विकास की बौछार: जर्जर जमरानी नहरों के कायाकल्प के लिए 300 करोड़ मंजूर, किसानों को होगा फायदा
दशकों से जर्जर पड़ी जमरानी बांध परियोजना की नहरों के कायाकल्प के लिए राज्य सरकार ने 300 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस राशि से कुल 62.07 किलोमीटर लंबी नहरों को नया रूप दिया जाएगा।
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दशकों से जर्जर पड़ी जमरानी बांध परियोजना की नहरों पर अब विकास की बौछार होने वाली है। राज्य सरकार ने इन नहरों के कायाकल्प के लिए 300 करोड़ रुपये का खजाना खोल दिया है। इस धनराशि से परियोजना से जुड़ी कुल 62.07 किलोमीटर लंबी नहरों को नया रूप दिया जाएगा। इन नहरों से तराई-भाबर क्षेत्र के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के बरेली और रामपुर जिलों के लाखों किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा। संवाद
चार बड़े फीडर से जुड़ेंगी नहरें
जमरानी बांध परियोजना इकाई के अनुसार योजना में 21.25 किलोमीटर नई नहरों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा 40.82 किलोमीटर पुरानी और जर्जर नहरों का नवीनीकरण होगा। 20.5 किलोमीटर नहरों का पुनर्निर्माण कार्य पहले ही पूरा कर लिया गया है। ये सभी नहरें चार बड़े फीडरों से जुड़ी हैं। योजना के तहत हरिपुरा फीडर की 15 किमी, पाहा फीडर की 8.42 किमी, गौला वार फीडर की 19.30 किमी और गौला वार मेन फीडर की 1.10 किमी लंबाई में निर्माण और सुदृढ़ीकरण का काम किया जाना है।
वर्तमान स्थिति
वर्तमान में परियोजना के पार्ट वन का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की 33.32 किलोमीटर नहरों को दुरुस्त किया जा रहा है लेकिन निर्माण की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। काम धीमा होने के पीछे नहरों के किनारे से गुजर रही बिजली की लाइनों के पोल और पेयजल की पाइप लाइनों को शिफ्ट करने में विभागों के बीच समन्वय की कमी आड़े आ रही है।
बिजली पोल, पेयजल लाइन शिफ्टिंग और फॉरेस्ट लैंड क्लियरेंस जैसी प्रक्रियाओं की वजह से गति थोड़ी धीमी है। समस्याओं का समाधान निकाल रहे हैं ताकि तय समय सीमा में कार्य पूरा कर किसानों को इसका लाभ दिया जा सके।
- शाहनवाज, प्रबंधक जमरानी बांध परियोजना इकाई