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Pithoragarh News: स्थानीय फलों से जूस तैयार कर 30 महिलाएं बनीं स्वावलंबी
Sun, 09 Aug 2026 11:05 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 09 Aug 2026 11:05 PM IST
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पिथौरागढ़। कनालीछीना विकासखंड के ध्वज आजीविका समूह की 30 महिलाएं स्थानीय मौसमी फलों से जूस बनाकर उसका व्यवसाय कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामोत्थान की मदद से ये महिलाएं माल्टा, बुरांश, आंवला और आम जैसे फलों की ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और आकर्षक पैकेजिंग करती हैं।
फल प्रसंस्करण संस्थान के माध्यम से इन उत्पादों की स्थानीय बाजारों में आपूर्ति की जाती है। इस कारोबार से जुड़ी प्रत्येक महिला को प्रतिमाह छह से सात हजार यानी सालाना लगभग 84 हजार रुपये की आय हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच यह पहल महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का बड़ा जरिया बन गई है। महिलाओं ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर काफी कम हैं। इसके बावजूद वे अपने इलाके में स्थानीय फलों के माध्यम से आजीविका मजबूत कर रही हैं।
माल्टा के छिलके की बेंगलूरू में मांग अधिक
माल्टा के छिलकों को धूप में सुखाने के बाद फल प्रसंस्करण की सहायता से इन्हें बेंगलूरू में बेचा जाता है। फल प्रसंस्करण संस्थान के लेखाकार संतोष कुमार ने बताया कि बेंगलुरु में छिलके की काफी मांग है। माल्टा के छिलके को ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने में उपयोग किया जाता है। इससे संस्थान को भी 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी होती है। महिलाओं को माल्टा के छिलके का कार्य करने के लिए प्रति किलो पांच रुपये की दर से भुगतान किया जाता है।
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महिलाएं स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामोत्थान विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सहयोग करता है। -प्रतीम भट्ट, जिला परियोजना अधिकारी, पिथौरागढ़
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फल प्रसंस्करण संस्थान के माध्यम से इन उत्पादों की स्थानीय बाजारों में आपूर्ति की जाती है। इस कारोबार से जुड़ी प्रत्येक महिला को प्रतिमाह छह से सात हजार यानी सालाना लगभग 84 हजार रुपये की आय हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों के बीच यह पहल महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का बड़ा जरिया बन गई है। महिलाओं ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर काफी कम हैं। इसके बावजूद वे अपने इलाके में स्थानीय फलों के माध्यम से आजीविका मजबूत कर रही हैं।
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माल्टा के छिलके की बेंगलूरू में मांग अधिक
माल्टा के छिलकों को धूप में सुखाने के बाद फल प्रसंस्करण की सहायता से इन्हें बेंगलूरू में बेचा जाता है। फल प्रसंस्करण संस्थान के लेखाकार संतोष कुमार ने बताया कि बेंगलुरु में छिलके की काफी मांग है। माल्टा के छिलके को ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने में उपयोग किया जाता है। इससे संस्थान को भी 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी होती है। महिलाओं को माल्टा के छिलके का कार्य करने के लिए प्रति किलो पांच रुपये की दर से भुगतान किया जाता है।
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महिलाएं स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामोत्थान विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सहयोग करता है। -प्रतीम भट्ट, जिला परियोजना अधिकारी, पिथौरागढ़