोर्ट ने आरटीआई के तहत निचली अदालतों के न्यायिक अधिकारियों के भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की जानकारी देने से इंकार कर दिया वहीं उत्तराखंड हाईकोर्ट अधीनस्थ न्यायपालिका के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी साझा करने वाला देश का पहला उच्च न्यायालय बन गया है।

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न्याय के प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह निर्णय एक मिसाल बना गया है। एक अन्य मामले में भी हाईकोर्ट ने हाल में निर्णय दिया है कि केवल वही सूचना अपवर्जित है जिसे कोर्ट प्रकाशित करने से रोके या जो कोर्ट की अवमानना का कारण हो। कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार की ओर से दायर एक रिट याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 के तहत केवल वही सूचना अपवर्जित (न देने योग्य) होती है जिसे किसी न्यायालय या अधिकरण की ओर से स्पष्ट रूप से प्रकाशित करने से रोका गया हो या जिसका खुलासा कोर्ट की अवमानना का कारण बन सकता हो।

न्याय के प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए उत्तराखंड हाई कोर्ट का यह बहुत अच्छा कदम है। इसकी अहमियत इस बात में है कि जहां छत्तीसगढ़, दिल्ली और चेन्नई जैसे कई दूसरे हाई कोर्ट ने ऐसी जानकारी शेयर करने से मना कर दिया है, वहीं उत्तराखंड हाई कोर्ट शायद ऐसी जानकारी शेयर करने वाला देश का पहला हाई कोर्ट बन गया है।-वरिष्ठ अधिवक्ता, सुदर्शन गोयल

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