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परिश्रम ही सफलता का मार्ग, शॉर्टकट नहीं: प्रो. शास्त्री
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Fri, 12 Jun 2026 06:54 PM IST
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पद्मश्री सम्मान के बाद पहली बार श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर पहुंचे, बालगुरुकुलम् के विद्यार्थियों को किया प्रेरित
परिश्रम ही सफलता का मार्ग, शॉर्टकट नहीं: प्रो. शास्त्री
देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं अंतरराष्ट्रीय संस्कृत अध्ययन संघ के अध्यक्ष प्रो. वैंपति कुटुम्ब शास्त्री ने श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के बालगुरुकुलम् के विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि 24-25 वर्ष की आयु तक किया गया परिश्रम पूरे जीवन का सुखद मार्ग तैयार करता है। उन्होंने कहा कि सफलता कभी शॉर्टकट से नहीं, बल्कि व्यापक ज्ञान और निरंतर मेहनत से मिलती है। पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद पहली बार परिसर पहुंचे प्रो. शास्त्री ने प्रबोधन कार्यशाला में व्याख्यान देते हुए देवप्रयाग में संचालित बालगुरुकुलम् को प्राचीन गुरुकुल परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उन्होंने संस्कृत अध्ययन में बालिकाओं की बढ़ती भागीदारी को संस्कृत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बताया। प्रो. शास्त्री ने बाल गुरुकुल और समुत्कर्ष केंद्र की स्थापना के लिए प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी का आभार जताया तथा निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम के प्रबंधन की सराहना की। इस अवसर पर प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम, सह निदेशिका प्रो. चंद्रकला आर. कोंडी और डॉ. शैलेंद्रनारायण कोटियाल ने उनका अभिनंदन किया।
परिश्रम ही सफलता का मार्ग, शॉर्टकट नहीं: प्रो. शास्त्री
देवप्रयाग। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं अंतरराष्ट्रीय संस्कृत अध्ययन संघ के अध्यक्ष प्रो. वैंपति कुटुम्ब शास्त्री ने श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के बालगुरुकुलम् के विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि 24-25 वर्ष की आयु तक किया गया परिश्रम पूरे जीवन का सुखद मार्ग तैयार करता है। उन्होंने कहा कि सफलता कभी शॉर्टकट से नहीं, बल्कि व्यापक ज्ञान और निरंतर मेहनत से मिलती है। पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद पहली बार परिसर पहुंचे प्रो. शास्त्री ने प्रबोधन कार्यशाला में व्याख्यान देते हुए देवप्रयाग में संचालित बालगुरुकुलम् को प्राचीन गुरुकुल परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उन्होंने संस्कृत अध्ययन में बालिकाओं की बढ़ती भागीदारी को संस्कृत के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बताया। प्रो. शास्त्री ने बाल गुरुकुल और समुत्कर्ष केंद्र की स्थापना के लिए प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी का आभार जताया तथा निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम के प्रबंधन की सराहना की। इस अवसर पर प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम, सह निदेशिका प्रो. चंद्रकला आर. कोंडी और डॉ. शैलेंद्रनारायण कोटियाल ने उनका अभिनंदन किया।