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Pauri News: बदलते मौसम का कहर, वायरल के बाद गले के इंफेक्शन के मरीज बढ़े
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Fri, 10 Apr 2026 05:00 PM IST
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- उपजिला चिकित्सालय श्रीनगर की ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे 10 से 12 मरीज
श्रीनगर। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कभी गर्मी तो कभी अचानक ठंड के कारण उपजिला चिकित्सालय में वायरल फीवर के बाद अब गले के संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 10 से 12 मरीज सिर्फ गले की गंभीर समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि समय पर पूरा इलाज नहीं लिया गया तो यह संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर रूप ले सकता है।
उपजिला चिकित्सालय श्रीनगर के नाक-कान-गला (ईएनटी) रोग विशेषज्ञ डॉ. दिगपाल दत्त ने बताया कि मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव को लोग समझ नहीं पा रहे हैं। सर्द-गर्म के इसी फेर के चलते वायरल फीवर के बाद अब गले के संक्रमण के मरीज तेजी से बढ़े हैं।
डाॅ. दत्त के अनुसार, मरीजों में मुख्य रूप से खांसी, गले में तेज खराश, खाना-पानी निगलने में भारी दिक्कत, आवाज में बदलाव और गले में दर्द जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा समस्या एक सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहती है, तो यह फेफड़ों (लंग्स) के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। इसके बाद मरीज को सांस लेने में भारी दिक्कत और अत्यधिक खांसी का सामना करना पड़ सकता है। कहा लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और दवा बीच में न छोड़ें।
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इन बातों का रखें विशेष ध्यान-- -- सीधे नल या फिल्टर का पानी पीने के बजाय, पानी को अच्छी तरह उबाल लें और फिर उसे ठंडा करके ही पीएं।-- -- शरीर में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है। पानी पीने की मात्रा बढ़ा दें और कमजोरी लगने पर ओआरएस के घोल का सेवन करें।-- -- गले में किसी भी तरह की दिक्कत होने पर खट्टी चीजों और अत्यधिक ठंडे खाद्य पदार्थों (कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, फ्रिज का पानी) से पूरी तरह दूरी बना लें।-- -- आधी-अधूरी दवा खाना सबसे ज्यादा नुकसानदेह है। विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाएं और उनके द्वारा दी गई दवाइयों का पूरा कोर्स खत्म करें।
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श्रीनगर। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कभी गर्मी तो कभी अचानक ठंड के कारण उपजिला चिकित्सालय में वायरल फीवर के बाद अब गले के संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 10 से 12 मरीज सिर्फ गले की गंभीर समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि समय पर पूरा इलाज नहीं लिया गया तो यह संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर रूप ले सकता है।
उपजिला चिकित्सालय श्रीनगर के नाक-कान-गला (ईएनटी) रोग विशेषज्ञ डॉ. दिगपाल दत्त ने बताया कि मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव को लोग समझ नहीं पा रहे हैं। सर्द-गर्म के इसी फेर के चलते वायरल फीवर के बाद अब गले के संक्रमण के मरीज तेजी से बढ़े हैं।
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डाॅ. दत्त के अनुसार, मरीजों में मुख्य रूप से खांसी, गले में तेज खराश, खाना-पानी निगलने में भारी दिक्कत, आवाज में बदलाव और गले में दर्द जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा समस्या एक सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहती है, तो यह फेफड़ों (लंग्स) के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। इसके बाद मरीज को सांस लेने में भारी दिक्कत और अत्यधिक खांसी का सामना करना पड़ सकता है। कहा लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और दवा बीच में न छोड़ें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान