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Pauri News: श्रीनगर में एक्यूआई 390 के करीब

संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी Updated Wed, 20 May 2026 07:00 PM IST
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AQI close to 390 in Srinagar
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जंगलों की आग और ब्लैक कार्बन से बढ़ा खतरा
गढ़वाल विवि ने जारी किया वायु गुणवत्ता व मौसमीय परिवर्तन का चौथा बुलेटिन
संवाद न्यूज एजेंसी

श्रीनगर। एचएनबी गढ़वाल विवि के भौतिकी विभाग स्थित हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला ने मौसमीय परिवर्तन एवं वायु गुणवत्ता का चतुर्थ सूचना बुलेटिन जारी किया। यह बुलेटिन श्रीनगर एवं आसपास के हिमालयी क्षेत्रों में मौसम, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) तथा ब्लैक कार्बन स्तरों पर आधारित है। इसके तहत श्रीनगर में एक्यूआई 390 के करीब है जो वायु गुणवत्ता की दृष्टि से बहुत ही खराब है। जंगलों की आग और ब्लैक कार्बन से खतरा बढ़ा है।
भौतिकी विभाग, बिरला परिसर में विभागाध्यक्ष प्रो. त्रिलोक चंद्र उपाध्याय ने कहा कि डॉ. आलोक सागर गौतम एवं उनकी शोध टीम अमनदीप विश्वकर्मा, अंकित कुमार और सरस्वती रावत को इस पर अध्ययन किया है। बुलेटिन जारी करते हुए डॉ. गौतम ने कहा कि 6 से 20 मई के बीच श्रीनगर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती दिनों में एक्यूआई मध्यम श्रेणी में रहा लेकिन 10 मई को यह 215 तक पहुंच गया जो खराब श्रेणी माना जाता है। 19 मई को एक्यूआई 356 तथा 20 मई की सुबह लगभग 10 बजे यह बढ़कर करीब 390 तक पहुंच गया जो वेरी पुअर से सीवियर श्रेणी के निकट है। इस स्तर पर वातावरण में ब्लैक कार्बन और धुएं की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन, एलर्जी, अस्थमा और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने लोगों को दोपहर की तेज धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने, एक्यूआई अधिक होने पर मास्क का उपयोग करने तथा बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वैज्ञानिकों ने वनाग्नि नियंत्रण, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग, कृषि अवशेष प्रबंधन तथा वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी को समय की आवश्यकता बताया है।
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दो सप्ताह में 12 डिग्री सेल्सियस बढ़ा तापमान
नगर क्षेत्र में 7 मई को अधिकतम तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस था जो 19 मई तक बढ़कर लगभग 39 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यानि दो सप्ताह के बीच तापमान में करीब 12 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वैज्ञानिकों ने इसे हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते हीट स्ट्रेस का संकेत बताया है। बढ़ता तापमान, जंगलों में आग, जल स्रोतों पर दबाव और पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
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