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महंगाई की मार: बढ़े माल भाड़े से चंपावत में निर्माण कार्य प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:16 PM IST
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चंपावत। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों का असर अब जिले में चल रहे निर्माण कार्यों पर भी दिखाई देने लगा है। माल भाड़ा बढ़ने से कई भवन निर्माण कार्य धीमे पड़ गए हैं। बढ़ती महंगाई का सबसे अधिक असर गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है।
टनकपुर से चंपावत तक माल ढुलाई का भाड़ा एक माह पहले तक 60 से 70 रुपये प्रति क्विंटल था। अब यह बढ़कर 75 से 80 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। वाहन स्वामियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण भाड़ा बढ़ाना उनकी मजबूरी है। कम भाड़े में डीजल, चालक और अन्य खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।
चंपावत जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में इस समय सैकड़ों भवन और अन्य निर्माण कार्य चल रहे हैं लेकिन माल भाड़ा बढ़ने से इन पर सीधा असर पड़ रहा है। भवन निर्माण करा रहे ललित मोहन और देवी दत्त का कहना है कि एक माह पहले जिस वाहन का किराया 12 से 14 हजार रुपये था अब उसी के लिए 16 से 18 हजार रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो निर्माण कार्यों को धीरे-धीरे चरणों में पूरा करना मजबूरी होगी। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते महंगाई से जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है।
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पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि माल भाड़ा भी बढ़ गया है। अब सीधे तीन से चार हजार तक का माला भाड़ा अधिक लग रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य कराना आसान नहीं हो रहा है।
राजेंद्र भट्ट, स्थानीय
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पेट्रोल-डीजल के दाम अगर और बढ़े तो भविष्य में किसी भी प्रकार का निर्माण करना आसान नहीं रहेगा। अधिक धनराशि खर्च कर निर्माण कराना मजबूरी है।
कमल दत्त, स्थानीय
टनकपुर से चंपावत तक माल ढुलाई का भाड़ा एक माह पहले तक 60 से 70 रुपये प्रति क्विंटल था। अब यह बढ़कर 75 से 80 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। वाहन स्वामियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के कारण भाड़ा बढ़ाना उनकी मजबूरी है। कम भाड़े में डीजल, चालक और अन्य खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।
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चंपावत जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में इस समय सैकड़ों भवन और अन्य निर्माण कार्य चल रहे हैं लेकिन माल भाड़ा बढ़ने से इन पर सीधा असर पड़ रहा है। भवन निर्माण करा रहे ललित मोहन और देवी दत्त का कहना है कि एक माह पहले जिस वाहन का किराया 12 से 14 हजार रुपये था अब उसी के लिए 16 से 18 हजार रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही तो निर्माण कार्यों को धीरे-धीरे चरणों में पूरा करना मजबूरी होगी। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते महंगाई से जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है।
पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि माल भाड़ा भी बढ़ गया है। अब सीधे तीन से चार हजार तक का माला भाड़ा अधिक लग रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य कराना आसान नहीं हो रहा है।
राजेंद्र भट्ट, स्थानीय
पेट्रोल-डीजल के दाम अगर और बढ़े तो भविष्य में किसी भी प्रकार का निर्माण करना आसान नहीं रहेगा। अधिक धनराशि खर्च कर निर्माण कराना मजबूरी है।
कमल दत्त, स्थानीय