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Nainital News: गूलों में बहती जलधारा ने घराटों में लौटाया पहाड़ का जीवन
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भवाली (नैनीताल)। लगभग विलुप्त हो चुकी पहाड़ की पहचान घराट की घरघराहट रामगढ़ में अब लगातार गूंजेगी। बंद होने की कगार पर खड़ी ब्लॉक की दो घराटों को जिला योजना की धनराशि से लघु सिंचाई विभाग ने पुनर्जीवित किया है। दोनों घराटों के लगातार चलने के बाद स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध होने के साथ ही घराट में तैयार आटे की डिमांड भी बढ़ने लगी है।
लघु सिंचाई विभाग की ओर से रामगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत टिकुरी के रोलखेत में 3.50 लाख से गूलों की मरम्मत के साथ ही घराट का सौंदर्यीकरण किया गया है। ग्राम पंचायत बड़ीडाज में भी 3.50 लाख से गूलों की मरम्मत कार्य करते हुए घराट को दोबारा सुचारु किया गया है। गूलों में निरंतर पानी मिलने के चलते अब घराट सालभर चल सकेंगे। इससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। घराटों से तैयार आटे को हल्द्वानी के एनजीओ संचालक 60 रुपये किलो के हिसाब से खरीद रहे हैं। इससे बाजार में घराट से तैयार आटे की डिमांड बढ़ी है। जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी डॉ. मुकेश सिंह नेगी ने बताया कि जिला योजना की धनराशि से घराटों को संरक्षित किया गया है। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता महेश मठपाल ने बताया कि दो घराटों के पुनर्जीवित होने से ग्रामीणों को रोजगार मिला है। घराट में तैयार आटे का दाम भी अच्छा मिल रहा है।
पानी नहीं मिलने से बंद होने की कगार पर थे घराट
दोनों घराटों को पिछले काफी लंबे समय से स्थानीय ग्रामीण बारी-बारी से चलाते आ रहे थे। मगर काफी पुराने के चलते घराटों का ढांचा भी जीण-क्षीर्ण हो चुका था। दूसरी ओर गूलों के टूटने से घराटों को लगातार पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही थी। मगर अब गूलों की मरम्मत के साथ घराटों के सौंदर्यीकरण के बाद इनका अस्तित्व बचा रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि वह घराटों के गूलों की मरम्मत से काफी खुश हैं।
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लघु सिंचाई विभाग की ओर से रामगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत टिकुरी के रोलखेत में 3.50 लाख से गूलों की मरम्मत के साथ ही घराट का सौंदर्यीकरण किया गया है। ग्राम पंचायत बड़ीडाज में भी 3.50 लाख से गूलों की मरम्मत कार्य करते हुए घराट को दोबारा सुचारु किया गया है। गूलों में निरंतर पानी मिलने के चलते अब घराट सालभर चल सकेंगे। इससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। घराटों से तैयार आटे को हल्द्वानी के एनजीओ संचालक 60 रुपये किलो के हिसाब से खरीद रहे हैं। इससे बाजार में घराट से तैयार आटे की डिमांड बढ़ी है। जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी डॉ. मुकेश सिंह नेगी ने बताया कि जिला योजना की धनराशि से घराटों को संरक्षित किया गया है। लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता महेश मठपाल ने बताया कि दो घराटों के पुनर्जीवित होने से ग्रामीणों को रोजगार मिला है। घराट में तैयार आटे का दाम भी अच्छा मिल रहा है।
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पानी नहीं मिलने से बंद होने की कगार पर थे घराट
दोनों घराटों को पिछले काफी लंबे समय से स्थानीय ग्रामीण बारी-बारी से चलाते आ रहे थे। मगर काफी पुराने के चलते घराटों का ढांचा भी जीण-क्षीर्ण हो चुका था। दूसरी ओर गूलों के टूटने से घराटों को लगातार पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही थी। मगर अब गूलों की मरम्मत के साथ घराटों के सौंदर्यीकरण के बाद इनका अस्तित्व बचा रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि वह घराटों के गूलों की मरम्मत से काफी खुश हैं।