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Pauri News: बैंक के 14.91 लाख के लोन की राशि को एक महीने में भुगतान के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Thu, 02 Apr 2026 04:49 PM IST
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पौड़ी। फर्म खोलने के नाम पर कैनरा बैंक श्रीनगर से लिए गए 15 लाख के (सीसीएल) लोन के सापेक्ष फर्म स्वामी को 14.91 लाख की राशि एक महीने के भीतर ब्याज सहित चुकानी होगी। सिविल जज (सी.डि) पौड़ी अमित भट्ट की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
मामले के अनुसार बैंक की ओर से दायर वाद में बताया गया कि श्रीनगर निवासी दीपक उनियाल ने अपनी फर्म रूद्रांश ट्रेडर्स के लिए 2014 में बैंक से 15 लाख का कैश क्रेडिट ऋण (सीसीएल) लिया था। इसमें सुशील चंद्र उनियाल को जमानती बनाया गया था। बैंक ने लोन जारी करने के साथ ही ऋण अनुबंध पत्र पर दोनों के हस्ताक्षर करवाए और शर्तें भी बताईं लेकिन फर्म स्वामी ने समय पर किश्तों और ब्याज का भुगतान नहीं किया। खाते में लगातार लापरवाही के चलते 30 दिसंबर 2021 को बैंक ने उसे गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए घोषित कर दिया। बैंक ने कई बार बकाया राशि जमा करने के लिए फर्मस्वामी को नोटिस भेजे बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इस पर बैंक प्रबंधक गौरव कुमार ने जुलाई 2023 में अदालत की शरण ली। बैंक की ओर से बताया गया कि 30 जुलाई 2023 तक फर्म स्वामी पर ब्याज सहित कुल 14,91,316 रुपये का बकाया है। सुनवाई के दौरान फर्म स्वामी ने बैंक के दावों को चुनौती दी और कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने फर्म स्वामी को 14,91,316 रुपये की बकाया राशि 10.15 प्रतिशत के वार्षिक ब्याज दर के साथ एक महीने के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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मामले के अनुसार बैंक की ओर से दायर वाद में बताया गया कि श्रीनगर निवासी दीपक उनियाल ने अपनी फर्म रूद्रांश ट्रेडर्स के लिए 2014 में बैंक से 15 लाख का कैश क्रेडिट ऋण (सीसीएल) लिया था। इसमें सुशील चंद्र उनियाल को जमानती बनाया गया था। बैंक ने लोन जारी करने के साथ ही ऋण अनुबंध पत्र पर दोनों के हस्ताक्षर करवाए और शर्तें भी बताईं लेकिन फर्म स्वामी ने समय पर किश्तों और ब्याज का भुगतान नहीं किया। खाते में लगातार लापरवाही के चलते 30 दिसंबर 2021 को बैंक ने उसे गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी एनपीए घोषित कर दिया। बैंक ने कई बार बकाया राशि जमा करने के लिए फर्मस्वामी को नोटिस भेजे बावजूद भुगतान नहीं किया गया। इस पर बैंक प्रबंधक गौरव कुमार ने जुलाई 2023 में अदालत की शरण ली। बैंक की ओर से बताया गया कि 30 जुलाई 2023 तक फर्म स्वामी पर ब्याज सहित कुल 14,91,316 रुपये का बकाया है। सुनवाई के दौरान फर्म स्वामी ने बैंक के दावों को चुनौती दी और कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने फर्म स्वामी को 14,91,316 रुपये की बकाया राशि 10.15 प्रतिशत के वार्षिक ब्याज दर के साथ एक महीने के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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