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Rishikesh News: सौंग नदी की टूटी सुरक्षा दीवार नहीं हुई ठीक, 400 बीघा खेती भी दांव पर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sun, 17 May 2026 02:48 AM IST
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छिद्दरवाला क्षेत्र में सौंग नदी किनारे बनी सुरक्षा दीवार का करीब 500 मीटर हिस्सा वर्ष 2025 की बरसात में टूट गया था। प्रशासन ने एक साल बीतने के बाद भी इसकी मरम्मत नहीं कराई है। इससे पांच हजार की आबादी और ग्रामीणों की करीब 400 बीघा कृषि भूमि खतरे में है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग लगातार शिकायतों के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वर्ष 2003-04 में करोड़ों रुपये खर्च कर यह सुरक्षा दीवार बनाई गई थी। इसका उद्देश्य सौंग नदी के तेज बहाव को आबादी से दूर रखना था। जोगीवाला माफी क्षेत्र में दीवार टूटने के बाद नदी का रुख सीधे आबादी की ओर हो गया है। यदि समय रहते निर्माण कार्य नहीं हुआ तो बरसात में जलस्तर बढ़ने पर पानी गांव में घुस सकता है।
ग्राम प्रधान शैलेंद्र सिंह रांगड़ ने प्रशासन और सिंचाई विभाग को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया है। उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही उनकी जान पर भारी पड़ सकती है। अभी मरम्मत के लिए समय है, यदि बरसात के दौरान कार्य किया गया तो यह पैसों की बर्बादी होगी।
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अमृत सरोवर भी क्षतिग्रस्त
ग्राम पंचायत की ओर से करीब 40 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया अमृत सरोवर भी प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है। पूर्व प्रधान सोबन सिंह कैंतुरा ने बताया कि वर्ष 2023 में करीब पांच बीघा क्षेत्र में यह सरोवर बनाया गया था। सुरक्षा दीवार टूटने के बाद नदी का पानी इसमें घुस गया। इससे पूरा ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। परिसर में बच्चों के झूले और युवाओं के लिए बना ओपन जिम भी बर्बाद हो गया है। ग्रामीणों ने कहा है कि यदि बरसात शुरू होने से पहले सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं कराया गया तो क्षेत्र में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।
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यह काफी पुरानी दीवार थी। पीडीएनए (आपदा के बाद की जरूरतों का आकलन) के तहत प्रस्ताव भेजा जाएगा। - दिनेश बर्मन, अपर सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग
ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग लगातार शिकायतों के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वर्ष 2003-04 में करोड़ों रुपये खर्च कर यह सुरक्षा दीवार बनाई गई थी। इसका उद्देश्य सौंग नदी के तेज बहाव को आबादी से दूर रखना था। जोगीवाला माफी क्षेत्र में दीवार टूटने के बाद नदी का रुख सीधे आबादी की ओर हो गया है। यदि समय रहते निर्माण कार्य नहीं हुआ तो बरसात में जलस्तर बढ़ने पर पानी गांव में घुस सकता है।
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ग्राम प्रधान शैलेंद्र सिंह रांगड़ ने प्रशासन और सिंचाई विभाग को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया है। उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की लापरवाही उनकी जान पर भारी पड़ सकती है। अभी मरम्मत के लिए समय है, यदि बरसात के दौरान कार्य किया गया तो यह पैसों की बर्बादी होगी।
अमृत सरोवर भी क्षतिग्रस्त
ग्राम पंचायत की ओर से करीब 40 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया अमृत सरोवर भी प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है। पूर्व प्रधान सोबन सिंह कैंतुरा ने बताया कि वर्ष 2023 में करीब पांच बीघा क्षेत्र में यह सरोवर बनाया गया था। सुरक्षा दीवार टूटने के बाद नदी का पानी इसमें घुस गया। इससे पूरा ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। परिसर में बच्चों के झूले और युवाओं के लिए बना ओपन जिम भी बर्बाद हो गया है। ग्रामीणों ने कहा है कि यदि बरसात शुरू होने से पहले सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं कराया गया तो क्षेत्र में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।
यह काफी पुरानी दीवार थी। पीडीएनए (आपदा के बाद की जरूरतों का आकलन) के तहत प्रस्ताव भेजा जाएगा। - दिनेश बर्मन, अपर सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग