Mallikarjun Kharge Rally: खरगे ने 46 मिनट में रखी 2027 की पटकथा, भाजपा पर साधा निशाना; पहाड़ के मुद्दे नदारद
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रैली को 2027 विधानसभा चुनाव का ट्रायल रन माना जा रहा है। पार्टी ने चुनाव से छह-सात महीने पहले कुमाऊं से अभियान तेज करने का संकेत दिया। खरगे ने भाजपा व संघ पर तीखे हमले कर सत्ता परिवर्तन का आह्वान किया।
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विस्तार
कांग्रेस की शंखनाद रैली में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत पार्टी की पूरी शीर्ष टीम मौजूद रही। सभी नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोला और कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम किया। लेकिन उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों का जिक्र तक नहीं हुआ।
पहाड़ के गांवों से बढ़ते पलायन, मानव-वन्यजीव संघर्ष, जंगली जानवरों से फसल और जान-माल का नुकसान, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं और राज्य की स्थायी राजधानी जैसे मुद्दों पर कोई भी वरिष्ठ नेता नहीं बोला। कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर निराशा देखी गई कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने भी इन जमीनी समस्याओं को मंच से नहीं उठाया गया।प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय फलक पर छा रहे देश और प्रदेश के तमाम मुद्दों को उठाया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने महंगाई और बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। भुवन कापड़ी, करन मेहरा और हरक सिंह ने भी सरकार को घेरते हुए भाषण दिए, लेकिन पहाड़ की पीड़ा मंच से नदारद रही।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिस मंच पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मौजूद हों, वहां उत्तराखंड के मूल मुद्दों को उठाना जरूरी था। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व का फोकस सिर्फ सत्ता विरोध तक सीमित रहा। रैली में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे, लेकिन पहाड़ के गांवों से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि उनके दर्द को राष्ट्रीय स्तर पर आवाज मिलेगी।
उत्तराखंड में कांग्रेस स्थानीय नेताओं के भरोसे ही नहीं, केंद्रीय नेतृत्व भी दे रहा दखल
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की शनिवार को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई रैली महज कार्यकर्ताओं की सभा नहीं, 2027 विधानसभा चुनाव का ट्रायल रन माना जा रहा है। पार्टी ने चुनाव से करीब छह-सात महीने पहले हल्द्वानी को चुनावी गतिविधियों का केंद्र बनाकर कुमाऊं से अपने अभियान को धार देने का संकेत दिया है। रैली में खरगे ने भाजपा और संघ पर तीखे राजनीतिक हमले किए और उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में चुनावी संदेश
रैली के लिए हल्द्वानी को चुनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मूल रूप से कुमाऊं से हैं और वर्तमान में चंपावत विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में कांग्रेस का कुमाऊं के सबसे बड़े शहर हल्द्वानी से चुनावी अभियान को गति देना भाजपा के मजबूत क्षेत्र में सीधे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
खरगे ने कमान संभाली
उत्तराखंड में राहुल गांधी के बाद खरगे ने चुनावी कमान संभाली। हालांकि कांग्रेस ने उत्तराखंड में चुनावी गतिविधियों की शुरुआत पहले ही कर दी थी। इतना तय है कि उत्तराखंड में स्थानीय नेताओं के भरोसे पार्टी नेतृत्व नहीं चलेगा। इसीलिए कांग्रेस अब यहां पूरा केंद्रीय नेतृत्व का दखल दे रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की रैली के माध्यम से पार्टी ने कार्यकर्ताओं के साथ ही संगठन को भी मैदान में उतरने का संकेत दे दिया है।
सुमित ने मंच से पुलिस के खिलाफ लगाए नारे
विधायक सुमित हृदयेश ने मंच से पुलिस और एसएसपी के खिलाफ नारे लगाकर माहौल में गर्मी ला दी। दरअसल सुमित का गुस्सा कार्यकर्ताओं को रैली स्थल तक न पहुंचने देने को लेकर था। अपने संबोधन के दौरान सुमित ने मंच से ही एसएसपी और पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगा दिए।
शैलजा ने सुमित को खरगे के बराबर में बैठाया
लोगों को संबोधित करने के बाद सुमित डायस से हटकर आगे बढ़े ही थे कि शैलजा ने खरगे के बराबर खाली पड़ी कुर्सी में सुमित को बैठने का संकेत किया। कुछ देर खरगे के बराबर में बैठने के बाद सुमित पहली पंक्ति में लगी दूसरी कुर्सी पर विराजमान हो गए।
खरगे ने मांगा पानी, गर्मी से परेशान नजर आए
संबोधन शुरू करने के कुछ ही देर बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इशारों में पानी की मांग की। तत्काल उन्हें पानी उपलब्ध कराया गया। भाषण देते वक्त खरगे मंच पर गर्मी से परेशान दिखे। हालांकि मंच पर दो कूलर लगाए गए थे।
मीडिया कर्मियों के लिए नहीं थी व्यवस्था
