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Rishikesh News: कंस्ट्रक्शन कंपनी से 47.80 लाख की वसूली
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Tue, 31 Mar 2026 02:37 AM IST
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फर्जी फर्मों के माध्यम से खरीद दिखाकर टैक्स चोरी के आरोप में राज्य कर विभाग ने ऋषिकेश की एक प्रमुख कंस्ट्रक्शन कंपनी पर कार्रवाई की है। कंपनी से 47.80 लाख की टैक्स वसूली की गई है। विभाग का कहना है कि अभी ब्याज सहित जुर्माना भी वसूला जाएगा।
राज्य कर विभाग की उपायुक्त गुलरेज रिजवी ने बताया कि प्राथमिक जांच के दौरान विभाग को उक्त कंपनी की खरीद संदिग्ध लगी। उक्त फर्म अंबाला की किसी कंपनी से फर्जी खरीद दिखा रही थी। जिसके बाद संबंधित फर्म की जांच के लिए अंबाला के अधिकारियों को पत्र भेजा गया। जांच में पता चला कि जिस फर्म से खरीद दिखाई जा रही थी, वह स्वयं भी फर्जी फर्मों से लेन-देन कर रही थी।
इस तरह फर्जी कंपनियों की एक पूरी चेन सामने आई, जिसके जरिए टैक्स चोरी की जा रही थी। इसके बाद जीएसटी टीम ने कंपनी के कार्यालय में पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की और माल की वास्तविकता के संबंध में जवाब मांगा, लेकिन कंपनी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। पूछताछ के दौरान कंपनी ने अपनी गलती स्वीकार कर ली।
उपायुक्त गुलरेज रिजवी ने बताया कि मामले में कंपनी ने तत्काल करीब 47 लाख 80 हजार रुपये की राशि जमा कर दी, जो उसने फर्जी खरीद के आधार पर टैक्स में लाभ के रूप में हासिल की थी। जांच अभी जारी है। कंपनी से ब्याज सहित जुर्माना भी वसूला जाएगा। विभाग अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है और अन्य संबंधित फर्मों की भी जांच की जा रही है। जांच दल में सहायक आयुक्त अविनाश झा के साथ ही आयुक्त रजनीकांत शाही, राज्य कर अधिकारी संदीप चानना राज्य कर अधिकारी मोहन सिंह राणा आदि अधिकारी शामिल रहे।
राज्य कर विभाग की उपायुक्त गुलरेज रिजवी ने बताया कि प्राथमिक जांच के दौरान विभाग को उक्त कंपनी की खरीद संदिग्ध लगी। उक्त फर्म अंबाला की किसी कंपनी से फर्जी खरीद दिखा रही थी। जिसके बाद संबंधित फर्म की जांच के लिए अंबाला के अधिकारियों को पत्र भेजा गया। जांच में पता चला कि जिस फर्म से खरीद दिखाई जा रही थी, वह स्वयं भी फर्जी फर्मों से लेन-देन कर रही थी।
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इस तरह फर्जी कंपनियों की एक पूरी चेन सामने आई, जिसके जरिए टैक्स चोरी की जा रही थी। इसके बाद जीएसटी टीम ने कंपनी के कार्यालय में पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की और माल की वास्तविकता के संबंध में जवाब मांगा, लेकिन कंपनी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। पूछताछ के दौरान कंपनी ने अपनी गलती स्वीकार कर ली।
उपायुक्त गुलरेज रिजवी ने बताया कि मामले में कंपनी ने तत्काल करीब 47 लाख 80 हजार रुपये की राशि जमा कर दी, जो उसने फर्जी खरीद के आधार पर टैक्स में लाभ के रूप में हासिल की थी। जांच अभी जारी है। कंपनी से ब्याज सहित जुर्माना भी वसूला जाएगा। विभाग अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है और अन्य संबंधित फर्मों की भी जांच की जा रही है। जांच दल में सहायक आयुक्त अविनाश झा के साथ ही आयुक्त रजनीकांत शाही, राज्य कर अधिकारी संदीप चानना राज्य कर अधिकारी मोहन सिंह राणा आदि अधिकारी शामिल रहे।