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Pauri News: गांव से शहर तो बने पर सुविधाएं आज भी लापता
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Tue, 03 Feb 2026 05:33 PM IST
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नगर निगम में शामिल होने के चार साल बाद भी नहीं बदली गांवों की तस्वीर
पथ प्रकाश, पेयजल और आम रास्तों की स्थिति बदहाल
श्रीनगर। नगर निगम में शामिल किए गए गांवों में चार वर्ष बीतने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। नकोट, दिगोली, धनचड़ा सहित कई गांवों में आज तक नगर निगम जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं। पथ प्रकाश के अभाव में गांवों की गलियां अंधेरे में डूबी रहती हैं जबकि पैदल रास्तों की स्थिति भी बेहद खराब है।
स्थानीय निवासी एवं वन पंचायत सरपंच मनमोहन सिंह नेगी ने बताया कि वर्ष 2021 में उनकी ग्राम पंचायत सहित आसपास के गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि वर्षों से उपेक्षित इन गांवों का समुचित विकास होगा लेकिन चार साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि गांव की कई गलियों और पैदल रास्तों पर आज भी अंधेरा पसरा रहता है। रास्तों की खराब हालत के कारण लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में परेशानी झेलनी पड़ती है।
साथ ही गुलदार व अन्य जंगली जानवरों का खतरा हर समय बना रहता है। कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए भी अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं हो पाए हैं। इसके अलावा पेयजल समस्या वर्षों पुरानी है जो आज भी जस की तस बनी हुई है। गर्मियों के दौरान लोगों को हैंडपंपों और प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। गांव में कई आम पैदल रास्ते हैं, लेकिन अब तक एक रास्ते का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। पथ प्रकाश के नाम पर भी केवल औपचारिकता निभाई गई है।
मनमोहन सिंह नेगी ने कहा कि नगर निगम में शामिल होने के बाद भी गांवों को कोई विशेष लाभ नहीं मिला है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से निगम में शामिल गांवों के विकास कार्यों पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की मांग की है।
-नगर निगम में शामिल गांवों में विकास कार्यों के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किए गए है। पथ प्रकाश की व्यवस्थाएं भी जुटाई जा रही है। अन्य निर्माण कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं।
रविराज बंगारी सहायक नगर आयुक्त नगर निगम श्रीनगर।
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पथ प्रकाश, पेयजल और आम रास्तों की स्थिति बदहाल
श्रीनगर। नगर निगम में शामिल किए गए गांवों में चार वर्ष बीतने के बाद भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। नकोट, दिगोली, धनचड़ा सहित कई गांवों में आज तक नगर निगम जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं। पथ प्रकाश के अभाव में गांवों की गलियां अंधेरे में डूबी रहती हैं जबकि पैदल रास्तों की स्थिति भी बेहद खराब है।
स्थानीय निवासी एवं वन पंचायत सरपंच मनमोहन सिंह नेगी ने बताया कि वर्ष 2021 में उनकी ग्राम पंचायत सहित आसपास के गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि वर्षों से उपेक्षित इन गांवों का समुचित विकास होगा लेकिन चार साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि गांव की कई गलियों और पैदल रास्तों पर आज भी अंधेरा पसरा रहता है। रास्तों की खराब हालत के कारण लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में परेशानी झेलनी पड़ती है।
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साथ ही गुलदार व अन्य जंगली जानवरों का खतरा हर समय बना रहता है। कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए भी अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं हो पाए हैं। इसके अलावा पेयजल समस्या वर्षों पुरानी है जो आज भी जस की तस बनी हुई है। गर्मियों के दौरान लोगों को हैंडपंपों और प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। गांव में कई आम पैदल रास्ते हैं, लेकिन अब तक एक रास्ते का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। पथ प्रकाश के नाम पर भी केवल औपचारिकता निभाई गई है।
मनमोहन सिंह नेगी ने कहा कि नगर निगम में शामिल होने के बाद भी गांवों को कोई विशेष लाभ नहीं मिला है। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से निगम में शामिल गांवों के विकास कार्यों पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की मांग की है।
-नगर निगम में शामिल गांवों में विकास कार्यों के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किए गए है। पथ प्रकाश की व्यवस्थाएं भी जुटाई जा रही है। अन्य निर्माण कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं।
रविराज बंगारी सहायक नगर आयुक्त नगर निगम श्रीनगर।