सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Moru oak forests in Uttarakhand's low altitude areas are in danger.

Nainital News: उत्तराखंड में निम्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मोरू ओक के जंगल संकट में

संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Thu, 18 Jun 2026 01:12 AM IST
विज्ञापन
Moru oak forests in Uttarakhand's low altitude areas are in danger.
विज्ञापन
नैनीताल। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने वाले मोरू ओक के जंगल गंभीर संकट में हैं। जलवायु परिवर्तन और बढ़ते मानवीय दबाव के कारण इन महत्वपूर्ण वनों का प्राकृतिक पुनर्जनन कमजोर पड़ रहा है। हालिया अध्ययन में कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में मोरू ओक के अस्तित्व पर भविष्य में खतरे की चेतावनी दी गई है।

डीएसबी परिसर के फॉरेस्ट्री एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष तिवारी के साथ इकरमजीत मान, ललित एम तिवारी, योगेश चंद्रा त्रिपाठी, मो. आरिफ अंसारी, नंदन सिंह और अमित मित्तल ने 1900 से 2600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 14 मोरू ओक प्रधान वनों में शोध किया गया। शोधकर्ताओं ने इन क्षेत्रों को तीन ऊंचाई श्रेणियों निम्न, मध्य और उच्च में बांटा था। अध्ययन में कुल 53 काष्ठीय पौधों की प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें 14 वृक्ष और 39 झाड़ी प्रजातियां शामिल थीं। निम्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पौधों की नई पीढ़ी तैयार होने की दर काफी कम दर्ज की गई। वर्ष 2023 में उच्च क्षेत्रों में बीज गिरावट अधिक थी, लेकिन 2024 को कम बीज उत्पादन वाला वर्ष पाया गया। 2024 में लगभग सभी ऊंचाइयों पर बीज गिरावट नगण्य रही, जो चिंता का विषय है। हालांकि उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मोरू ओक का आधार क्षेत्र सबसे अधिक पाया गया। मध्य और उच्च ऊंचाई वाले इलाकों में इस प्रजाति के पौधों का पुनर्जनन अपेक्षाकृत बेहतर रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या है प्राकृतिक पुनर्जनन
वह प्रक्रिया है जिसमें पेड़-पौधे बिना किसी मानवीय सहायता के, प्राकृतिक रूप से गिरे बीजों या पहले से मौजूद जड़ों से फिर उग आते हैं।

पुनर्जनन पर मानवीय गतिविधियों का असर
वैज्ञानिकों का मानना है कि निम्न ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पुनर्जनन पर कई कारक नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। इनमें तापमान वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में बदलाव और अत्यधिक चराई प्रमुख हैं।
विज्ञापन


हिमालय में तेजी से बढ़ता तापमान
शोध में बताया गया है कि हिमालयी क्षेत्र वैश्विक औसत की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है। यह क्षेत्र लगभग दो से तीन डिग्री अधिक गति से गर्म हो रहा है। पिछले कुछ दशकों में यहां तापमान वृद्धि की दर लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक दर्ज की गई है। इस तापमान वृद्धि का सीधा असर वनस्पति वितरण पर पड़ रहा है। यह पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed