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Pauri News: 14 साल बाद थमाया बिजली बिल, आयोग ने लगाई विभाग को फटकार
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Mon, 09 Feb 2026 03:31 PM IST
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पौड़ी। 14 वर्षों बाद उपभोक्ता पर बिजली बिल के भुगतान का दबाव बनाना विद्युत वितरण खंड पौड़ी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (डीसीडीआरसी) ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग को वसूली गई 3,447 रुपये लौटाने के साथ मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10 हजार और वाद व्यय के लिए 5 हजार रुपये अदा करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश डीसीडीआरसी पौड़ी के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता की अदालत ने सुनाया।
शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार भट्ट निवासी ग्राम देवल विकासखंड कोट ने आयोग को बताया कि ग्राम कोट और देवल स्थित उनके पैतृक भवनों में लिए गए दोनों बिजली कनेक्शन का पूरा भुगतान करने के बाद उन्हें विधिवत कटवा दिया गया था। इसके बावजूद विद्युत वितरण खंड पौड़ी ने न तो जमानत धनराशि लौटाई और न ही किसी प्रकार के बकाया की सूचना दी।शिकायत के अनुसार विभाग ने वर्ष 2005 से 2019 तक का बकाया बताते हुए बिना पूर्व सूचना के 28 जून 2019 को तहसीलदार पौड़ी के माध्यम से आरसी जारी कर दी। 21 जून 2019 को भेजे गए नोटिस में 3,133 रुपये की राशि 10 प्रतिशत संयोजन शुल्क सहित जमा न करने पर गिरफ्तारी व संपत्ति कुर्की की चेतावनी दी गई। दबाव में आकर शिकायतकर्ता को ब्याज सहित 3,447 रुपये जमा करने पड़े।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन तभी काटा जाता है जब सभी देयकों का भुगतान हो चुका हो। विभाग कनेक्शन कटने के समय किसी भी वैध बकाया को प्रमाणित करने में असफल रहा। कहा कि 14 वर्षों बाद बिना ठोस दस्तावेजी साक्ष्य और वैध मांगपत्र के आरसी जारी करना मनमाना रवैया है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। साथ ही आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी का संतोषजनक उत्तर न देना विभागीय अपारदर्शिता को दर्शाता है, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 के तहत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आदेश के अनुसार विद्युत विभाग को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को कुल 18,447 रुपये का भुगतान करना होगा। समय पर भुगतान न होने की स्थिति में आयोग ने विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार भट्ट निवासी ग्राम देवल विकासखंड कोट ने आयोग को बताया कि ग्राम कोट और देवल स्थित उनके पैतृक भवनों में लिए गए दोनों बिजली कनेक्शन का पूरा भुगतान करने के बाद उन्हें विधिवत कटवा दिया गया था। इसके बावजूद विद्युत वितरण खंड पौड़ी ने न तो जमानत धनराशि लौटाई और न ही किसी प्रकार के बकाया की सूचना दी।शिकायत के अनुसार विभाग ने वर्ष 2005 से 2019 तक का बकाया बताते हुए बिना पूर्व सूचना के 28 जून 2019 को तहसीलदार पौड़ी के माध्यम से आरसी जारी कर दी। 21 जून 2019 को भेजे गए नोटिस में 3,133 रुपये की राशि 10 प्रतिशत संयोजन शुल्क सहित जमा न करने पर गिरफ्तारी व संपत्ति कुर्की की चेतावनी दी गई। दबाव में आकर शिकायतकर्ता को ब्याज सहित 3,447 रुपये जमा करने पड़े।
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आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन तभी काटा जाता है जब सभी देयकों का भुगतान हो चुका हो। विभाग कनेक्शन कटने के समय किसी भी वैध बकाया को प्रमाणित करने में असफल रहा। कहा कि 14 वर्षों बाद बिना ठोस दस्तावेजी साक्ष्य और वैध मांगपत्र के आरसी जारी करना मनमाना रवैया है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। साथ ही आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी का संतोषजनक उत्तर न देना विभागीय अपारदर्शिता को दर्शाता है, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 के तहत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। आदेश के अनुसार विद्युत विभाग को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को कुल 18,447 रुपये का भुगतान करना होगा। समय पर भुगतान न होने की स्थिति में आयोग ने विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी है।