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जनसभा में आयोजकों ने प्रिंट मीडिया के लिए कोई व्यवस्था नहीं की थी। मुख्य मंच के सामने इलैक्ट्रानिक मीडिया के लिए व्यवस्था की गई थी जबकि उसके पीछे खाली स्थान पर कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं का कब्जा बना हुआ था। कांग्रेस के स्वयं सेवक इन नेताओं और कार्यकर्ताओं को वहां आने से रोक भी रहे थे लेकिन वह बार बार असफल हो जा रहे थे। ऐसे में प्रिंट मीडिया के अधिकांश लोगों ने खड़े खड़े ही पूरे कार्यक्रम की कवरेज की।
नहीं पहुंचे पूर्व सीएम हरीश रावत
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे की जनसभा में प्रदेश के अधिकांश बड़े कांग्रेसी नेता तो नजर आए लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरीश रावत मौजूद नहीं रहे। हरीश रावत की गैरमौजूदगी को लेकर तरह तरह की चर्चाएं होती रही। इधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने रावत का स्वास्थ्य खराब होने की बात कहते हुए उनके दिल्ली में होने की जानकारी दी।
छोलिया नृत्य के साथ हुआ स्वागत
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे का यहां पहुंचने पर छोलिया नृत्य व ढोल नगाड़ों के साथ कार्यकर्तांओं ने स्वागत किया। उनके आने के बाद भी देर तक छोलिया नृत्य डांस करते रहे और ढोल नगाड़े बजते रहे।
कांग्रेसी नेताओं ने खरगे और शैलजा को भेंट की गोल्ज्यू की फोटो
कांग्रेसी नेताओं ने स्वागत समारोह के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा को गोल्ज्यू भगवान की फोटो भेंट की। इस दौरान खरगे को शाल ओढ़ाया गया और बुके देकर उनका स्वागत किया गया। वहीं सिख समाज के लोगों ने खरगे को तलवार भेंट कर उनका स्वागत किया।
काश्तकार बोले भाजपा के राज में महंगे हो गए आम आदमी के काम
कांग्रेस की रैली में उधमसिंह नगर समेत कुमाऊं के सभी जिलों से बड़ी तादाद में कार्यकर्ता पहुंचे। रुद्रपुर से आए व्यापारी नेता संजीव गुप्ता ने दावा किया कि जिले से 30 से अधिक गाड़ियों में कार्यकर्ता रैली में शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्र से कांग्रेस को मिल रहा समर्थन 2027 में सत्ता परिवर्तन का संकेत है।
रैली के दौरान मंच के बाहर मौजूद किसानों ने भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। किसान ख़ेम सिंह, राजवीर सिंह और अमर सिंह ने कहा कि भाजपा शासन में आम आदमी के जरूरी काम भी महंगे हो गए हैं। पहले कांग्रेस के समय परिवार रजिस्टर की नकल 20 रुपये में मिल जाती थी, अब वही नकल 100 से 200 रुपये में मिल रही है। गरीब किसान कहां से इतना पैसा देगा? उन्होंने कहा कि सरकार उचित समर्थन मूल्य पर धान नहीं खरीद रही है। मजबूरी में किसानों को अपना धान औने-पौने दाम पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। इससे खेती घाटे का सौदा बन गई है।
किसानों ने कहा कि खाद, बीज और डीजल महंगा होने के बाद भी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा। हम मेहनत करते हैं, लेकिन हमारी फसल की कीमत व्यापारी तय कर रहे हैं। सरकार सिर्फ घोषणा करती है, धरातल पर कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि अब किसानों ने मन बना लिया है। अगली बार कांग्रेस को सत्ता में लाना है, तभी किसानों की दिक्कतें दूर होंगी। रैली में मौजूद कांग्रेस नेताओं ने भी किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का भरोसा दिया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आते ही किसानों को उनका हक और सम्मान वापस दिलाएगी।
यशपाल के हाथों में रही रैली की कमान
रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली को सफल बनाने के लिए पार्टी ने संगठन स्तर पर जिम्मेदारियां बांटकर पूरी व्यवस्था की। रैली के संयोजन की जिम्मेदारी नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के पास रही। आर्य लगातार रैली की तैयारियों और व्यवस्थाओं की मॉनीटरिंग करते रहे।
रैली के लिए ऊधमसिंह नगर जिले की जिम्मेदारी संजीव आर्य को दी गई। कुमाऊं के अन्य पांच जिलों की जिम्मेदारी नैनीताल जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल और प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नैनवाल ने संभाली। दोनों नेताओं ने जिलों से कार्यकर्ताओं की भागीदारी और उनके हल्द्वानी पहुंचने की व्यवस्थाओं पर नजर रखी। हल्द्वानी की स्थानीय व्यवस्था की जिम्मेदारी विधायक सुमित हृदयेश और उनकी टीम ने संभाली। वहीं चुनावी रैली के समग्र मार्गदर्शन की जिम्मेदारी प्रदेश उपाध्यक्ष विजय सारस्वत ने निभाई। प्रदेश स्तर से सह-प्रभारी मनोज यादव और सुरेंद्र शर्मा भी रैली की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए थे।
रैली को लेकर कांग्रेस ने बूथ से लेकर जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया था। अलग-अलग जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों को अलग-अलग दायित्व सौंपे गए। नैनीताल जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल ने बताया कि रैली में कुमाऊं के अलावा गढ़वाल क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे थे। यह अभी सिर्फ आगाज है, आने वाले दिनों में भी कांग्रेस पूरे प्रदेश में ऐसी रैलियां कर जनता के सामने स्थानीय मुद्दों को उठाएगी।