उत्तराखंड का जर्जर तहसील भवन: दीवारों में दरारें...छतों पर पेड़, बरसात में कर्मचारियों का जोखिम भरा कामकाज
तहसील परिसर में प्रस्तावित 'नमो भवन' फाइलों में तो मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम दूर है। वहीं, मौजूदा अंग्रेजों जमाने की जर्जर इमारतों में दीवारों पर गहरी दरारें, प्लास्टर झड़ना, छतों पर पेड़-घास उगना और जड़ों का कमरों में फैलना जैसे हालात हैं।
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विस्तार
फाइलों में भले ही तहसील परिसर में प्रस्तावित नमो भवन की बुनियाद डाली जा चुकी है लेकिन धरातल पर अभी यह दूर है। दूसरी ओर तहसील के वर्षों पुराने मौजूदा जर्जर भवनों में काम कर रहे कर्मचारियों की जान हथेली पर है। तहसील परिसर के अधिकांश अंग्रेजों के जमाने के कुछ भवनों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। दीवारों का प्लास्टर लगातार झड़ रहा है। छत में पेड़, घास उगी हुई हैं। पेड़ों की जड़ें कमरों के भीतर फैल रही हैं। ऐसे में बरसात के मौसम में टूटती छतों, दरकती दीवारों और सीलन भरे कमरों के बीच कर्मचारी हर दिन जोखिम में डालकर सरकारी कामकाज निपटाने को मजबूर हैं।
केस-1
सबसे अधिक खराब स्थिति नैनीताल रोड के निकट स्थित पटवारी चौकी भवन की है। भवन की छत में लगाई गई कुछ लकड़ियां गलकर टूट चुकी हैं तो कुछ सड़गल चुकी हैं। भवन के भीतर काम कर रही महिला पटवारी की कुर्सी के सामने और पीछे की पत्थर की दीवारों में बड़े-बड़े सुराख और चौड़ी दरारें हर किसी को डरा रही हैं। बारिश के दौरान छत से पानी रिसता है जिससे कामकाज में बाधा पहुंचती हैं। इस भवन के सामने वाले हिस्से में छत न केवल कई जगह से क्षतिग्रस्त है बल्कि छत ने झूले का रूप ले लिया है।
केस-2
तहसील के पीछे की ओर स्थित आधार कार्ड दफ्तर का भवन भी बदहाल है। उसकी छत पर पेड़ उग आए हैं। छत पर उगे पेड़ों की जड़ें दीवारों को छेदते हुए भीतर कमरों की दीवारों में फैल चुकी हैं। यहां भी एक महिला कार्य करते मिली। ऐसे में भवन की सुरक्षा भगवान भरोसे है। वहीं कई पुराने कमरों में सीलन और नमी के कारण अभिलेखों के सुरक्षित रखरखाव पर भी संकट मंडरा रहा है।
केस-3
तहसील के एनआईसी केंद्र का भवन सबसे पुराना है। यहां भी खतरा कुछ कम नहीं है। एनआईसी की ओर सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते ही बिजली और केबल के तारों का ऐसा जाल फैला हुआ है कि कहीं शॉर्ट सर्किट हो जाए तो लकड़ी के इस पुराने भवन में बड़ा हादसा हो सकता है।
कब बनेगा नमो भवन
तहसील परिसर के अलावा रजिस्ट्री कार्यालय व रोडवेज परिसर के भवनों को तोड़कर वहां नमो भवन प्रस्तावित है। इसके लिए करोड़ों की धनराशि स्वीकृत है। कार्यदायी संस्था ने जो पहली डीपीआर बनाई थी, बजट की कमी के कारण उसमें बदलाव कर नई डीपीआर शासन को भेजी गई है। यहां एक ऐसा बहुउद्देशीय भवन बनना है जिसमें पार्किंग के अलावा सभी दफ्तरों के लिए स्थान सुलभ हो सके। नमो भवन का मकसद लोगों को एक छत के नीचे अधिकांश दफ्तरों की सुविधाएं उपलब्ध कराना है लेकिन वर्षों से इसकी बुनियाद फाइलों में भरी जा रही है।
जीर्णोद्धार की तैयारी है क्या?
अमर उजाला की टीम ने सोमवार को तहसील के बदहाल भवनों को अपने कैमरे में कैद किया तो वहां कार्य कर रहे अधिकांश कर्मचारियों के मुंह से एक ही शब्द निकल रहा था। वह था, जीर्णोद्धार की तैयारी है क्या? कर्मचारियों का कहना है कि कई बार बदहाल भवनों की मरम्मत की मांग की जा चुकी है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कर्मचारियों को इस बात की चिंता रहती है कि ऐसे बदहाल भवनों में काम करते वक्त कभी कोई हादसा न हो जाए।
तहसील परिसर में बहुउद्देशीय नमो भवन बनना है। इसकी औपचारिकताएं तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं। नमो भवन बनने तक जहां जरूरी है पुराने भवनों की मरम्मत कराई जाएगी। -ललित मोहन रयाल जिलाधिकारी नैनीताल।