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Pithoragarh News: परदेस छुड़वा रही सिलिंडर किल्लत की तपिश
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 21 Apr 2026 10:51 PM IST
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पिथौरागढ़ में सुबह के समय श्रमिकों से भरा रहने वाले केमू स्टेशन में अब इस तरह छाई है सुनसानी। स
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पिथौरागढ़। रसोई गैस की किल्लत के कारण काम की तलाश में दूसरे राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल के करीब 60 प्रतिशत से अधिक श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं। श्रमिकों की कमी से निर्माण कार्यों पर ब्रेक लग गया है जिससे लोग परेशान हैं। जिले में मौजूद श्रमिकों ने अपना मेहनताना बढ़ा दिया है जिसकी मार लोगों को सहनी पड़ रही है।
सीमांत जिले में यूपी, बिहार के साथ पड़ोसी देश नेपाल के पांच हजार से अधिक श्रमिकों के भरोसे ही भवन सहित अन्य निर्माण कार्य होते हैं। पूर्व में आसानी से रसोई गैस मिलने से श्रमिकों में राहत थी। मौजूदा हालात में श्रमिकों के लिए रसोई गैस का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है। रसोई गैस की किल्लत के चलते श्रमिकों को छोटे सिलिंडर भी उपलब्ध नहीं हो रहे हैँ। ऐसे में दो वक्त का खाना बनाना मुश्किल हुआ तो श्रमिकों ने घर लौटना मुनासिब समझा।
गैस संकट के बीच नगर और आसपास के इलाकों से लगभग 60 प्रतिशत से अधिक कामगार अपने घरों के लिए लौट चुके हैं। रसोई गैस न मिलने से कामगार घर लौटने के लिए विवश हुए तो निर्माण कार्य भी प्रभावित हो गए हैं। लोगों को भवन सहित अन्य निर्माण कार्यों के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे है। ऐसे में लोगों को निर्माण कार्य रोकना पड़ रहा है।
रई के शंकर भट्ट ने बताया कि श्रमिक न मिलने से भवन निर्माण का कार्य रोक दिया है। निर्माण सामग्री पड़ी है लेकिन कार्य करने के लिए श्रमिक नहीं हैं। वहीं कनालीछीना के ठेकेदार भुवन ने बताया कि सरकारी भवन के निर्माण का कार्य मिला है लेकिन काफी खोजने के बाद भी श्रमिक और मिस्त्री नहीं मिल रहे। ऐसे में कार्य को तय समय पर पूरा तक पहुंचाना चुनौती बन गया है।
बोले श्रमिक
अब सिर्फ 40 प्रतिशत श्रमिक नगर में रह रहे हैं। अन्य के घर लौटने की वजह रसोई गैस का इंतजाम न होना है। काम के लिए श्रमिक मिलने मुश्किल हो गए हैं। लोगों ने निर्माण कार्य रोक दिए हैं जिसका असर हमारी रोजी-रोटी पर भी पड़ रहा है। जो श्रमिक यहां रह रहे हैं उन्होंने भी दिहाड़ी बढ़ा दी है। गांवों में काम के दौरान खाना पकाने के लिए श्रमिक लकड़ी से काम चला रहे हैं। - नरेश कुमार, बहराइच, यूपी
खाना बनाने के लिए रसोई गैस का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। हम जैसे दिहाड़ी श्रमिकों के लिए होटलों में खाना खाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में कई मजदूरों को मजबूरी में घर लौटना पड़ा है। मेरे साथ के कई मजदूर घर लौट गए हैं। यदि हालात नहीं सुधरे को मुझे भी घर लौटना पड़ेगा। - पदम बहादुर, बजांग, नेपाल
बोले कांट्रेक्टर
