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Pithoragarh News: पिथौरागढ़ डिपो में टायरों की कमी, पांच बसें फिर खड़ी हुईं
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:21 AM IST
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पिथौरागढ़। सार्वजनिक परिवहन का सबसे मजबूत आधार रोडवेज बसों का संचालन कुप्रबंधन का शिकार नजर आ रहा है। यही वजह है कि पिथौरागढ़ डिपो में तकनीकी कारणों से आए दिन बसों के खराब होने या सामग्री और चालकों के अभाव में बसों का संचालन ठप होने की समस्या बढ़ गई है। टायरों की कमी के कारण डिपो कार्यशाला में पांच बसें खड़ी हैं। चालकों की कमी से दो बसों को संचालित लगातार बाधित चल रहा है। ऐसे में यात्री परेशान हैं लेकिन प्रबंधन उदासीन बना हुआ है।
पिथौरागढ़ डिपो अब फिर से टायरों की कमी झेल रहा है। इस कारण बसों के खड़ी होने का सिलसिला शुरू हो गया है। वर्कशॉप में पांच बसें खड़ी हैं। ऐसे में डिपो प्रबंधन भी रूटों पर बसों का नियमित संचालन जारी रखने के लिए यहां पहुंचने वाली बस को चालक बदलकर रवाना कर दे रहा है। जानकारी के अनुसार डिपो को फिलहाल 40 नए और 100 रबर चढ़े टायरों की जरूरत है। वहीं चालकों के अभाव में डिपो की देहरादून द्वितीय सेवा और हरिद्वार सेवा लगातार बाधित चल रही है। इन हालातों में डिपो प्रबंधन के सामने बसों का सुचारू और व्यवस्थित संचालन बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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एजेंसी से भर्ती कार्मिकों को चार माह से नहीं मिला मानदेय
डिपो में एजेंसी के जरिये भर्ती चालकों और अन्य कार्मिकों को चार माह से मानदेय नहीं मिल पाया है जिससे कर्मचारी काफी परेशान हैं। घर चलाने में उनको दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर उनके कामकाज पर भी पड़ रहा है। हालांकि पिछले दिनों डिपो प्रबंधन ने बताया कि एक माह का मानदेय आ गया है लेकिन सवाल है कि निगम से यदि एजेंसी को भुगतान हो गया है तो कर्मचारियों को क्यों नहीं मिल रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि हर बार कर्मचारियों की भर्ती के लिए नई एजेंसी क्यों तय की जा रही है। वहीं स्थायी कार्मिकों के बकाया तीन माह के वेतन में से एक माह का वेतन अब मिल गया है।
कोट
मानदेय आने में एक-से डेढ़ माह का समय लग जाता है। मेरी जानकारी के हिसाब से एजेंसी कार्मिकों का फरवरी तक का मानदेय शायद आ गया है। मार्च का बचा है। कर्मचारियों को यदि मानदेय नहीं मिला है तो उन्हें एजेंसी से शिकायत करनी चाहिए। एके बनवाल, आरएम, टनकपुर मंडल
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पिथौरागढ़ डिपो अब फिर से टायरों की कमी झेल रहा है। इस कारण बसों के खड़ी होने का सिलसिला शुरू हो गया है। वर्कशॉप में पांच बसें खड़ी हैं। ऐसे में डिपो प्रबंधन भी रूटों पर बसों का नियमित संचालन जारी रखने के लिए यहां पहुंचने वाली बस को चालक बदलकर रवाना कर दे रहा है। जानकारी के अनुसार डिपो को फिलहाल 40 नए और 100 रबर चढ़े टायरों की जरूरत है। वहीं चालकों के अभाव में डिपो की देहरादून द्वितीय सेवा और हरिद्वार सेवा लगातार बाधित चल रही है। इन हालातों में डिपो प्रबंधन के सामने बसों का सुचारू और व्यवस्थित संचालन बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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एजेंसी से भर्ती कार्मिकों को चार माह से नहीं मिला मानदेय
डिपो में एजेंसी के जरिये भर्ती चालकों और अन्य कार्मिकों को चार माह से मानदेय नहीं मिल पाया है जिससे कर्मचारी काफी परेशान हैं। घर चलाने में उनको दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका असर उनके कामकाज पर भी पड़ रहा है। हालांकि पिछले दिनों डिपो प्रबंधन ने बताया कि एक माह का मानदेय आ गया है लेकिन सवाल है कि निगम से यदि एजेंसी को भुगतान हो गया है तो कर्मचारियों को क्यों नहीं मिल रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि हर बार कर्मचारियों की भर्ती के लिए नई एजेंसी क्यों तय की जा रही है। वहीं स्थायी कार्मिकों के बकाया तीन माह के वेतन में से एक माह का वेतन अब मिल गया है।
कोट
मानदेय आने में एक-से डेढ़ माह का समय लग जाता है। मेरी जानकारी के हिसाब से एजेंसी कार्मिकों का फरवरी तक का मानदेय शायद आ गया है। मार्च का बचा है। कर्मचारियों को यदि मानदेय नहीं मिला है तो उन्हें एजेंसी से शिकायत करनी चाहिए। एके बनवाल, आरएम, टनकपुर मंडल

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