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Pithoragarh News: मूनाकोट की तुलसी ने बुटीक के जरिये भरी आत्मनिर्भरता की उड़ान
Sun, 16 Aug 2026 11:24 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 16 Aug 2026 11:24 PM IST
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पिथौरागढ़। जिले के मूनाकोट विकासखंड के बड़ालू गांव की निवासी तुलसी देवी अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गई हैं। लाटा कटारमल स्वयं सहायता समूह और जय मां भगवती सीएलएफ की सक्रिय सदस्य तुलसी वर्तमान में एक सफल बुटीक का संचालन कर आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।
अपने इस सपने को साकार करने के लिए तुलसी ने ग्रामोत्थान योजना से 75 हजार रुपये और बैंक से 1.50 लाख रुपये का ऋण लिया। इसके अलावा, 75 हजार रुपये की राशि उन्होंने स्वयं वहन कर कुल पूंजी से अपने बुटीक की शुरुआत की। आज वह अपनी दुकान में कपड़ों की बिक्री के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता की सिलाई का कार्य भी करती हैं। उनके बनाए गए फैंसी कपड़ों और सिलाई की बेहतरीन फिनिशिंग को ग्राहक खूब पसंद करते हैं।
अपने इस सफल व्यवसाय के जरिये तुलसी प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपये यानी सालाना 3.60 लाख रुपये की शानदार आमदनी अर्जित कर रही हैं। तुलसी बताती हैं कि पहले वह घर पर ही सीमित दायरे में सिलाई का काम करती थीं लेकिन बेहतर आजीविका की चाह ने उन्हें यह बड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। आज वह न केवल खुद आर्थिक रूप से मजबूत हैं बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं।
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सीडीओ डॉ. दीपक सैनी ने तुलसी देवी की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि यदि ग्रामीण महिलाओं को उचित मार्गदर्शन और समय पर वित्तीय सहायता मिल जाए तो वे हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। ग्रामोत्थान जैसी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही हैं।
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अपने इस सपने को साकार करने के लिए तुलसी ने ग्रामोत्थान योजना से 75 हजार रुपये और बैंक से 1.50 लाख रुपये का ऋण लिया। इसके अलावा, 75 हजार रुपये की राशि उन्होंने स्वयं वहन कर कुल पूंजी से अपने बुटीक की शुरुआत की। आज वह अपनी दुकान में कपड़ों की बिक्री के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता की सिलाई का कार्य भी करती हैं। उनके बनाए गए फैंसी कपड़ों और सिलाई की बेहतरीन फिनिशिंग को ग्राहक खूब पसंद करते हैं।
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अपने इस सफल व्यवसाय के जरिये तुलसी प्रतिमाह 25 से 30 हजार रुपये यानी सालाना 3.60 लाख रुपये की शानदार आमदनी अर्जित कर रही हैं। तुलसी बताती हैं कि पहले वह घर पर ही सीमित दायरे में सिलाई का काम करती थीं लेकिन बेहतर आजीविका की चाह ने उन्हें यह बड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। आज वह न केवल खुद आर्थिक रूप से मजबूत हैं बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं।
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सीडीओ डॉ. दीपक सैनी ने तुलसी देवी की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि यदि ग्रामीण महिलाओं को उचित मार्गदर्शन और समय पर वित्तीय सहायता मिल जाए तो वे हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। ग्रामोत्थान जैसी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही हैं।