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Pauri News: आसमान छूते काॅमर्शियल सिलिंडर के दामों से परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sun, 03 May 2026 11:29 PM IST
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संचालकों ने सरकार से की राहत देने की मांग
श्रीनगर। कमर्शियल गैस सिलिंडर की लगातार बढ़ती कीमतों ने श्रीनगर के ठेला, रेहड़ी और छोटे ढाबा संचालकों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। पहले गैस की किल्लत और अब आसमान छूते दाम-इन दोनों की दोहरी मार से छोटे कारोबारी परेशान हैं। शहर में करीब 35 से 40 परिवार ऐसे हैं, जिनकी रोजी-रोटी टिक्की, गोलगप्पे, मोमोज, चाउमीन और चाय के ठेलों पर निर्भर है। बीते दिनों गैस सिलिंडर की कमी के कारण कई संचालकों को लकड़ी और डीजल भट्टी का सहारा लेना पड़ा, जबकि कुछ को अस्थायी रूप से काम बंद करना पड़ा था। अब स्थिति और गंभीर हो गई है। पहले करीब 1800 रुपये में मिलने वाला कमर्शियल सिलिंडर बढ़कर 1950, फिर 2200 और अब लगभग 3150 रुपये तक पहुंच गया है। पिछले महीने भी तीन बार हुई बढ़ोतरी ने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। ठेला संचालक शशि, सियाराम, पप्पू, रामू और चैतराम का कहना है कि वे भारी संकट में हैं। अगर वे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक कम हो जाते हैं, जबकि पुराने रेट पर बेचने से लागत भी नहीं निकल पा रही है। चाय के खोखे चलाने वाले जीत सिंह, अंकुर और रिंकू भी महंगाई से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि दिनभर की मेहनत के बाद मुश्किल से 700 से 1000 रुपये की कमाई होती है। ऐसे में अगर एक सिलिंडर पर ही एक हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हो जाए, तो घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई मुश्किल हो जाता है। व्यापारियों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि छोटे कारोबारियों के लिए कमर्शियल गैस पर राहत दी जाए, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।
जारी-- - सत्य प्रसाद मैठाणी
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श्रीनगर। कमर्शियल गैस सिलिंडर की लगातार बढ़ती कीमतों ने श्रीनगर के ठेला, रेहड़ी और छोटे ढाबा संचालकों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। पहले गैस की किल्लत और अब आसमान छूते दाम-इन दोनों की दोहरी मार से छोटे कारोबारी परेशान हैं। शहर में करीब 35 से 40 परिवार ऐसे हैं, जिनकी रोजी-रोटी टिक्की, गोलगप्पे, मोमोज, चाउमीन और चाय के ठेलों पर निर्भर है। बीते दिनों गैस सिलिंडर की कमी के कारण कई संचालकों को लकड़ी और डीजल भट्टी का सहारा लेना पड़ा, जबकि कुछ को अस्थायी रूप से काम बंद करना पड़ा था। अब स्थिति और गंभीर हो गई है। पहले करीब 1800 रुपये में मिलने वाला कमर्शियल सिलिंडर बढ़कर 1950, फिर 2200 और अब लगभग 3150 रुपये तक पहुंच गया है। पिछले महीने भी तीन बार हुई बढ़ोतरी ने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। ठेला संचालक शशि, सियाराम, पप्पू, रामू और चैतराम का कहना है कि वे भारी संकट में हैं। अगर वे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक कम हो जाते हैं, जबकि पुराने रेट पर बेचने से लागत भी नहीं निकल पा रही है। चाय के खोखे चलाने वाले जीत सिंह, अंकुर और रिंकू भी महंगाई से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि दिनभर की मेहनत के बाद मुश्किल से 700 से 1000 रुपये की कमाई होती है। ऐसे में अगर एक सिलिंडर पर ही एक हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हो जाए, तो घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई मुश्किल हो जाता है। व्यापारियों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि छोटे कारोबारियों के लिए कमर्शियल गैस पर राहत दी जाए, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।
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