UK: चट्टान पर आठ मीटर लंबी दरार दिखने से जमरानी बांध का निर्माण प्रभावित, अब ऐसे होगी गैप की सिलाई
जमरानी बांध निर्माण के दौरान दाहिनी ओर की चट्टान में 8 मीटर चौड़ा गैप मिला, जिससे काम रोक दिया गया है। इसके ट्रीटमेंट में करीब 2 माह लग सकते हैं। फिलहाल भू-भौतिकीय सर्वेक्षण कराया जा रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जमरानी बांध परियोजना में निर्माण के दौरान एक बड़ी तकनीकी चुनौती सामने आई है। बांध के दाहिनी ओर की चट्टान में आठ मीटर चौड़ा गैप पाया गया है। फिलहाल आगे का निर्माण कार्य रोक दिया गया है। इसके ट्रीटमेंट में दो माह का समय लग सकता है।
परियोजना इकाई के अनुसार बांध की डिजाइन ऊंचाई 765.6 मीटर से खोदाई का काम शुरू किया गया था। 53 मीटर खोदाई के बाद जब स्तर 712 मीटर पर पहुंचा तो दाहिनी ओर की चट्टान में करीब आठ मीटर लंबा गैप दिखाई दिया। इसे देखते हुए तुरंत काम बंद कर भू-भौतिकीय सर्वेक्षण (जियोफिजिकल सर्वे) शुरू करा दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि सर्वे के जरिये यह पता लगाया जाएगा कि यह गैप चट्टान में कितनी दूरी और गहराई तक फैला है। पूरी चट्टान का वैज्ञानिक परीक्षण होगा। सर्वे रिपोर्ट में जितने हिस्से में गैप मिलेगा, उसका विशेष ट्रीटमेंट किया जाएगा।
इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है। आयोग के तकनीकी निर्देशों के अनुसार ही गैप का ट्रीटमेंट होगा। अनुमान है कि सर्वे रिपोर्ट 10 से 12 दिन में मिल जाएगी। ट्रीटमेंट के बाद ही आगे का निर्माण शुरू होगा जिससे परियोजना में करीब दो महीने का अतिरिक्त समय लग सकता है।
ऐसे होगी चट्टान के गैप की सिलाई
ट्रीटमेंट यानी चट्टान में गैप की सिलाई की जाएगी। पहले गैप की लंबाई, चौड़ाई और गहराई का सटीक आकलन होगा। यदि गैप छोटा हुआ तो सीमेंट और कंक्रीट के ब्लॉक बनाकर उसे भरा जाएगा। अगर गैप बड़ा निकला तो लोहे की सरिया और सीमेंट के बीम डालकर चट्टान को आपस में जोड़ा जाएगा। इंजीनियरों का कहना है कि इससे बांध की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
3808 करोड़ पहुंची बांध की लागत
2018 में जब केंद्र सरकार की ओर से जमरानी बांध के लिए बजट जारी हुआ तब इसकी अनुमानित लागत 2584.10 करोड़ रुपये थी। अब लागत बढ़कर 3808 करोड़ रुपये पहुंच गई है। परियोजना पूरी होने पर यहां 10 किलोमीटर लंबी झील बनेगी। बांध की ऊंचाई 150 मीटर और लंबाई 450 मीटर होगी।
यूपी को 57, उत्तराखंड को 43 फीसदी पानी
बांध से निकलने वाले पानी का 57 फीसदी हिस्सा उत्तर प्रदेश की सिंचाई के लिए जाएगा। शेष 43 फीसदी पानी उत्तराखंड के तराई और भाबर क्षेत्र की सिंचाई में इस्तेमाल होगा। इसके साथ ही हल्द्वानी शहर की 10.65 लाख आबादी के लिए प्रतिदिन 117 एमएलडी पेयजल भी इसी बांध से उपलब्ध कराया जाएगा।
बांध निर्माण के दौरान चट्टान में गैप मिलना कोई असामान्य बात नहीं है। सुरक्षा और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जियो फिजिकल सर्वे के बाद केंद्रीय जल आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया से ट्रीटमेंट किया जाएगा। उसके बाद बांध पूरी तरह सुरक्षित और टिकाऊ हो जाएगा। - बीबी पांडेय, उप महाप्रबंधक जमरानी बांध परियोजना इकाई