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Pauri News: जिला आबकारी अधिकारी के खिलाफ लोगों ने थाने में दी तहरीर

संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी Updated Mon, 16 Mar 2026 06:49 PM IST
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People lodged a complaint against the District Excise Officer at the police station.
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शराब के ठेके के विरोध में बढ़ रहा लोगों का जन आक्रोश, सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए महिलाओं किए भजन कीर्तन
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवप्रयाग। तीर्थनगरी में खोले गए शराब के ठेके के विरोध में लोगों का जन-आक्रोश बढ़ने लगा है। रविवार रातभर महिलाएं धरने पर डटी रहीं वहीं आंदोलन के दूसरे दिन महिलाओं ने सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए भजन-कीर्तन और प्रार्थना की। वहीं दूसरी ओर जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह की ओर से पूर्व प्रधान डॉबरी नेत्र सिंह के साथ की गई अभद्रता के मामले में आक्रोशित जनप्रतिनिधियों ने आबकारी अधिकारी को तत्काल निलंबित करने की मांग करते हुए थाने में तहरीर दी। सोमवार को संगम नगरी में स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर भुईट गांव स्थित शराब के ठेके को हटाने की मांग के लिए आंदोलन तेज होने लगा है। रविवार रात को मूसलाधार बारिश के बावजूद बुजुर्ग महिलाएं पूरी रात सड़क पर धरने पर डटी रहीं। जिला पंचायत सदस्य पुष्पा रावत की अगुवाई में धरने पर बैठीं महिलाओं ने सरकार की दोहरी नीति पर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि जब ऋषिकेश में सात किलोमीटर तक मदिरा निषेध है तो देवप्रयाग में ठेका खोलना मानकों की खुली अवहेलना है। वहीं जिला आबकारी अधिकारी की ओर से पूर्व प्रधान से अभद्रता के मामले में ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष शिव सिंह चौहान ने पुलिस को तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। लोगों ने तीर्थ क्षेत्र में शराब नहीं, रोजगार चाहिए... के नारे लगाए। सभी ने सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की। धरने पर त्रिभुवन चौहान, प्रमोद नारायण मेवाड़ गुरु, सीताराम रणाकोटी, राहुल कोटियाल, रघुवीर सिंह, डीबली देवी, ममता देवी, सुनीता देवी, चिंता देवी, डूग्गी देवी, लक्ष्मी देवी व सरस्वती देवी आदि बैठे रहे।
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ठेका बंद करने के लिए महिलाओं ने खुद खोला मोर्चा

राजेश भट्ट

देवप्रयाग। संगम नगरी में खोले गए शराब के ठेके ने जहां लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है वहीं लोगों के घरों का सुख-चैन छीन लिया है। इन सब परेशानियों से जूझने के बाद अब देवप्रयाग के पास स्थित शराब के ठेके को बंद कराने के लिए महिलाओं ने खुद मोर्चा खोल दिया है।
कैलाशी देवी कहती हैं कि आज युवा नशे की गिरफ्त में हैं। मेरा एक बेटा शहर में नौकरी करता है लेकिन दूसरा इसी शराब के पीछे खुद को खत्म कर रहा है। घर में अकेली रहती हूं। वहीं ठेके के पास ही दुकान और होटल चलाने वाली सुनीता देवी कहती हैं कि शराब के कारण उनका रोजगार और सामाजिक मान-मर्यादा दोनों दांव पर हैं। यहां आए दिन गाली-गलौज और हुड़दंग होता है। नशे में धुत लोग कहीं भी गंदगी करने लगते हैं, जिससे होटल में रुकने वाले यात्री परिवारों को शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। रिश्तेदार घर आने से कतराते हैं। जंगली जानवरों से उतना डर नहीं लगता जितना इन नशेड़ियों से लगता है। आश्चर्य है कि जहां महिलाएं परिवार बचाने के लिए सड़कों पर उतरी हैं, वहीं पुरुष वर्ग इस पूरे आंदोलन से लगभग नदारद है। पूरे प्रदर्शन के दौरान इक्का-दुक्का पुरुष ही नजर आए। संवाद
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