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Nainital News: उत्तराखंड में पहली बार होगी वी-1 शहतूत की खेती
Mon, 06 Jul 2026 01:13 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 06 Jul 2026 01:13 AM IST
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हल्द्वानी। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद प्रदेश में पहली बार शहतूत की नई प्रजाति लगाई जाएगी। अब तक यहां एस-146 प्रजाति के शहतूत के पौधे रोपे जाते थे। अब यहां महाराष्ट्र के अकोला और अमरावती से लाई गई वी-1 प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का दावा है कि वी-1 प्रजाति की पत्तियां ज्यादा पौष्टिक और गुणवत्तायुक्त होती है। इससे रेशम की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में पहले से अधिक इजाफा होगा। रेशम विभाग के कुमाऊं मंडल के उप निदेशक हेम चंद्र ने बताया गया कि कुमाऊं मंडल में स्थापित कुल 43 राजकीय शहतूत उद्यानों में कुछ चुनिंदा उद्यानों में इस बार 15 जुलाई से शहतूत की वी-1 प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। वर्ष 2026-27 में कुमाऊं मंडल के विभागीय फार्मों एवं निजी क्षेत्र (कृषकों के यहां) कुल दो लाख 80 हजार शहतूत के पौधे रोपे जाएंगे। मंडल में 99100 किलोग्राम कोया उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इससे रेशम उत्पादक काश्तकारों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
इसलिए खास है शहतूत की नई किस्म वी-1
- पौधे में सामान्य पौधे से कहीं अधिक पत्तियां लगती हैं जिससे रेशम के कीड़ों का पालन अधिक होता है।
- वी-1 की पत्तियों में नमी और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है जो उच्चकोटि के कोकून का निर्माण करती है।
- यह किस्म उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के तापमान के अनुकूल है।
कोट-
रेशम उत्पादन से एक ओर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर शहतूत के पौधों का रोपण कर काश्तकारों को रोजगारपरक रेशम व्यवसाय से जोड़ा जा रहा है। कुमाऊं मंडल में रेशम कीट पालन व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है।
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हेम चंद्र, उप निदेशक रेशम कुमाऊं मंडल
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विशेषज्ञों का दावा है कि वी-1 प्रजाति की पत्तियां ज्यादा पौष्टिक और गुणवत्तायुक्त होती है। इससे रेशम की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में पहले से अधिक इजाफा होगा। रेशम विभाग के कुमाऊं मंडल के उप निदेशक हेम चंद्र ने बताया गया कि कुमाऊं मंडल में स्थापित कुल 43 राजकीय शहतूत उद्यानों में कुछ चुनिंदा उद्यानों में इस बार 15 जुलाई से शहतूत की वी-1 प्रजाति के पौधे रोपे जाएंगे। वर्ष 2026-27 में कुमाऊं मंडल के विभागीय फार्मों एवं निजी क्षेत्र (कृषकों के यहां) कुल दो लाख 80 हजार शहतूत के पौधे रोपे जाएंगे। मंडल में 99100 किलोग्राम कोया उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इससे रेशम उत्पादक काश्तकारों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
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इसलिए खास है शहतूत की नई किस्म वी-1
- पौधे में सामान्य पौधे से कहीं अधिक पत्तियां लगती हैं जिससे रेशम के कीड़ों का पालन अधिक होता है।
- वी-1 की पत्तियों में नमी और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है जो उच्चकोटि के कोकून का निर्माण करती है।
- यह किस्म उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के तापमान के अनुकूल है।
कोट-
रेशम उत्पादन से एक ओर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर शहतूत के पौधों का रोपण कर काश्तकारों को रोजगारपरक रेशम व्यवसाय से जोड़ा जा रहा है। कुमाऊं मंडल में रेशम कीट पालन व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है।
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हेम चंद्र, उप निदेशक रेशम कुमाऊं मंडल