सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Hunger created a ruckus... then the ears of the system heard the sobs of helplessness.

Pithoragarh News: भूख ने मचाया शोर... तब सिस्टम के कानों ने सुनीं लाचारी की सिसकियां

संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Thu, 26 Feb 2026 11:06 PM IST
विज्ञापन
Hunger created a ruckus... then the ears of the system heard the sobs of helplessness.
विज्ञापन
पिथौरागढ़। मजबूर मां-बेटे की भूख ने सोशल मीडिया पर ऐसा शोर मचाया कि उसने व्यवस्था की चुप्पी को भी चीर दिया। वीडियो वायरल हुआ तो प्रशासन तक पीड़ा पहुंची और डीएम ने मदद के लिए रात को टीम भेजी।
Trending Videos

गंगोलीहाट तहसील के दूरस्थ गांव जमड़कोट में रहने वाली बुजुर्ग लछिमा देवी और उनके बेटे पंकज मेहरा की लाचारी अचानक चर्चा में आ गई है। टूटे-फूटे कमरे में गुजर-बसर कर रहे इस मां-बेटे की दुनिया दो वक्त की रोटी के इंतजाम तक सिमट गई थी। बेटा गांव के लोगों से रोटी मांगकर लाता था और मां की भूख मिटाने की कोशिश करता था। वर्षों से गरीबी और अभाव की छाया में जी रहे इस परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं था। न योजनाएं, न वादे, न ही वे लोग जिनके चुनाव चिन्ह उनके दरवाजे पर आज भी चस्पा हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्षेत्र के कुछ युवाओं ने उनकी यह पीड़ा सोशल मीडिया पर साझा की। तब जाकर यह सिसकियां प्रशासन तक पहुंचीं। जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल राहत पहुंचाने और परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए। बुधवार रात करीब 9:20 बजे राजस्व विभाग की टीम अंधेरे में जमड़कोट पहुंची। मां-बेटे को राशन किट, कंबल और आर्थिक सहायता दी गई। मगर राहत के इस पल में भी लछिमा देवी की सबसे बड़ी मांग रोटी नहीं बल्कि सिर छुपाने लायक एक सुरक्षित छत थी।

वोट मांगने वाले मदद के लिए नहीं आए
जिस घर के दरवाजे पर पंचायत चुनाव की प्रचार सामग्री अब भी चिपकी है उसी घर तक कभी कोई नेता या पंचायत स्तर का अधिकारी मदद के लिए नहीं आया। अब जब वीडियो सामने आया तो उम्मीद है कि शायद यह संवेदनशील हस्तक्षेप स्थायी सहारे में बदल जाए। उम्मीद जगी कि शायद अब इस लंबे संघर्ष पर संवेदना का मरहम लगे। बेबस मां ने राजस्व टीम से अन्य मदद की बजाय पहले सिर छुपाने लायक एक आवास की व्यवस्था कर देने की गुहार लगाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed