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UK: हाईकोर्ट से हल्द्वानी को मिलेगी नई पहचान, सुप्रीम के आदेश के बाद उच्च न्यायालय शिफ्टिंग का रास्ता साफ

Thu, 16 Jul 2026 12:34 PM IST
Heera चंद्रेश पांडे
चंद्रेश पांडे Published by: Heera Updated Thu, 16 Jul 2026 12:34 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से अब नैनीताल से हल्द्वानी में हाईकोर्ट शिफ्ट करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस स्थानांतरण से हल्द्वानी को नई पहचान मिलेगी, वहां से होने वाले फैसलों की देशव्यापी गूंज होगी और क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार मिलेगी। 

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Haldwani will get a new identity from the High Court
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के गौलापार में शिफ्टिंग का रास्ता साफ हो गया है। गौलापार में हाईकोर्ट की शिफ्टिंग के बाद जहां एक ओर हल्द्वानी को नई पहचान मिलेगी वहीं हाईकोर्ट आने के बाद यहां से निकलने वाले फैसलों की गूंज पूरे देश में सुनाई देगी। साथ ही क्षेत्र के विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने एक फैसले में राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर हल्द्वानी में 26 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने को कहा है।

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अमर उजाला के अभियान की हुई जीत
हाईकोर्ट शिफ्टिंग के मुद्दे को लेकर पूर्व में समय-समय पर अलग-अलग चर्चाएं रहीं। ऐसे में अमर उजाला ने हाईकोर्ट को नैनीताल जिले से बाहर शिफ्ट न करने को लेकर नौ से लेकर 18 मई तक ‘हाईकोर्ट नैनीताल जिले में ही रहे’ विषयक अभियान चलाया था और लगातार खबरें प्रकाशित की थीं। अभियान के दौरान जनभावनाओं, अधिवक्ताओं और आम जनता की राय को प्रमुखता से उठाया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रशासनिक समन्वय से शिफ्टिंग का आदेश देकर अमर उजाला के अभियान को सही करार दिया है। इधर, लोगों का कहना है कि हाईकोर्ट हल्द्वानी शिफ्ट होने से नैनीताल की ऐतिहासिक विरासत भी बचेगी और हल्द्वानी का विकास भी होगा।

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ये होंगे बड़े फायदे

गौलापार में हाईकोर्ट की स्थापना के बाद हल्द्वानी को नई पहचान मिलेगी। अब तक हल्द्वानी को कुमाऊं के प्रवेश द्वारा के रूप में पहचाना जाता था। हाईकोर्ट शिफ्ट होने के बाद इसे न्यायिक रूप से पहचान मिलेगी। कोर्ट के फैसलों की गूंज राष्ट्रीय स्तर तक होगी। इससे हल्द्वानी शहर की साख बढ़ेगी।

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स्वतः संज्ञान लिया तो लगेगी अवैध गतिविधियों पर रोक

पूर्व के वर्षों में देखा गया है कि जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दों पर हाईकोर्ट के जज स्वतः संज्ञान लेते हैं। स्वतः संज्ञान में लिए गए मुद्दों पर कोर्ट में सुनवाई होती है और जनहित में फैसले दिए जाते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि हाईकोर्ट के गौलापार शिफ्ट होने के बाद कोर्ट पर्यावरण, अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों पर स्वतः संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करेगा। इससे स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी लगाम लगेगी। वहीं, गौलापार और आसपास के इलाकों में पिछले वर्षों के दौरान जमीन की खूब खरीद-फरोख्त हुई है। इसमें कई मामले लैंड फ्रॉड के भी हैं। ऐसे माना जा रहा है कि हाईकोर्ट के गौलापार आने के बाद जमीन की हेराफेरी और अवैध प्लाॅटिंग जैसे मामलों में भी कोर्ट निगरानी रख सकता है। यदि ऐसा हुआ तो लैंड फ्रॉड के पीड़ितों को न्याय के लिए नैनीताल नहीं जाना पड़ेगा बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही न्याय सुलभ हो जाएगा।

आधारभूत सुविधाओं में होगा इजाफा
गौलापार क्षेत्र के लोगों का मानना है कि हाईकोर्ट के आने के बाद गौलापार ही नहीं बल्कि हल्द्वानी शहर के लोगों को मिलने वाली आधारभूत सुविधाओं में इजाफा होगा। ऐसे में यहां की यातायात व्यवस्था के साथ-साथ बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार आएगा।

हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला वादकारियों के हित में है। -सुधांशु तिवारी, संयुक्त सचिव, बार एसोसिएशन हल्द्वानी।

हाईकोर्ट के हल्द्वानी शिफ्ट होने के बाद सरकारी मशीनरी चुस्त दुरुस्त होगी और इसका लाभ आम जनता को मिलेगा। अलग-अलग स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार पर भी नकेल कसेगी। -रवि जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता, गौलापार हल्द्वानी।

 

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