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Pauri News: गुलदार के हमलों से आक्रोशित ग्रामीणों का डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sat, 28 Feb 2026 06:39 PM IST
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डीएम के आश्वासन पर स्थगित किया धरना स्थगित
पौड़ी। विकासखंड क्षेत्र में गुलदार के बढ़ते हमलों से नाराज ग्रामीणों का धरना शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। आक्रोशित ग्रामीणों ने डीएम कार्यालय के बाहर हेमवती नंदन बहुगुणा मूर्ति स्थल पर प्रदर्शन किया और बाद में डीएम कार्यालय के गेट पर धरने पर बैठ गए।
ग्रामीणों का आरोप था कि शुक्रवार से धरना देने के बावजूद कोई अधिकारी उनकी सुनवाई के लिए नहीं पहुंचा। डीएम के न आने पर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएम स्वाति एस. भदौरिया और डीएफओ महातिम यादव से वार्ता की।
वार्ता में ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे हैं। ग्राम प्रधान चवथ शंकर नौटियाल और विनोद दनोसी ने बताया कि गजल्ड, बाड़ा और डोभा गांव में लगातार गुलदार के हमले हो रहे हैं। चार दिसंबर को गजल्ड निवासी और 15 जनवरी को एक नेपाली मूल के व्यक्ति की जान जा चुकी है, जबकि बीते बृहस्पतिवार को डोभा गांव में एक नेपाली महिला पर हमला हुआ।
ग्रामीणों ने चारा-पत्ती की व्यवस्था, बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए एस्कॉर्ट, वन्यजीवों से सुरक्षा, वनाग्नि रोकथाम, सूखते जल स्रोतों और पेयजल किल्लत के समाधान की मांग की। ग्राम प्रधान चवथ शंकर नौटियाल ने कहा कि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं होने पर वे आमरण अनशन के लिए बाध्य होंगे। डीएम ने वन विभाग को ग्रामीणों की समस्याएं गंभीरता से लेते हुए जल्द समस्याओं का हल करने को कहा। धरना देने वालों में ग्राम प्रधान धनाऊं कमल रावत, मोहित सिंह, भाष्कर बहुगुणा, आस्कर रावत आदि शामिल रहे।
देर से पहुंचे डीएफओ, काफी देर तक अड़े रहे ग्रामीण
डीएम कार्यालय में धरने पर बैठे आक्रोशित ग्रामीणों को समझाने के लिए संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। हालांकि ग्रामीण डीएफओ को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस प्रशासन भी लगातार ग्रामीणों को शांत कराने में जुटा रहा, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे रहे। जब प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिला। उसके बाद डीएफओ भी मौके पर पहुंचे।
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पौड़ी। विकासखंड क्षेत्र में गुलदार के बढ़ते हमलों से नाराज ग्रामीणों का धरना शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। आक्रोशित ग्रामीणों ने डीएम कार्यालय के बाहर हेमवती नंदन बहुगुणा मूर्ति स्थल पर प्रदर्शन किया और बाद में डीएम कार्यालय के गेट पर धरने पर बैठ गए।
ग्रामीणों का आरोप था कि शुक्रवार से धरना देने के बावजूद कोई अधिकारी उनकी सुनवाई के लिए नहीं पहुंचा। डीएम के न आने पर ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल ने डीएम स्वाति एस. भदौरिया और डीएफओ महातिम यादव से वार्ता की।
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वार्ता में ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे हैं। ग्राम प्रधान चवथ शंकर नौटियाल और विनोद दनोसी ने बताया कि गजल्ड, बाड़ा और डोभा गांव में लगातार गुलदार के हमले हो रहे हैं। चार दिसंबर को गजल्ड निवासी और 15 जनवरी को एक नेपाली मूल के व्यक्ति की जान जा चुकी है, जबकि बीते बृहस्पतिवार को डोभा गांव में एक नेपाली महिला पर हमला हुआ।
ग्रामीणों ने चारा-पत्ती की व्यवस्था, बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए एस्कॉर्ट, वन्यजीवों से सुरक्षा, वनाग्नि रोकथाम, सूखते जल स्रोतों और पेयजल किल्लत के समाधान की मांग की। ग्राम प्रधान चवथ शंकर नौटियाल ने कहा कि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं होने पर वे आमरण अनशन के लिए बाध्य होंगे। डीएम ने वन विभाग को ग्रामीणों की समस्याएं गंभीरता से लेते हुए जल्द समस्याओं का हल करने को कहा। धरना देने वालों में ग्राम प्रधान धनाऊं कमल रावत, मोहित सिंह, भाष्कर बहुगुणा, आस्कर रावत आदि शामिल रहे।
देर से पहुंचे डीएफओ, काफी देर तक अड़े रहे ग्रामीण
डीएम कार्यालय में धरने पर बैठे आक्रोशित ग्रामीणों को समझाने के लिए संयुक्त मजिस्ट्रेट दीक्षिता जोशी और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। हालांकि ग्रामीण डीएफओ को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस प्रशासन भी लगातार ग्रामीणों को शांत कराने में जुटा रहा, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे रहे। जब प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिला। उसके बाद डीएफओ भी मौके पर पहुंचे।