UK: मां से बिछड़ने के रुस्तम के दर्द पर विभाग की ममता का मरहम, झुंड से बिछड़े हाथी के बच्चे का ये होगा ठिकाना
रामनगर तराई वन प्रभाग के जंगल में अपनी मां और झुंड से बिछड़ा दो साल का हाथी रुस्तम अब कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) के कालागढ़ स्थित हाथी कैंप में वनकर्मियों की देखरेख में पलेगा।
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रामनगर तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल में अपनी मां और झुंड से बिछड़ा नन्हा हाथी रुस्तम अब कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में वनकर्मियों की देखरेख में पलेगा। वन विभाग ने दो साल के रुस्तम को उसके झुंड से मिलाने के लिए प्रयास किए थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ऐसे में सुरक्षा और बेहतर देखभाल को देखते हुए वनाधिकारियों ने नन्हे हाथी को कालागढ़ स्थित हाथी कैंप भेजने का निर्णय लिया है।
विगत वर्ष तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल में नन्हा हाथी झुंड से अलग मिला था। उम्र कम होने के कारण वन विभाग ने उसकी निगरानी शुरू कर दी और रुस्तम नामकरण किया। आसपास मौजूद हाथियों के झुंड से उसका संपर्क कराने के लिए टीम ने क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी और नन्हे हाथी को झुंड के साथ मिलाने का प्रयास किया।
लगातार निगरानी के बावजूद झुंड के साथ रुस्तम का संपर्क नहीं हो सका। बीते लगभग एक साल से नन्हा हाथी तराई केंद्रीय वन प्रभाग में ही वन कर्मियों की देखरेख में रह रहा था। अब बेहतर पालन-पोषण के लिए उसे सीटीआर के कालागढ़ हाथी कैंप में भेजने की तैयारी की जा रही है। संवाद
नन्हा हाथी सिखेगा रेस्क्यू अभियान के गुण
कालागढ़ के एसडीओ अमित ग्वासीकोटी ने बताया कि कालागढ़ हाथी कैंप में नन्हे हाथी की विशेष देखरेख की जाएगी। वनकर्मी उसके खान-पान, स्वास्थ्य और व्यवहार पर लगातार नजर रखेंगे। इसके साथ ही कालागढ़ में पहले से मौजूद अनुभवी हाथियों के साथ नन्हे हाथी को रेस्क्यू अभियान समेत अन्य जरूरी गुर भी सिखाए जाएंगे।
दो साल के रुस्तम की कालगढ़ में होगी मालती से दोस्ती
जानकारी के अनुसार, विगत वर्ष लैंसडौन वन प्रभाग से एक नन्ही हथिनी को वन विभाग ने रेस्क्यू किया था। हथिनी के जंगल वापस लौटने की उम्मीद खत्म होने के बाद उसे भी कालागढ़ हाथी कैंप में रखा गया है। उसका नाम मालती रखा गया है। वहीं अब तराई केंद्रीय वन प्रभाग से आने वाले दो साल के रुस्तम को भी अपनी नई दोस्त मालती से मिलने का मौका मिलेगा।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग से जल्द ही दो साल के रुस्तम हाथी को लाने की तैयारी की जा रही है। अनुमति मिलते ही हाथी को कालागढ़ हाथी कैंप में रखा जाएगा। उसे रेस्क्यू अभियान के गुण भी सिखाए जाएंगे। - डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर