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Nainital News: पारंपरिक लोहे के बर्तनों से संवारी रोजगार की राह
Mon, 26 Oct 2026 01:32 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 26 Oct 2026 01:32 AM IST
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हल्द्वानी। चंपावत के बाजरीकोट निवासी धीरज कुमार पुश्तैनी हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पहचान दे रहे हैं। आठ साल दिल्ली में नौकरी करने के बाद उन्होंने पारंपरिक कारोबार को अपनाया और लोहे के बर्तनों को आधुनिक रूप देकर सोशल मीडिया के जरिए नए बाजारों तक पहुंचाया।
एमबी इंटर कालेज मैदान में आयोजित कुमाऊं द्वार महोत्सव में धीरज ने लोहे के बर्तनों का स्टॉल लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके दादा ने लोहे की कढ़ाई बनाने का काम शुरू किया। इस हुनर को उनके पिता ने आगे बढ़ाया। धीरज ने पारंपरिक कारोबार को पुराने तौर-तरीकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुसार लोहे के बर्तनों में नए प्रयोग भी किए। उनके यहां पारंपरिक कढ़ाई के साथ इंडक्शन चूल्हे पर इस्तेमाल होने वाले बर्तन भी तैयार किए जाते हैं। उनके बर्तनों की मांग दिल्ली तक है। उन्होंने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय बाजारों के साथ ही सोशल मीडिया का सहारा लिया।
बॉक्स-
महिलाओं को जोड़ा, गांव में रोजगार की राह खोली
धीरज ने चार साल पहले पंचबलिया नाम से स्वयं सहायता समूह की स्थापना की। उनकी माता बसंती देवी इस समूह की अध्यक्ष हैं और इसमें छह महिलाएं जुड़ी हुई हैं। पारंपरिक कारोबार को आजीविका का माध्यम बनाने के साथ ही इस पहल के जरिए ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को भी रोजगार से जोड़ा है।
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एमबी इंटर कालेज मैदान में आयोजित कुमाऊं द्वार महोत्सव में धीरज ने लोहे के बर्तनों का स्टॉल लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके दादा ने लोहे की कढ़ाई बनाने का काम शुरू किया। इस हुनर को उनके पिता ने आगे बढ़ाया। धीरज ने पारंपरिक कारोबार को पुराने तौर-तरीकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुसार लोहे के बर्तनों में नए प्रयोग भी किए। उनके यहां पारंपरिक कढ़ाई के साथ इंडक्शन चूल्हे पर इस्तेमाल होने वाले बर्तन भी तैयार किए जाते हैं। उनके बर्तनों की मांग दिल्ली तक है। उन्होंने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय बाजारों के साथ ही सोशल मीडिया का सहारा लिया।
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महिलाओं को जोड़ा, गांव में रोजगार की राह खोली
धीरज ने चार साल पहले पंचबलिया नाम से स्वयं सहायता समूह की स्थापना की। उनकी माता बसंती देवी इस समूह की अध्यक्ष हैं और इसमें छह महिलाएं जुड़ी हुई हैं। पारंपरिक कारोबार को आजीविका का माध्यम बनाने के साथ ही इस पहल के जरिए ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को भी रोजगार से जोड़ा है।
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