60 प्रतिशत से अधिक मजदूर घर लौट गए हैं। सात-आठ लेबर का काम अब दो से तीन लोगों के सहारे करना पड़ रहा है। ऐसे में दो जगह काम रोकना पड़ा है। वहीं चार जगह काम की रफ्तार धीमी हो गई है। दो अन्य जगह किसी तरह स्थानीय श्रमिकों से काम चल रहा है। मांग अधिक होने से श्रमिकों ने भी मजदूरी बढ़ा दी है। - उमेश शर्मा, कांट्रेक्टर
करीब 10 साइटों पर निर्माण कार्य धीमा हो गया है। रसोई गैस न मिलने से अधिकांश श्रमिक घर लौट गए हैं। काम से लौटने के बाद श्रमिक के लिए लकड़ी का इंतजाम करना मुश्किल है। यदि लकड़ी मिल भी जाए तो भवन स्वामी चूल्हा जलाने से मना करते हैं। इन हालातों में निर्माण कार्य के लिए श्रमिकों की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। - राम सिंह कुशवाहा, कांट्रेक्टर एवं शटरिंग कारोबारी
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गैस संकट के बीच नगर और आसपास के इलाकों से लगभग 60 प्रतिशत से अधिक कामगार अपने घरों के लिए लौट चुके हैं। रसोई गैस न मिलने से कामगार घर लौटने के लिए विवश हुए तो निर्माण कार्य भी प्रभावित हो गए हैं। लोगों को भवन सहित अन्य निर्माण कार्यों के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे है। ऐसे में लोगों को निर्माण कार्य रोकना पड़ रहा है।
रई के शंकर भट्ट ने बताया कि श्रमिक न मिलने से भवन निर्माण का कार्य रोक दिया है। निर्माण सामग्री पड़ी है लेकिन कार्य करने के लिए श्रमिक नहीं हैं। वहीं कनालीछीना के ठेकेदार भुवन ने बताया कि सरकारी भवन के निर्माण का कार्य मिला है लेकिन काफी खोजने के बाद भी श्रमिक और मिस्त्री नहीं मिल रहे। ऐसे में कार्य को तय समय पर पूरा तक पहुंचाना चुनौती बन गया है।
बोले श्रमिक
अब सिर्फ 40 प्रतिशत श्रमिक नगर में रह रहे हैं। अन्य के घर लौटने की वजह रसोई गैस का इंतजाम न होना है। काम के लिए श्रमिक मिलने मुश्किल हो गए हैं। लोगों ने निर्माण कार्य रोक दिए हैं जिसका असर हमारी रोजी-रोटी पर भी पड़ रहा है। जो श्रमिक यहां रह रहे हैं उन्होंने भी दिहाड़ी बढ़ा दी है। गांवों में काम के दौरान खाना पकाने के लिए श्रमिक लकड़ी से काम चला रहे हैं। - नरेश कुमार, बहराइच, यूपी
खाना बनाने के लिए रसोई गैस का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। हम जैसे दिहाड़ी श्रमिकों के लिए होटलों में खाना खाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में कई मजदूरों को मजबूरी में घर लौटना पड़ा है। मेरे साथ के कई मजदूर घर लौट गए हैं। यदि हालात नहीं सुधरे को मुझे भी घर लौटना पड़ेगा। - पदम बहादुर, बजांग, नेपाल
बोले कांट्रेक्टर
60 प्रतिशत से अधिक मजदूर घर लौट गए हैं। सात-आठ लेबर का काम अब दो से तीन लोगों के सहारे करना पड़ रहा है। ऐसे में दो जगह काम रोकना पड़ा है। वहीं चार जगह काम की रफ्तार धीमी हो गई है। दो अन्य जगह किसी तरह स्थानीय श्रमिकों से काम चल रहा है। मांग अधिक होने से श्रमिकों ने भी मजदूरी बढ़ा दी है। - उमेश शर्मा, कांट्रेक्टर
करीब 10 साइटों पर निर्माण कार्य धीमा हो गया है। रसोई गैस न मिलने से अधिकांश श्रमिक घर लौट गए हैं। काम से लौटने के बाद श्रमिक के लिए लकड़ी का इंतजाम करना मुश्किल है। यदि लकड़ी मिल भी जाए तो भवन स्वामी चूल्हा जलाने से मना करते हैं। इन हालातों में निर्माण कार्य के लिए श्रमिकों की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। - राम सिंह कुशवाहा, कांट्रेक्टर एवं शटरिंग कारोबारी

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