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Pithoragarh: छह साल बाद जून में फिर से शुरू होगा भारत-चीन व्यापार, लिपुलेख के लिए जारी होंगे इनर लाइन परमिट

अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 23 Apr 2026 02:54 AM IST
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सार

व्यापारियों को लिपुलेख तक जाने के लिए इनर लाइन परमिट जारी होंगे। इससे आगे तकलाकोट मंडी पहुंचने के लिए व्यापारियों को ट्रेड पास बनाना होगा।

Pithoragarh: India-China trade to resume in June after six years
demo - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

आखिरकार छह साल के लंबे इंतजार के बार इस बार फिर से लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार शुरू होगा। व्यापारियों को लिपुलेख तक जाने के लिए इनर लाइन परमिट जारी होंगे। इससे आगे तकलाकोट मंडी पहुंचने के लिए व्यापारियों को ट्रेड पास बनाना होगा।

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भारत-चीन व्यापार को लेकर कलक्ट्रेट सभागार में डीएम आशीष भटगाईं की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में अधिकारी और व्यापारी शामिल रहे। डीएम ने कहा कि विदेश मंत्रालय से लिपुलेख दर्रे से व्यापार शुरू करने की हरी झंडी पहले ही मिल चुकी है। जून के पहले सप्ताह से सितंबर तक व्यापार चलेगा। व्यापार की व्यवस्था पूर्व की तरह होगी। व्यापारियों को लिपुलेख तक पहुंचने के लिए इनर लाइन परमिट जारी किए जाएंगे। तकलाकोट मंडी पहुंचने के लिए व्यापारियों को ट्रेड पास जारी होंगे।
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न व्यापारियों का जीएसटी में पंजीकरण होगा वहीं व्यापार के लिए अधिकृत होंगे। व्यापारियों ने कहा कि मालपा के पास भूधंसाव हो रहा है। व्यापार शुरू होने से पहले इस समस्या को दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ओल्ड लिपुपास तक वाहनों से सामान पहुंचाने की अनुमति से राहत मिलेगी। इस दौरान व्यापारियों ने तकलाकोट से पहुंची बकरियों को क्वारंटाइन करने के लिए केंद्र स्थापित कर मवेशियों के लिए नाभीढांग से आगे पड़ाव बनाने की मांग की।

कस्टम कार्यालय का अता-पता नहीं
भारत-चीन व्यापार को लेकर व्यापारियों में उत्साह है। व्यापारियों ने कहा कि व्यापार में कस्टम विभाग की लापरवाही सामने आती है। पूर्व में ऐसा हो चुका है कि गुंजी में कस्टम विभाग का समय पर कार्यालय स्थापित न होने से व्यापार दो सप्ताह से अधिक देरी से शुरू हुआ। डीएम ने जब कस्टम विभाग के अधिकारियों से इस बारे में बात की तो सामने आया कि अब तक गुंजी में कस्टम कार्यालय खोलने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। 

  • विभागीय अधिकारियों का कहना था कि इस मामले में लखनऊ निदेशालय को पत्र तो भेजा गया है लेकिन वहां से इसका अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
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