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Pauri News: स्वयं सहायता समूहों से बदल रही महिलाओं की तस्वीर
Sun, 26 Jul 2026 07:19 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sun, 26 Jul 2026 07:19 PM IST
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आजीविका मिशन बना आर्थिक सशक्तीकरण का आधार
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। विकास खंड कीर्तिनगर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण का मजबूत आधार बन रहा है। यहां स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हजारों महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं। ब्लॉक मिशन प्रबंधक मुकेश देव ने बताया कि वर्तमान में क्षेत्र की 97 ग्राम पंचायतों में 635 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं जिनसे 4,135 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
स्थानीय संसाधनों के आधार पर महिलाओं की ओर से सुपाणा और पाब अकरी में फूड प्रोसेसिंग, डागर में अदरक उत्पादन, जियालगढ़-मलेथा-लक्षमोली में नमकीन-बिस्किट निर्माण, नैथाणा में सब्जी उत्पादन, बडियारगढ़ में रिंगाल के उत्पाद व मोटा अनाज प्रसंस्करण, धारी में प्रसाद पैकेजिंग, मंगसू में झाड़ू-बैग निर्माण, चौकी में चिप्स निर्माण, खोला-शील में पैकेजिंग, तथा मशरूम उत्पादन, जड़ी-बूटियों की खेती और मधुमक्खी पालन किया जा रहा है। मुकेश देव ने बताया कि महिलाओं को स्थायी आजीविका और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण भी समय-समय पर दिया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। विकास खंड कीर्तिनगर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण का मजबूत आधार बन रहा है। यहां स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हजारों महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं। ब्लॉक मिशन प्रबंधक मुकेश देव ने बताया कि वर्तमान में क्षेत्र की 97 ग्राम पंचायतों में 635 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं जिनसे 4,135 से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
स्थानीय संसाधनों के आधार पर महिलाओं की ओर से सुपाणा और पाब अकरी में फूड प्रोसेसिंग, डागर में अदरक उत्पादन, जियालगढ़-मलेथा-लक्षमोली में नमकीन-बिस्किट निर्माण, नैथाणा में सब्जी उत्पादन, बडियारगढ़ में रिंगाल के उत्पाद व मोटा अनाज प्रसंस्करण, धारी में प्रसाद पैकेजिंग, मंगसू में झाड़ू-बैग निर्माण, चौकी में चिप्स निर्माण, खोला-शील में पैकेजिंग, तथा मशरूम उत्पादन, जड़ी-बूटियों की खेती और मधुमक्खी पालन किया जा रहा है। मुकेश देव ने बताया कि महिलाओं को स्थायी आजीविका और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण भी समय-समय पर दिया जाता है।
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